पीएम मोदी आज लखनऊ में डिफेंस एक्सपो 2020 का करेंगे उद्घाटन

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज उत्‍तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ में रक्षा प्रदर्शनी 2020 का उद्घाटन करेंगे। हर दूसरे वर्ष होने वाली रक्षा प्रदर्शनी का यह 11वां संस्‍करण होगा। 70 से अधिक देश इसमें हिस्‍सा लेंगे। ये प्रदर्शनी सबसे बड़ी अंतर्राष्‍ट्रीय रक्षा प्रदशर्नियों के अनुरूप होगी। 5-9 फरवरी, के बीच होने वाले इस एक्सपो में 1000 राष्‍ट्रीय और अंतर्राष्‍ट्रीय कंपनियां अपना सामान प्रदर्शित करेंगी। ॉ

बुधवार को लखनऊ में जब डेफएक्‍सपो 2020 का उदघाटन होगा तो इस कार्यक्रम की अध्यक्षता करने के लिए मौजूद होंगे खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी । हर दो साल पर होने वाले देश के इस डिफेंस एक्सपो का ये 11 वां संस्करण है और ये अब तक का सबसे बड़ा डेफएक्‍सपो है।  5-9 फरवरी, के बीच होने वाले इस एक्सपो में 1000 राष्‍ट्रीय और अंतर्राष्‍ट्रीय कंपनियां अपना सामान प्रदर्शित करेंगी । 

इस बार एक्‍सपो का विषय है : 'भारत: उभरता हुआ रक्षा निर्माण केन्‍द्र'। इस प्रदर्शनी का उद्देश्‍य रक्षा क्षेत्र की महत्‍वपूर्ण प्रौद्योगिकियों को एक स्‍थान पर लाना और सरकार, निजी निर्माताओं तथा स्‍टार्टअप को अनगिनत अवसर प्रदान करना है। इस बार डिफेंस एक्सपो में रक्षा क्षेत्र में डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल पर भी फोकस होगा 

इंडिया पेविलियन' में विशेष रूप से लघु और मध्‍यम उद्यम , सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यमके साथ ही नवोन्‍मेषी इकोसिस्‍टम सहित सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बीच मजबूत भागीदारी को दर्शाया जाएगा, जो आगे बढ़ने का संकेत है। डेफएक्‍सपो 2020 में 70 से अधिक देश हिस्सा ले रहे हैं  जिसमें अमेरिका , फ्रांस , जर्मनी , रुस जैसे देश शामिल हैं ।

प्रदर्शनी में भारत की ओर से अनुसंधान और विकास संगठन यानी डीआरडीओ  की ओर से स्वदेशी सैन्य प्रणालियों और प्रौद्योगिकियों को प्रदर्शित किया जाएगा । डीआरडीओ  सभी प्रौद्योगिकी समूहों के 500 से अधिक उत्पादों को प्रदर्शित करेगा।  वहीं अमेरिकी रक्षा कम्पनी बोईंग की बड़ी भागीदारी होगी।  

प्रदर्शनी के दौरान भारत को पूरी दुनिया के सामने अपनी रक्षा उत्पादन क्षमता दिखाने का अनोखा मौका मिलेगा। उम्मीद है कि  इस प्रदर्शनी के दौरान कई सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर किए जाएंगे, जिससे नए व्यापार सहयोग बढ़ेगा। डेफ एक्सपो- 2020 में अमेरिका, रूस और यूरोप की अग्रणी रक्षा कम्पनियां भाग लेंगी तो भारतीय रक्षा कम्पनियों को उनके साथ बातचीत कर उनके सहयोग से भारत में संयुक्त उद्यम स्थापित करने के  लिये नये अवसर भी मिलेंगे।

 



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