एससी,एसटी, ओबीसी के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध: केंद्र सरकार

सुप्रीम कोर्ट के उत्तराखंड के एक मामले में फैसले को लेकर एक बार फिर पदोन्नति में आरक्षण का विवाद गहरा गया है. शीर्ष अदालत ने शु्क्रवार को अपनी टिप्पणी में कहा कि सरकारी नौकरियों में प्रमोशन में आरक्षण मौलिक अधिकार नहीं है ..इसे लेकर आज संसद के दोनों सदनों में हंगामा देखने के मिला. हालांकि सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री ने उच्च स्तरीय समीक्षा का आश्वासन दिया. कई दलों ने मांग की कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में समीक्षा याचिका दायर करे.

इस बीच सरकार ने संसद में स्पष्ट किया कि वह एससी, एसटी के लिए आरक्षण को प्रतिबद्ध है । लोकसभा में इस मुद्दे पर अपने बयान में वक्तव्य में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने कहा कि इस फैसले को लेकर भारत सरकार उचित कदम उठायेगी। इससे पहले न्यायालय के फैसले का मुद्दा लोकसभा में प्रश्नकाल और शून्यकाल में छाया रहा। कांग्रेस के साथ ही कुछ विपक्षी दलों ने मामला उठाया और सरकार से शीर्ष अदालत में समीक्षा याचिका दायर करने को कहा। इस पर सरकार की ओर से  रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि  2012 में उत्तराखंड में कांग्रेस की सरकार थी और कांग्रेस का ऐसे मुद्दे पर राजनीति करना ठीक नहीं है।

राज्यसभा में तमाम सदस्यों से मामला उठाया और सरकार से   अनुसूचित जाति जनजाति के लोगों के लिए पदोन्नति में आरक्षण व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया तो सरकार की ओर से थावर चंद गहलोत ने कहा कि अदालत के फैसले पर उच्चस्तरीय विचार कर केन्द्र सरकार उचित फैसला करेगी। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ्ते अपने फैसले में कहा था कि  राज्य सरकारें नियुक्तियों में आरक्षण देने के लिए बाध्य नहीं है तथा पदोन्नति में आरक्षण का दावा करने का कोई मूल अधिकार नहीं है ।  उत्तराखंड सरकार के पांच सितम्बर 2012 के फैसले को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए शीर्ष न्यायालय ने यह टिप्पणी की। 



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