आरबीआई ने अपनी मौद्रिक नीति की समीक्षा में ब्याज दरों में नहीं किया कोई बदलाव

आरबीआई का मानना है कि महंगाई के मुद्दे पर गंभीर अनिश्तितता का माहौल बना हुआ है। केंद्रीय बैंक ने कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए दूध और दाल जैसी वस्तुओं के रेट बढ़ सकते हैं। इसे ध्यान में रखकर आरबीआई ने महंगाई दर का अनुमान बढ़ाया है।

आरबीआई ने वित्त वर्ष 2020-21 के लिए अनुमानित विकास दर 6 फीसदी रखी है। यानी आरबीआई के अनुसार 2020-21 में देश की विकास दर 6 फीसदी रह सकती है। इनमें अगले वित्त वर्ष की पहली छमाही में विकास दर 5.5-6 फीसदी और तीसरी तिमाही में 6.2 फीसदी रह सकती है।

केंद्रीय बैंक ने छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में बदलाव की जरूरत भी बताई।भारतीय रिज़र्व बैंक ने कॉमर्शियल रियल्टी लोन लेने वालों को बड़ी राहत दी है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि इकोनॉमिक ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए ब्याज दरों के अलावा दूसरे तरीके भी हैं।

आरबीआई ने अपनी मौद्रिक नीति की समीक्षा में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। रेपो दर 5.15 फीसद पर बरकरार रखी गई है। बजट और आर्थिक समीक्षा के बाद आने वाली इस नीति का ब्याज दरों के लिहाज से काफी अहमियत है। आरबीआई का मानना है कि महंगाई के मुद्दे पर गंभीर अनिश्तितता का माहौल बना हुआ है लिहाजा ब्याज दरों से छेड़छाड़ नहीं करने का फैसला लिया गया।  साल 2020-21 के लिए विकास दर 6 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया है।



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