जो कहा, सो किया : वादे पूरे करने वाली आपकी सरकार


विधानसभा चुनाव में छत्तीसगढ़ की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने के लिये छत्तीसगढ़ के चार चिन्हारी- नरवा, गरूवा, घुरवा, बाड़ी पर आधारित कार्ययोजना को जनघोषणा पत्र में शामिल किया गया था। नरवा, गरूवा, घुरवा, बाड़ी की हमारी सोच के कारण ही देश में पहली बार भारतीय किसान सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक और अर्थव्यवस्था की बहस के केंद्र में आया। घोषणा पत्र में छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति को अपनी प्राथमिकता में सबसे ऊपर रखने के कारण देश के दूसरे राज्यों ने भी कृषि को सुदृढ़ करने को अपना पहला लक्ष्य बनाया।

जो कहा, सो करेंगे

सरकारी तंत्र को किसानों के हित के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए कृषि विभाग का नाम बदल कर कृषि विकास, किसान कल्याण और जैव प्रौद्योगिकी विभाग रखने का फैसला किया है। नरवा, गरूवा, घुरवा और बाड़ी को लेकर नई संकल्पना के साथ कार्य करने के लिये राज्य सरकार ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। इसके साथ- साथ राज्य सरकार के सभी संबंधित विभाग इसके लिये समय बद्ध कार्य योजना बना रहे हैं। आरंभिक तौर पर प्रथम चरण में 16 46 ग्राम पंचायतों में गौठान निर्माण की प्रक्रिया भी शुरु कर दी गई है, इसके अलावा अक्षय कृषि को लागू करने की दिशा में भी कार्य आरंभ हो चुका है।


2500 रुपए प्रति क्रिटल की दर से धान खरीदी

पुरानी सरकार ने 2017-18 में धान के लिये प्रति क्लिंटल 15 50 रुपये न्यूनतम समर्थन मूल्य का भुगतान किया था| जनघोषणा पत्र में वादा किया गया था कि वह छत्तीसगढ़ के किसानों को धान के लिये प्रति क्नलिंटल 2500 रुपये का भुगतान करेंगे।

राज्य में नई सरकार के मुखिया श्री भूपेश बघेल ने कार्यभार संभालते ही 17 दिसंबर 2018 को सबसे पहले अपने इसी संकल्प को पूरा करने के निर्देश दिये और सरकार ने 2018-19 में छत्तीसगढ़ के किसानों से 2500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से 80,37,011 मीट्रिक टन धान खरीदी करके अपना वादा निभाया, इस साल 9 जनवरी को विधानसभा में पेश अनुपूरक बजट में धान खरीदी के लिये 3,070 करोड़ रुपये स्वीकृत किये गये हैं। जिन किसानों ने धान बेचा है, मार्च 2019 से उन्हें संशोधित दर पर भुगतान शुरु हो जायेगा।

इसी तरह सरकार बनने से पहले 2018-19 में पुराने समर्थन मूल्य पर जिन किसानों ने धान बेचा था, उन्हें भी अंतर राशि का भुगतान किया जा रहा हैं। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद सरकार ने गरीबों को 35 किलो चावल देने की शुरुआत की थी। सरकार का लक्ष्य था कि राज्य में हरेक व्यक्ति के लिये भोजन का अधिकार सुनिश्चित हो। लेकिन पिछली सरकार ने चावल की इस मात्रा में कटौती कर के प्रत्येक व्यक्ति के लिये महज 7 किलो चावल देने का नियम बना दिया था।

जनघोषणा पत्र में फिर से सभी परिवारों को 35 किलो चावल देने का वादा किया गया था। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने अपने पहले ही बजट में इस वादे को पूरा करने की पहल की। गरीब परिवारों को भरपेट भोजन की व्यवस्था के लिए सरकार ने प्रत्येक राशन कार्ड पर 35 किलो चावल देने का निर्णय लिया परिवार के सदस्यों की संख्या 5 से अधिक होने पर प्रति सदस्य 7 किलो अतिरिक्त चावल देने की व्यवस्था की गई है |

अल्कालीन कृषि ऋण माफ

अल्पकालीन कृषि ऋण की मार झेल रहे किसानों से जनघोषणा पत्र में वादा किया गया था कि10 दिनों के भीतर उनका पूरा कर्ज माफ़ किया जायेगा। 17 दिसंबर 2018 को सरकार गठन के दिन ही मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने कैबिनेट की बैठक बुलाई और छत्तीसगढ़ के किसानों के 6,230 करोड़ रुपये से अधिक के अल्पकालिक कृषि ऋण को माफ़ करने का फ़ैसला लिया . 10 दिनों के भीतर इसके तहत प्रथम चरण में 1 नवम्बर 2018 से 24 दिसम्बर 2018 तक लिकिंग के माध्यम से राज्य की 127 6 सहकारी समितियों की ३ लाख 57 हजार किसानों से वसूल की गयी 1248 करोड़ अल्पकालीन कृषि ऋण राशि किसानों के बचत खातों में वापस कर दी गई . कर्ज माफ़ी के तहत अधिकतम 5 लाख रुपये तक के ऋण माफ किये जायेंगे, इसके अलावा अब राष्ट्रीयकृत बैंकों से लिये गये अल्पकालिक ऋण की दिशा में भी राज्य सरकार कार्रवाई कर रही है।


सिंचाई को लेकर जन घोषणापत्र में वादा किया गया था कि सिंचाई कर की माफी की जायेगी। 26 जनवरी के दिन मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने किसानों की लगभग 15 वर्षों से लम्बित सिंचाई कर की बकाया राशि को मिलाकर अक्टूबर, 2018 तक सिंचाई कर की 207 करोड़ रूपए की बकाया राशि भी माफ़ करने का ऐलान करके अपना वादा पूरा किया। इसके अलावा पिछली सरकार के उलट राज्य सरकार ने रबी की फसल के लिये भी किसानों को पानी देने का फैसला किया है।

पांचहॉर्स पॉवर के पंपों को मुफ्त बिजली

जनघोषणा पत्र में किसानों को खेती के लिये बेहतर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 5 हॉर्स पॉवर की क्षमता वाले पंपों के लिये मुफ़्त बिजली उपलब्ध कराने की घोषणा की गई थी। 

जो कहा, सो करेंगे 

राज्य सरकार ने 5 हॉर्स पॉवर की क्षमता के कृषि पंपों को मुफ्त बिजली देने के लिये अपने बजट में 2164 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, इसके अलावा किसानों को सिंचाई के लिये जल आपूर्ति हेतु एकल खिड़की की व्यवस्था पर भी काम जारी है। सरकार ने नये कृषि पंपों को सक्रिय करने के लिये बजट में 10 0 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, वहीं 20 हजार नये सौर पंपों की स्थापना के लिये 467 करोड़ रुपये बजट में आवंटित किये गये हैं।

छत्तीसगढ़ में अतिशेष बिजली के बाद भी गलत नीतियों के कारण राज्य की आम जनता को बिजली के लिये अधिक कीमत चुकानी पड़ती है, जनघोषणा पत्र में 400 यूनिट तक बिजली खपत की दर को आधा करने का वादा का किया गया था।

जो कहा, सो किया

राज्य सरकार ने विस्तृत कार्ययोजना बना कर बिजली बिल आधा करने के फैसले पर अमल शुरु कर दिया और मार्च महीने से उपभोक्ताओं को 400 यूनिट तक बिजली खपत पर आधा बिल देने का फैसले पर सरकार ने मुहर भी लगा दी है अब उपभोक्ताओं को 400 यूनिट बिजली की खपत पर प्रति यूनिट 2 .7 5 रुपए देना होगा, इससे पहले उपभोक्ताओं को प्रति यूनिट 5 .30 रुपए देने पड़ते थे।

बस्तर के किसानों की जमीन वापसी

बस्तर के लोहंडीगुड़ा में टाटा के स्टील प्लांट के नाम पर ग्राम सभा की सहमति के बिना ग्रामीणों की जमीन लिये जाने और प्लांट के लिये टाटा द्वारा इंकार किये जाने के बाद भी उस जमीन को लैंड बैंक के नाम पर रखे जाने को लेकर शुरु से सवाल उठते रहे हैं, जनघोषणा पत्र में पेसा कानून को सख्ती से लागू किये जाने के अलावा टाटा स्टील के नाम पर अधिग्रहित ज़मीन को किसानों को वापस किये जाने का वादा किया गया था। 

जो कहा, सो किया 

भू अधिग्रहण कानून में यह स्पष्ट उल्लेख है कि यदि अधिग्रहित जमीन पर पांच साल के भीतर उद्योग स्थापना का काम नहीं होता है, तो वह जमीन किसानों को वापस कर दी जाएगी , लेकिन देश में पहली बार इस कानून को लागू करने का काम छत्तीसगढ़ सरकार ने किया, सरकार बनने के एक सप्ताह के भीतर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने लोहंडीगुड़ा के किसानों को उनकी जमीन वापस करने के फैसले पर कार्रवाई शुरु कर दी, टाटा इस्पात संयंत्र के लिए यह भूमि फरवरी 2008 और दिसम्बर 20 08 में अधिग्रहित की गई थी और 2016 में कंपनी ने तत्कालीन राज्य सरकार को पत्र लिखकर यहां उद्योग लगाने में अपनी असमर्थता जताई थी।

16 फरवरी 2019 को लोहंडीगुड़ा विकास खंड के ग्राम धुरागांव में आयोजित विशाल आदिवासी कृषक अधिकार सम्मेलन में टाटा संयंत्र के लिए अधिग्रहित दस गांवों के 170 7 किसानों को 178 4 हेक्टेयर जमीन का दस्तावेज सौंपकर मालिकाना हक वापस दिया गया। ऐसा देश में पहली बार हुआ। इसी तरह पिछली सरकार ने 12 साल पहले कबीरधाम जिले के 82 गांवों में निजी भूमि की बिक्री और पंजीकरण पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके कारण, आदिवासी अपने ही समुदाय के लोगों को न तो जमीन बेच पा रहे थे और ना ही कोई जमीन खरीद पा रहे थे, जांच के दौरान, यह पता चला कि इस तरह से लगाया गया प्रतिबंध छत्तीसगढ़ भू- राजस्व संहिता, 195 9 की धारा 165 (6) के प्रावधानों के विपरीत था। राज्य की भूपेश बघेल की सरकार ने 20 07 में जारी आदेश को रद्द कर दिया है, अब इस इलाके में आदिवासी अपनी जमीन की खरीद- बिक्री कर सकेंगे।

25 मई 2013 को बस्तर की झीरम घाटी में भारत में किसी राजनीतिक दल पर माओवादियों के अब तक के सबसे बड़े हमले में राज्य के 17 शीर्ष जनप्रतिनिधि, आम नागरिक और 10 पुलिसकर्मी शहीद हो गये थे, इस मामले में एनआईए की जांच में घटना की साजिश का पता नहीं चल पाया था, राज्य की जनता में इस हमले की साजिश को लेकर गहरा दुख और आक्रोश था, इसलिये जन भावना के अनुरुप जनघोषणा पत्र में झीरम घाटी हमला की जांच करने का वादा और थक है किया गया था। जो कहा, सो करेंगे सरकार गठन के दिन ही मुख्यमंत्री ने झीरम घाटी कांड की एसआईटी जांच की घोषणा की और 19 दिसंबर 2018 को एसआईटी गठन का आदेश जारी कर इस दिशा में कार्रवाई शुरु कर दी गई, 2 जनवरी 2019 को इस एसआईटी का गठन भी कर दिया गया। बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक और नक्सल अभियान के पुलिस उप महानिरीक्षक समेत इस एसआईटी में नौ सदस्य शामिल किये गये हैं, एसआईटी ने अपना काम भी शुरु कर दिया है।

जनघोषणा पत्र में पारदर्शी लोकतांत्रिक एवं संवादात्मक शासन के लिये कृदम उठाने का वादा किया गया था, इसके अलावा भ्रष्टाचारियों के खिलाफकार्रवाई का भी वादा किया गया था। 

जोकहा, सो किया 

सरकार ने भ्रष्टाचार संबंधी विभिन्न मामलों में जांच कार्रवाई के लिये अलग-अलग एसआईटी का गठन किया है, जिससे भ्रष्टाचार मुक्त छत्तीसगढ़ के निर्माण का रास्ता प्रशस्त हो और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सके। इस दिशा में राज्य सरकार ने अंतागढ़ टेप कांड के संबंध में 23 जनवरी 2019 को एक एसआईटी गठित की है। साथ ही छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित नागरिक आपूर्ति निगम घोटाले की जांच के लिये भी एक एसआईटी का गठन किया गया है।

छोटे भूखंडों की खरीद बिक्री पर प्रतिबंध को निरस्त करना

पिछली सरकार ने 2014 में जमीन के छोटे और मध्यम भूखंडों की खरीद और बिक्रीपर प्रतिबंध लगा दिया था, सरकार के इस निर्णय से राज्य के लाखों गरीब और कमजोर लोगों को कई तरह के संकट का सामना करना पड़ रहा था, जनघोषणा पत्र में प्रतिबंध संबंधी इस फैसले को निरस्त करने का वादा किया गया था। 

जो कहा, सो किया

नई सरकार ने 29 दिसम्बर 2019 को एक आदेश जारी कर छोटे भूखंड की खरीद बिक्री पर लगे प्रतिबंध को निरस्त कर दिया। सरकार के इस फैसले के बाद 5 डिसमिल के तहत भूखंडों की खरीद- बिक्री, हस्तांतरण और पंजीकरण को फिर से शुरू किया गया है, छोटे भूखंडों का पंजीकरण 1 जनवरी 2019 से शुरू कर दिया गया है, पहले ही दिन 10 5 भूखंडों का पंजीकरण किया गया और एक महीने के भीतर 6 ,612 पंजीकरण किये गये।

छत्तीसगढ़ के लाखों आम लोगों को सुनहरा सपना दिखा कर चिटफंड कंपनियां कई हजार करोड़ की रकम ले कर भाग गईं, जनघोषणा पत्र में चिंटफंड कंपनी में निवेश करने वाले निवेशकों का पैसा वापस करने और ऐसी कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई का वादा किया गया था। 

जो कहा, सो करेंगे 

नई सरकार ने आरंभिक तौर पर पाया कि निवेशकों के अलावा इस मामले में राज्य के हजारों ऐसे युवा भी इस दुष्चक्र में फंसे हुये हैं, जो चिटफंड कंपनियों की साजिश से अनजान हो कर एजेंट के बतौर काम कर रहे थे। चिटफंड कंपनियां तो धोखाधड़ी कर के भाग गईं लेकिन स्थानीय एजेंट इस मामले में लगातार प्रताड़ना के शिकार होते रहे , यही कारण है कि सरकार ने इन कंपनियों में एजेंट के रूप में काम करने वाले युवाओं के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने का फैसला किया है।

इसके अलावा निवेशकों द्वारा जमा पैसा वसूल करने व मुख्य ऑपरेटरों एवं धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की शुरुआत भी की गई है, लिमिटेड निवेश करने वाले लोगों को राहत दिलाने के लिए राज्य सरकार ने लोढ़ा कमेटी की सिफारिश के आधार पर सभी 168 जनपद पंचायतों में निःशुल्क सहायता केन्द्र स्थापित करने का निर्णय लिया है, जहा 1 मार्च 2019 से नि:शुल्क ऑनलाइन आवेदन पत्र भराए जाएंगे।

पिछली सरकार में शराब को लगातार बढ़ावा दिया गया और शराब की बिक्री सेहोने वाले राजस्व के लिये जन आकांक्षाओं की अनदेखी की गई, जनघोषणा पत्र में राज्य पूर्ण शराबबंदी का वादा किया गया था, इसके अलावा बस्तर व सरगुजा जैसे अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा को शराबबंदी का अधिकार सौंपने की बात कही गई थी। 

जो कहा, सो करेंगे

शराबबंदी को लेकर पिछली सरकार द्वारा गठित दल की रिपोर्ट में शराब की बिक्री बढ़ाने की सिफारिश की गई थी, इस रिपोर्ट में, बिक्री के आउटलेट को बढ़ाने और विदेशी शराब और बीयर की खपत को बढ़ाने की सिफारिश भी की गई है, जो सार्वजनिक भावनाओं के खिलाफहै, नई सरकार ने 1 जनवरी 2019 को आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में पिछली सरकार की रिपोर्ट को खारिज करने तथा योजनाबद्ध तरीके से शराबबंदी के लिए दो समितियों के गठन की घोषणा की है, इनमें से एक सर्वदलीय राजनीतिक समिति होगी और दूसरी समिति समाज के विभिन्न वर्गों से होगी, समिति का चयन कर लिया गया है और जल्दी ही इसकी घोषणा की जायेगी , मुख्यमंत्री जी ने स्पष्ट किया है कि राज्य में शराबबंदी को लेकर सरकार प्रतिबद्ध है लेकिन नोटबंदी की तरह, बिना किसी दूरगामी सोच और रणनीति के ऐसा कोई भी कदम नहीं उठाया जायेगा। पिछली सरकार में लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहे जाने वाले पत्रकारिता की स्थिति किसी से छुपी हुई नहीं थी, लोकतंत्र का गला घोंटा गया, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता छीन ली गई, पत्रकारों के खिलाफ बड़े पैमाने पर दमनकारी कार्रवाई की गईं, उन्हें झूठे मामलों में फंसाया गया, अभिव्यक्ति की आजादी कायम रहे, इसलिये जनघोषणा पत्र में पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने की घोषणा की गई थी।

जोकहा, सो किया

पत्रकार सुरक्षा कानून के लिये राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के है एक सेवानिवृत्त जज की की अध्यक्षता में समिति गठित करने की पहल की है, जो कानूनी मसौदे को अंतिम रुप देगी और जज देश में पहली बार पत्रकार सुरक्षा कानून लागू किया जायेगा।

फर्जी मामलों में जेलों में लोगों के परीक्षण के लिए कमेटी

छत्तीसगढ़ में खास कर माओवाद प्रभावित इलाकों में किसानों और आदिवासियों पर फर्जी मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेजने के मामले सामने आते रहे हैं, बिना सुनवाई के ऐसे सैकड़ों लोग लंबे समय तक जेलों में पड़े हुये हैं, बरसों से फर्जी मुकदमों की प्रताड़ना के शिकार लोगों को न्याय दिलाने के उद्देश्य से जनघोषणा पत्र में ऐसे मामलों का की जांच के लिये कमेटी बनाने का वादा किया गया था। 

जो कहा, सो करेंगे

भूपेश बघेल की सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाने की घोषणा की है, कमेटी राज्य भर में इस तरह के फर्जी मामलों में जेल में बंद किसानों और आदिवासियों के से जुड़े मामलों का परीक्षण करेगी और कानून सम्मत तरीके से मामलों का हल निकालेगी , इस कमेटी के लिये सेवानिवृत्त जज की आरंभिक सहमति भी मिल चुकी है।

तेंदृपत्ता की दर में 60 प्रतिशत की बढोतरी

छत्तीसगढ़ के वन बहुल इलाकों में रहने वाली एक बड़ी आबादी की आजीविका का स्रोत तेंदूपत्ता है तेंदूपत्ता संग्रहण में लगभग 14 लाख परिवारों को रोजगार मिलता है, पिछली सरकार तेंदूपत्ता संग्राहकों को पारिश्रमिक के रूप में 2500 रुपये प्रति बोरी प्रदान कर रही थी, जनघोषणा पत्र में तेंदूपत्ता की दर में बढ़ोत्तरी का वादा किया गया था। 

जो कहा, सो किया

भूपेश बघेल की सरकार ने तेंदूपत्ता संग्राहकों का पारिश्रमिक 2500 रुपये प्रति बोरी से बढ़ा कर 4000 रुपये प्रति बोरी कर दिया है 60 प्रतिशत की इस ऐतिहासिक बढ़ोत्तरी के आदेश जारी कर दिये गये हैं, जिसका लाभ 14 लाख परिवारों को मिलेगा।

स्कूल और कॉलेज में शिक्षकों की भर्ती

छत्तीसगढ़ में स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा अपनी बदहाली के दौर से गुजर रही है, स्कूलों में शिक्षकों का बरसों से बना हुआ है, इसी तरह कॉलेजों में शिक्षकों के अधिकांश पद खाली हैं, आंकड़े बताते हैं कि कॉलेजों में शिक्षकों के 4000 स्वीकृत पदों में से 26 पद ही भरे हैं तथा 1345 पद (40 प्रतिशत) खाली हैं, जनघोषणा पत्र में इन सभी पदों पर भर्ती का वादा किया गया था। 

जो कहा, सो करेंगे

राज्य सरकार ने स्कूलों में शिक्षकों के 15 हजार पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरु करने के निर्देश जारी किये हैं, इसके अलावा राज्य सरकार ने लोक सेवा आयोग के माध्यम से 13 4 5 रिक्त पदों के साथ खेल अधिकारी के 61 रिक्त पदों की भर्ती के लिये अधिसूचना जारी कर दी गई है और रिक्तियों को विज्ञापित किया गया है, इसके अलावा सेवा शर्तों के अनुमोदन की प्रक्रिया भी विभाग द्वारा शुरू कर दी गयी है।

पिछले 15 वर्षों में वन क्षेत्रों में रहने वाली आबादी का बड़ा हिस्सा वन अधिकार कानून के अधिकार से वंचित है, 30 जून, तक वन अधिकारों के व्यक्तिगत दावों के लिए प्राप्त कुल 8,57,260 आवेदनों में से 4,00,117 दावों को मंजूरी दी गई, यानी कुल आवेदनों के 46 .67 प्रतिशत मामलों को ही अनुमोदित किया गया और 53 .33 प्रतिशत को अस्वीकार कर दिया गया, जनघोषणा पत्र में वन अधिकार कानून को पूरी प्रतिबद्धता से लागू करने का वादा किया गया था।

जो कहा, सो किया

मुख्यमंत्री द्वारा वन अधिकार अधिनियम के कार्यान्वयन की समीक्षा 27 दिसंबर 2018 को की गई | सभी पात्र आवेदक की वन अधिकार प्राप्ति को सुनिश्चित करने के लिये 28 दिसंबर 2018 को मुख्य सचिव और जनजातीय व अनुसूचित जाति विभाग द्वारा डीओ पत्र के माध्यम से सभी संबंधित जिला कलेक्टरों को विस्तृत निर्देश दिए गए हैं।

इस निर्देश में सामुदायिक वन अधिकार की संख्या को बढ़ाने के लिए कहा गया है, जिसमें सामुदायिक वन संसाधनों का अधिकार और लाभार्थियों को वितरित भूमि के भूमि रिकॉर्ड में प्रवेश भी शामिल है, लाभार्थियों के जीवन यापन का स्तर

सुधारने के मकसद से सरकार वन भूमि पर कृषि हेतु उर्वरक , बीज , कृषि उपकरण का वितरण , समतलीकरण और सिंचाई सुविधायें प्रदान करेगी।

कई स्तरों पर हुई बैठकों के बाद यह फैसला लिया गया है कि रद्द किए गए आवेदनों की जांच की जानी चाहिए और 13 दिसंबरए 20 0 5 से पहले रहने वाले आवेदकों को वन अधिकार पत्र देने के संबंध में आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए। राज्य सरकार ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में भी अपना पक्ष रखने के लिए वकील खड़ा करने का फैसला किया है। जरुरत पड़ने पर पुनर्विचार याचिका भी दायर की जाएगी।

संविदा नहीं नियमित भर्ती

राज्य में ऐसे हजारों पद हैं, जिन पर सेवानिवृत्त लोगों को नियुक्त किया गया है, सरकार की इस प्रक्रिया के कारण एक तरफ जहां युवा वर्ग रोजगार से वंचित है, वहीं दूसरी ओर संविदा पर ण्‌ का त्पूकतत आय कार्यरत लोगों के कारण कई अवसरों पर अनियमितता ओर भ्रष्टाचार के मामले भी सामने आये हैं जनघोषणा पत्र में इस तरह के पदों पर नियमित भर्ती का वादा किया गया था। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कार्यभार संभालते ही सेवानिवृत्ति के बाद भी बरसों बरस से संविदा के आधार पर सेवारत लोगों के कामकाज की समीक्षा की और फिर जन आकांक्षा के अनुरुप ऐसे सभी पदों पर संविदा के आधार पर कार्यरत लोगों को हटाने के निर्देश जारी किये, अब इन सभी विभागों में नियमानुसार नियमित कर्मी की भर्ती की प्रक्रिया शुरु की जा रही है।

छत्तीसगढ़ में खनिज पदार्थों का उत्खनन करने वाली कंपनियों से जनसुविधा के लिये जो धन राशि 2015 में गठित जिला खनिज निधि फाउंडेशन के मद में प्राप्त होता रहा है, उसमें भारी गड़बड़ियों की शिकायत मिलती रही है, जनघोषणा पत्र में जिला खनिज निधि फाउंडेशन के मद से होने वाले कार्यों की समीक्षा का वादा किया गया था।

छत्तीसगढ़ में नवंबर 2018 तक 30 खनन करने वाली कंपनियों से कुल 3,336 करोड़ रुपये का ही अंशदान प्राप्त हुआ था, जिसमें से 2400 करोड़ रुपये विकास कार्यों पर खर्च किए गए हैं, लेकिन अधिकांश जिलों में इस खर्चे पर कई सवाल थे और नई सरकार को इस संबंध में कई गंभीर शिकायतें भी प्राप्त हुई थी।

ऐसे में राज्य की भूपेश बघेल की सरकार ने समीक्षा के बाद इस फाउंडेशन को भंग कर दिया, ताकि कोष का लाभ प्रभावित क्षेत्रों और लोगों को मिल सके, इस मद से होने वाले निर्माण कार्य भी तत्काल प्रभाव से रोकने और उनकी समीक्षा के भी आदेश दिए गये हैं।

जनघोषणा पत्र में यह वादा किया गया था कि दिव्यांगों के जन-प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के लिए इस वर्ग से निर्वाचित न हो पाने पर एक महिला व एक पुरूष दिव्यांग को पंचायतों व नगरीय निकायों में मनोनित किया जाएगा।

जो कहा, सो किया

मंत्रिपरिषद ने यह निर्णय लिया है कि नगरीय निकाय चुनाव और त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव में यदि कोई निःशक्तजन चुनाव जीतकर नहीं आता है, तो सरकार अपनी तरफ से उन्हें नामांकित करेगी, इसमें 50 फीसदी महिलाएं होंगी।

रेत का कारोबार सी.एम.डी.सी. करेगी

रेत के अवैध खनन तथा अवैध कारोबार को लेकर अनेक शिकायतें मिल रही थी। इसके कारण पंचायतों को भी राजस्व का नुकसान हो रहा था। नई सरकार ने यह निर्णय लिया है कि अब रेत का खनन छत्तीसगढ़ मिनरल डेव्हलपमेंट कॉर्पोरेशन द्वारा किया जाएगा। इस तरह एक ओर जहाँ रेत के अवैध खनन तथा व्यापार पर रोक लगेगी, वहीं दूसरी ओर पंचायतों को राज्य शासन द्वारा 25 प्रतिशत अधिक अनुदान दिया जाएगा। इस प्रक्रिया से आम जनता को भी कम कीमत पर रेत मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा।


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