चश्मा अपनी नाक पे रखो तुम, मेरी तो ऊँगलियाँ लिखती पढ़ती हैं : सक्षम के ब्रेल लाइब्रेरी मं धारा प्रवाह पाठ पढ़थे माहेश्वरी





दंतेवाड़ा, 3 मार्च, 2017। सक्षम-२ के ब्रेल लाइब्रेरी मं गुलजार के लिखे एक लकीर लिखे गए हे। चश्मा अपनी नाक पे रखो तुम, मेरी तो ऊँगलियाँ लिखती पढ़ती हैं। ए पंक्ति के मरम तब समझ म आथे जब आप मन दृष्टिबाधित बालिका माहेश्वरी ल ब्रेल मं धारा प्रवाह पढ़ाई करत सुनहू। सामान्य लइका मन ल हम अक्षर के समझ बनाए बर उनला वर्णमाला दिखाथन। जेमा अ से अनार अऊ आ से आम वो लइका चिन्‍हथे फेर धीरे से ओखर पाठ पढ़त जाथे। जन्म ले दृष्टिबाधित लइका जेकर समझ अनार अऊ आम ल लेके केवल स्वाद के हे वो ए ककहरा ल कइसे समझही। एकर बिना जउन ह स्वाभाविक रूप ले बचपन ले ही धाराप्रवाह पढ़े के क्षमता पा लय वो बच्ची सित्‍तो म मेधावी ही कहे जाही।


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