मुख्यमंत्री ह पहाड़ी कोरवा मन ल अंधियारी के गुलामी ले आजादी देवाईस






कोरबा 29 अप्रेल 2017। जिला मुख्यालय कोरबा शहर ले अंदाजन 90 किलोमीटर दूरिहा बीहड लामपहाड़ जइसन बिकट अउ तीर-तखार के इलाका म एक बछर पहिली तक अंधियार बगरे रहय। आजादी के 70 साल बाद घलोक इहां हालात अइसन रहिस कि इहां रहइया जम्‍मो कुटुंब ह अंधियारी के गुलामी म बसर कररत रहिन। पहाड़ अउ जंगल ले घिरे होए के कान इहां पहुंचे के रद्दा आज ले दुर्गम हावय। इही कारन हावय कि संझा होतेच गांव ह जंगल म गंवा जथे। पहाड़ी कोरवा कुटुंब अपन अपन घरेच म दुबक जाथें। तीर-तार जंगली जानवर मन के खतरा मंडराथे फेर वो मल ल ओही घनघोर अंधियारी म पूरा रात घर के भीतर गुजारे के मजबूरी रहिस। इमन लसाल भर मौसम के अनुसार दुःख सहना परथे। बरसा के समें म म आंधी तूफान अउ जहरीला जीव-जन्तु मन ले खतरा मोल लेवत, जाड़ के दिन म पूरा रात घर के बाहिर लकड़ी सुलगा के अंजोर करई अउ गर्मी के दिन म चाहके घलव घर ले बाहिर कोनो सो नइ सकंय। लामपहाड़ के ए इलाका म रहइया माटीमाड़ा के मनखे मानों एक अलग दुनिया म जीयत रहिन। कोनो उंखर समस्या मन के सुध नइ लेवत रहिन। एक दिन इंखर दूरिहा अउ बीहड़ इलाका म प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह अचानक उडनखटोला ले उतरिन। लोकसुराज अभियान के तहत बीते साल तपत मंझनिया म अमली के छांव म अपन चौपाल लगाईन अउ गांव वाले मन ले योजना मन के क्रियान्वयन उपर चर्चा करिन ओखर बाद उंखर समस्या मन के बारे म मुख्‍यमंत्री ह जानिस। अधिकांश मनखे के मुह ले बिजली नइ होए के जानकारी सुनके मुख्यमंत्री ल पहिली तो अचरज होइस कि उर्जाधानी कोरबा जिला के तीर के गांव होए के बाद घलवम इहां अब तक बिजली कइसे नइ पहुंच पाये ये। उमन तुरते सबके सामने घोषणा करिन कि एक साल के भीतर इहां न सिरिफ बिजली पहुचाए जाही भलुक कुछ पारा मुहल्ला तक जिहां बिजली पहुचाए म कुछ दिककत हावय उहां सौर उर्जा ले गांव ल रौशन करे जाही। मुख्यमंत्री के चौपाल के कुछ महिना के भीतरेच लामपहाड़ ल विद्युतीकृत करे के उदीम शुरू हो गीस। लामपहाड़ के उरांवपारा अउ कोरवा पारा ल जिहां सौर उर्जा के संग बिजली ले जोड़के अंजोर फइलाए गीस उन्‍हें अति दुर्गम कोरवा बस्ती माटीमाड़ा ल सौर उर्जा ले रौशन बनाए गीस। लोक सुराज अभियान के माध्यम ले मुख्यमंत्री के इहां पहुचे ले अंधियारी के गुलामी म जीवनयापन करत पहाड़ी कोरवा मन ल न सिरिफ अंधियारी ले आजादी मिलीस संगें-संग इहां रहइया लइका मन के नवा भविष्य के शुरूआत घलोक होए लगीस। अब न तो घर के बाहिर आगी जलाके रखे ल परय अउ नइ ही चिमनी जलाए ल परय। संझा होतेच रोज अंधियारी म गंवा जाने वाला गांव आज दुधिया अंजोर ले नहात दूरिहा ले दिखथे।




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