एनजीटी के भोपाल घोषणा पत्र म डॉ. रमन सिंह के प्रमुख सुझाव मन ल घलोक सामिल करे गीस

रायपुर, 31 जुलाई 2017। राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण ह अपन भोपाल घोषणा पत्र म छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के चार महत्वपूर्ण सुझाव मन ल सामिल करे गए हे। आप मन जानतेच हव कि दू दिन पहिली राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) कोति ले तीन राज्य -छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश अऊ राजस्थान ल मिलाके पर्यावरण उपर केन्द्रित क्षेत्रीय सम्मेलन के आयोजन भोपाल म करे गए रहिस। सम्मेलन म मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान अऊ एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति श्री स्वतंत्र कुमार ह घलोक डॉ. रमन सिंह के ए सुझाव मन ल काफी उपयोगी अऊ महत्वपूर्ण बताए रहिन। सम्मेलन के बाद एनजीटी कोति ले जारी भोपाल घोषणा पत्र म डॉ. सिंह के सुझाव मन ल सामिल करे गए हे। 
डॉ. रमन सिंह ह सम्मेलन म स्वच्छ भारत मिशन के तहत छोटे शहर मन म घुरवा प्रबंधन बर छत्तीसगढ़ के अम्बिकापुर मॉडल ल अपनाए के जरूरत उपर बल दे रहिन। उमन बताइए रहिन कि अम्बिकापुर म महिला मन के स्व-सहायता समूह मन कोति ले घर-घर जाके कसरा उठाए अऊ उंखर रिसाईकिलिंग आदि के काम शुरू करे गए हे। ये एक रोल मॉडल हे। ए प्रोजेक्ट ल देश भर म सराहे गए हे अऊ केन्द्र सरकार कोति ले आयोजित स्वच्छता सर्वेक्षण 2017 म एला दू लाख ले कम आबादी वाले शहर मन के श्रेणी म पहिली स्थान मिले हे। करीबन तीन महीना पहिली 04 मई के दिन नई दिल्ली म केन्द्र सरकार कोति ले अम्बिकापुर नगर निगम ल ए उपलब्धि बर राष्ट्रीय पुरस्कार ले घलोक सम्मानित करे गए रहिस।  
डॉ. सिंह ह दूसर महत्वपूर्ण सुझाव दे रहिन कि कोयला आधारित ताप बिजली घर मन ले निकलइया राख (फ्लाई ऐश) के उपयोग खदान मन के गड्ढ़ा मन ल भरे अऊ ईटा बनाए बर करे जाए। संगेच एक फ्लाई ऐश उपयोगिता निधि के घलोक स्थापना करे जानी चाही। उमन एखर अलावा ये घलोक सुझाव दे रहिन कि साल के वृक्ष मन म हर एक बीस साल म होवइया साल बोरर के नाम ले तनाछेदक कीरा मन के हमला ल रोके बर अनुसंधान ल बढ़ावा दे जाय। डॉ. सिंह के कहना रहिस कि साल बोरर के कारन ले हर बीस साल म करीबन 18 लाख वृक्ष मन ल नुकसान पहुंचथे।  
डॉ. रमन सिंह ह क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण बर केन्द्र सरकार के कैम्पा निधि के राशि के उपयोग बर राज्य मन ल जादा स्वतंत्रता देहे अऊ विकास परियोजना मन बर फारेस्ट क्लीयरेंस के अधिकार मन के विकेन्द्रीकरण करत राज्य मन ल अधिकार देहे के घलोक सुझाव एनजीटी के सम्मेलन म दे रहिन। 

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