मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड वितरित करे के बाद खेती किसानी म आए बदलाव के सर्वे होना चाही

मिट्टी स्वास्थ्य प्रबंधन म एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित

रायपुर, 26 जुलाई 2017। कृषि मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ह कहे हें कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के साल 2022 तक किसान मन के आमदनी दुगुना करे के योजना के तहत सबो किसान मन ल उंखर खेती के जमीन मन के स्वास्थ्य कार्ड देहे के मामला म छत्तीसगढ़ देश म पहिली स्थान म हे। मिट्टी स्वास्थ्य पत्रक वितरण योजना के पहिली चरण म छत्तीसगढ़ म 43 लाख कार्ड वितरित करे गईस, जबकि ए चरण म 37 लाख कार्ड बांटे के लक्ष्य रखे गए रहिस। श्री अग्रवाल आज इहां नवीन थिरावन गृह के सभा कक्ष म ‘मिट्टी स्वास्थ्य प्रबंधन’ म आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला ल सम्बोधित करत रहिन। 
कार्यशाला के आयोजन केन्द्र सरकार के कृषि, सहकारिता अऊ कृषक कल्याण मंत्रालय अउ राज्य सरकार के कृषि विभाग ह संयुक्त रूप ले करे रहिन। कार्यशाला म मध्यप्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र अऊ छत्तीसगढ़ के मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड बनाए म लगे अधिकारी-कर्मचारी सामिल होइन। कृषि मंत्री श्री अग्रवाल ह कहिन कि मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड वितरण योजना किसान मन अऊ ऊंखर परिवार के भविष्य अऊ जीवन ले जुड़े योजना हे। ए काम म लगे अधिकारी मन - कर्मचारि मन ल विशेष रूप ले ध्यान रखके, सही-सही कार्ड किसान मन ल देहे के जरूरत हे। श्री अग्रवाल ह कहिन कि मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड देहे के बाद खेती-किसानी म आए सकारात्मक बदलाव अऊ अच्छा परिणाम मन के संबंध म विस्तृत रिपोट तैयार करे जाना चाही। 
श्री अग्रवाल ह कहिन कि बदलत दौर के संग खेती-किसानी के तौर-तरीका म घलोक परिर्वतन आए हे। अब किसान परम्परागत रूप ले धान के खेती करे के बलदा फल-फूल अऊ सब्जी मन के खेती करे म घलोक आगू आवत हें। किसान मन ल मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड देहे के कार्य-योजना म हमर अइसन तैयारी होना चाही कि किसान जब अपन खेती के जमीन के परीक्षण कराना चाहय, तुरते परीक्षण करे जा सके। सिंचाई सुविधा बढ़े के संगेच बड़ संख्या म किसान साल भर म दो-तीन फसल लेहे के स्थिति म आ गए हे। अइसन म हर फसल के पहिली मिट्टी के जांच होवय अऊ मिट्टी के गुणवत्ता के बारे म किसान मन ल जानकारी मिल सकय, ताकि ओ मन मिट्टी के सही उपचार करा के अच्छा पैदावार लेहे म सफल हो सकंय।
श्री अग्रवाल ह कहिन कि खेती-किसानी के क्षेत्र म नवा शोध अऊ आविष्कार के जानकारी किसान मन तक सरल भाखा म पहुंचाना चाही। तकनीकी भाखा के उपयोग करे ले आविष्कार के कोनो फायदा नइ होही। उमन कहिन कि मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड वितरित करे के बाद हमला एखर परिणाम जाने व्यापक सर्वें करके रिपोट बनानी चाही। एखर लिए पहिली कोनो एक गांव ल मॉडल के रूप म तैयार करव। ओ गांव के खेती के जमीन के बारे म पूरा जानकारी रिपोट म समाहित करे जाय। एखर से ओ गांव के किसान मन ल खेती करे म सहूलियत होही। श्री अग्रवाल ह कहिन कि एखर बाद विकासखण्ड, तहसील, जिला अऊ आखरी म राज्य के रिपोट बनाए जाय। उमन कहिन कि नवा आविष्कार मन के असर जब तक नइ दिखही, तब तक किसान मन ल पूरा प्रभावित करना संभव नइ हे। मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड देहे के बाद ओखर फायदा घलोक किसान मन ल मिलना चाही। 
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस.के. पाटील ह कहिन कि मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड वितरण के पहिली चरण म छत्तीसगढ़ ल शत-प्रतिशत उपलब्धि मिले हे। अब हमला ए काम ल सरलग करे बर तैयारी करे के जरूरत हे। उमन बताइन कि मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड बनाए के काम लगातार चलही, एखर बर डाटा घलोक आनलाईन हो गए हे। पहिली चरण म कार्ड वितरित करे के बाद मिट्टी ले संबंधित जऊन आंकड़ा आए हे, ओखर विश्लेषण करके खेती किसानी बर खातू के उपयोग अउ आपूर्ति के निर्धारण जिला स्तर म करे जा सकत हे। ए दिशा म काम करे के जरूरत हे। विश्लेषण के बाद ये पता चलही कि कऊन जिला म कोन से खाद के आपूर्ति जरूरी हे। किसान मन ल कार्ड देहे के बाद ऊंखर उपयोग अऊ फायदा के घलोक अध्ययन करे जाना चाही। रायपुर अऊ गरियाबंद जिला के आंकड़ा के प्रारंभिक विश्लेषण करे गए हे। एखर विश्लेषण के आधार म कहे जा सकत हे कि अभी हाल म ए दुनों जिला मन म नाइट्रोजन, बोरान, फास्फोरस अऊ आयरन तत्व म आधारित खाद के जादा आपूर्ति होवत हे, जबकि ए जिला मन म पोटाश, सल्फर अऊ जिंक के आपूर्ति जादा होना चाही। संचालक कृषि श्री एम.एस. केरकेट्टा ह कार्यशाला आयोजित करे के उद्देश्य उपर विस्तार ले अपन बात रखिन। 

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