पेड़ लगाना अऊ उंखर देखभाल करना यज्ञ के समान: डॉ. रमन सिंह

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री सामिल होइन एनजीटी के क्षेत्रीय सम्मेलन म
नदिया मन अऊ तालाब मन ल प्रदूषण ले बचाय के जरूरत म घलोक दीन जोर

रायपुर, 29 जुलाई 2017। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह ह पर्यावरण संरक्षण म समाज के सबो वर्ग ल भागीदारी करे आव्हान करे हें। उमन कहे हें कि पेड़ लगाना अऊ उंखर बने देखरेख करना एक यज्ञ के समान हे। 
डॉ. सिंह आज मध्यप्रदेश के राजधानी भोपाल म राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) कोति ले आयोजित दू दिवसीय क्षेत्रीय सम्मेलन के शुभारंभ सत्र ल सम्बोधित करत कहिन। पर्यावरण उपर केन्द्रित सम्मेलन के आयोजन नरोन्हा प्रशासन अकादमी के सभागृह म करिस। डॉ. रमन सिंह ह शुभारंभ सत्र म कहिन -देश म वन के सुरक्षा बर अइसन कानून के जरूरत हे, जेखर जरिए वन क्षेत्र मन के विकास बर होवत काम मन ल अऊ जादा लाभदायक बनाय जा सकय। उमन कहिन कि पर्यावरण बचाय बर हमन दूसर ले तो उम्मीद करथन कि ओ मन नियम मन के पालन करंय, फेर हम गंभीरता ले पर्यावरण नियम मन के पालन नइ करन, हमला येकर पालन करना होही। उमन कहिन कि गंगा म डुबकी लगाके हम खुद ल पवित्र समझे लगथन, फेर ए बात म ध्यान नइ देवन कि गंगा जइसे पवित्र नदिया मन के पानी कतका प्रदूषित होत जात हे। हमला नदिया मन, तालाब मन अऊ आन जल स्त्रोत मन ल प्रदूषण ले बचाय के बारे म घलोक सोचना होही अऊ सार्थक प्रयास करे ल होही। 

कार्यक्रम म एनजीटी के मध्य क्षेत्रीय बेंच के स्मारिका के घलोक विमोचन करिस। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार, एनजीटी मध्य क्षेत्र न्यायपीठ के न्यायाधिपति श्री दिलीप कुमार संग मध्यप्रदेश, राजस्थान अऊ छत्तीसगढ़ उच्‍च न्यायालय मन के कई न्यायाधीश अउ बहुत अकन प्रसिद्ध पर्यावरण विशेषज्ञ घलोक संगोष्ठी के शुभारंभ सत्र म सामिल होइन। ए अवसर म अकादमी परिसर म वृक्षारोपण घलोक करिस।
डॉ. रमन सिंह ह शुभारंभ सत्र ल सम्बोधित करत कहिन कि छत्तीसगढ़ म आज कहूं करीबन 44 प्रतिशत वन क्षेत्र हे, त एकर सबले बड़े श्रेय उहां के वनवासी मन ल देहे जाना चाही। उमन कहिन कि छत्तीसगढ़ म वनवासीच मन वन के रक्षा करत हें। हरे-भरे वन हमार लाखों वनवासी परिवार के जीवन यापन के प्रमुख आधार हे। संयुक्त वन प्रबंधन योजना के तहत राज्य सरकार ह वनक्षेत्र मन म रहइया गांव वाले मन के भागीदारी ले सात हजार 887 वन प्रबंधन समिति मन के गठन करे गए हे। प्रदेश के करीबन बीस हजार गांव ले करीबन ग्यारह हजार गांव वनक्षेत्र के सीमा ले पांच किलोमीटर भीतर स्थित हे। वन प्रबंधन समिति मन ल ए गांव मन अऊ ऊंखर आस-पास के क्षेत्र मन म जंगल के सुरक्षा अऊ वन संवर्धन के दायित्व सौंपे गए हे। 
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के बारे म बतावत डॉ. रमन सिंह ह कहिन कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सर्वोच्च प्राथमिकता के ए योजना म देश के पांच करोड़ गरीब परिवार के महिला मन ल लकड़ी अऊ कोयला आधारित चुलहा के धुंगिया ले बचाय बर सरकारी अनुदान म रसोई गैस कनेक्शन देहे जात हे। डॉ. सिंह ह कहिन प्रधानमंत्री के ए योजना ले देश म हर साल करीबन बीस करोड़ पेंड मन ल कटे ले बचाए जा सकही। डॉ. सिंह ह वनहल्दी, मूसली आदि औषधीय महत्व के पौधा अऊ कई ठन मूल्यवान वृक्ष के विलुप्त होवत प्रजाति मन के संरक्षण अऊ संवर्धन बर टिश्यू कल्चर तकनीक के उपयोग म विशेष रूप ले बल देहे के बात कहिन। उमन कहिन - छत्तीसगढ़ म ए दिशा म गंभीरता ले प्रयास करे जात हे। कानून म कुछ अइसन बदलाव करे जाना चाही, जेखर ले जादा वन क्षेत्र वाले राज्य मन के हित म कोनो प्रकार के प्रतिकूल असर झन परय। उमन ये घलोक कहिन कि छत्तीसगढ़ म वनक्षेत्र के अन्तर्गत 100 करोड़ के कोनो प्रोजेक्ट बर कैम्पा निधि म 150 करोड़ रूपिया जमा करे ल परत हे। एकर एक ये लाभ हे कि पर्यावरण ल नुकसान पहुंचाए के प्रवृत्ति ल हतोत्साहित करे जा सकय। 
डॉ. रमन सिंह ह देश म पर्यावरण संरक्षण बर राष्ट्रीय हरित न्यायधिकरण (एनजीटी) कोति ले करे जात उदीम मन के तारीफ करत कहिन कि एनजीटी ह पर्यावरण ल बचाय अऊ साफ-सुथरा रखे बर कई महत्वपूर्ण निर्णय लेहे हे, जेखर राष्ट्रीय स्तर म सकारात्मक असर देखे जात हे। डॉ. सिंह ह कहिन कि बिजली उत्पादन बर कोयला आधारित ताप बिजली उत्पादन के तुलना म सौर ऊर्जा, जल विद्युत अऊ पवन ऊर्जा के आधुनिक तकनीक मन के उपयोग पर्यावरण के दृष्टि ले जादा लाभदायक हो सकत हे। उमन कहिन कि एखर ले कार्बन उत्सर्जन नइ होही। एखर फलस्वरूप पर्यावरण प्रदूषण ल काफी हद तक रोके जा सकही। डॉ. रमन सिंह ह पर्यावरण ले जुड़े चुनौती मन के प्रति समाज के मानसिकता म बदलाव के जरूरत म घलोक बल दीन। उमन कहिन कि साल के वृक्ष म हर एक बीस साल के चक्र म लगइया कीरा (साल बोरर) करीबन 18 लाख साल के वृक्ष मन ल नुकसान पहुंचाथे। ये पर्यावरण के सामने एक बड़का चुनौती हे। एकर मुकाबला करे बर घलोक अनुसंधान होना चाही। शुभारंभ सत्र म मध्यप्रदेश के पर्यावरण मंत्री श्री अंतरसिंह आर्य, केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष श्री एस.पी.एस.परिहार, मध्यप्रदेश सरकार के मुख्य सचिव श्री बी.पी. सिंह अउ राजस्थान नदी घाटी प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री राम वेदरी घलोक उपस्थित रहिन। 

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