राजिम कुंभ शास्त्रीय है- जगतगुरु रामभद्राचार्य

रायपुर, 11.02.2018। जगतगुरु पद्मविभूषण रामभद्राचर्या जी महाराज ह काल राजिम कुंभ के मुख्य मंच ले उपस्थित हज़ारों श्रद्धालु मन ल राजिम कुंभ के महिमा ले अवगत कराइन। उमन कहिन कि राजिम कुंभ शास्त्रीय हे। एला लेके कोनो भरम नइ होना चाही। महाराज श्री ह बताइस कि धर्मग्रंथ मन के डेढ़ लाख ले जादा श्लोक ओ मन ल कंठस्थ हे। ए खातिर उमन दावा से कहिन कि माता कौशल्या के जन्मस्थली चंदखुरी ले लेके प्रभु राम के वनगमन तक के ए क्षेत्र ले जुड़े कथा श्लोक मन के रूप म प्रमाणित हे।
उमन कहिन कि शास्त्र मन म 5वां कुंभ के घलोक उल्लेख हे। धर्मग्रंथ मन म ए क्षेत्र के बखान करे गए हे। अब तक ए क्षेत्र के महिमा दुनिया ले लुकाय रहिस हे फेर अब सब एखर प्रताप ल जाने लगे हें।
महाराज श्री ह कहिन कि भगवान राजीव लोचन के नगरी राजिम ऐतिहासिक नगरी हे। राजीव लोचन, प्रभु राम के ही नाम हे। वनगमन के बेरा असुर मन ल देखके इहें उंखर आंखी लाल हो गए रहिस। एखर सेती राजीव लोचन नाम दे गीस।



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विरोध कुछ मनखे मन के डीएनए म
रामभद्राचार्य जी महाराज ह कहिन कि घरम-करम के अच्छा काम मन ल घलोक कुछ मनखे मन के विरोध झेलना परथे। ये अइसन मनखे हें जिंनर डीएनए म ही विरोध हे। अइसन मनखे धर्म के विरोध, हिंदुत्व के विरोध, राष्ट्र के विरोध तक करथें। फेर इंकर परवाह करे बिना सदकर्म करत रहन चाही।
अयोध्या के रामलला मंदिर के देवंय शास्त्रार्थ प्रमाण
रामभद्राचार्य जी महाराज ह कहिन कि ओ मन वशिष्ठ कुल के हें। ऊंखर पूर्वज राजा दशरथ के शासनकाल के राजगुरु रहिन। ओ कुल के हमन नमक खाए हवन। अइसन म रामलला के जन्मभूमि ल लेके होए विवाद के समाधान करना हमर कर्तव्य हे। एखर सेती न्यायालय म शास्त्रगत प्रमाण मैं ह दीए हंव। जेमा एक चौथाई प्रमाण ल न्यायालय ह स्वीकार करे हे। आज विवाद जन्मभूमि के नहीं फेर जमीन के हे।
राम के मतलब राष्ट्र के मंगल करइया
महाराज श्री ह कहिन कि राम ही के पद चिन्ह मन म चलके ही राष्ट्र के मंगल हो सकत हे। राम राज के परिकल्पना घलोक इही ये। रा ले राष्ट्र अऊ मं ले मंगल हे। इही देश के समृद्धि के सूत्र हे।
ओम शांति नइ ओम क्रांति के करव पाठ
रामभद्राचर्या जी ह कहिन कि छत्तीसगढ़ के जमीन म असुर रूपी शक्ति मन ह नक्सलवादी बनके गलत करम करत हें। अइसन म हमन ल अब ओम शांति के जप त्यागके ओम क्रांति के पाठ करना चाही। ताकि दुष्‍ट मन ल खतम करे जा सकय।


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