अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर कार्यशाला

जैव विविधता की दृष्टि से भारत सबसे धनी देशों में से एक
देश में पेड़़-पौधों की लगभग 46340 तथा कीट पतंगों की 57525 से भी अधिक प्रजातियां विद्यमान
यकीं करें: इस नीले ग्रह पर अगर मेहनती शहद की मक्खियां ना होती तो इस पर मानव की प्रजाति भी विद्यमान नही रह पाती,  देश की 32 से अधिक अनमोल वनौषधियां  विलुप्त के कगार पर,,  विलुप्त हो चुके कई पेड़ पौधे तथा जीव जन्तु भी।

राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त प्रख्यात लौह शिल्पकार सोनाधर पोयाम को "ककसाड़" ने किया सम्मानित

 अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के सुअवसर पर 22 मई को मां दन्तेश्वरी हर्बल इस्टेट कोण्डागांव में छ.ग. हिन्दी साहित्य परिषद्, संपदा स्वयं सेवी संस्थान एवं जनजातीय चेतना कला संस्कृति और साहित्य की राष्ट्रीय पत्रिका ककसाड़ के संयुक्त तत्वाधान में परिचर्चा एवं सरस काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता वयोवृद्ध समाज सेवी व शिक्षाविद टी.एस. ठाकुर ने की जो अपनी अस्वस्थता के बावजूद जैव विविधता के कार्यक्रम में शामिल हुए विशेष आमंत्रित अतिथि थे अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त प्रर्यावरणविद, तथा राष्ट्रीय पत्रिका "ककसाड" सहित कई पत्रिकाओं के संपादक डां. राजा राम त्रिपाठी ,आमंत्रित अतिथि थे जनजातीय लोक साहित्य के वरिष्ठ साहित्यकार हरिहर वैष्णव मशहूर शायर जनाब हयात रजवी ,संपदा स्वयं सेवी संस्था की सचिव शिप्रा त्रिपाठी, राष्ट्रीय पत्रिका गंभीर समाचार की संपादक मण्डल की सदस्य अपूर्वा त्रिपाठी, राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त लौह शिल्पकार सोनाधर पोयाम केमिकल इंजीनियरींग के शोध छात्र रिषिराज  एवं डोकरा कला के राष्ट्रपति पुरस्कार विजेता शिल्पी राजेन्द्र बघेल,कार्यक्रम का सफल संचालन कवियित्री मधु तिवारी ने किया ।सर्वप्रथम आमंत्रित अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के छाया चित्र पर दीप प्रज्जवलन किया गया। मधु तिवारी ने स्वागत गीत गाकर कार्यक्रम की शुरूआत की।तत्पश्चात कवि एस.पी. विश्वकर्मा ने जल और पर्यावरण पर केन्द्रित कविता सुनाई वरिष्ठ साहित्य कार यशवंत गौतम ने पर्यावरण के प्रति मानव द्वारा किये जा रहे अत्याचार पर दुख व्यक्त कर पर्यावरण को संतुलित करने हेतु सार्थक प्रयास करने की सलाह दी कोषाध्यक्ष बृजेश तिवारी ने जैव विविधता पर प्रकाश डालते हुए सारगर्भित तरीके से इसे समझाया उन्होंने कहा प्रकृति का संतुलन यहां मौजूद सभी जीव जन्तु और वनस्पितियों से है इसे बचाना जरूरी है परिषद् के सचिव उमेश मण्डावी ने पर्यावरण की अवहेलना से भविष्य में जल की स्थिति पेड़-पौधों से संबंधित संस्मरण सुनाये। साहित्य कार जमील अहमद ने जैव विविधता के बारे में अपने विचार रखते हुए कहा कि आज कई दुर्लभ वनस्पतियां विलुप्त हो रही है जो हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है जिसे बचाना हमारा कर्तव्य है तभी हमारा पर्यावरण सुरक्षित रहेगा।
          बस्तर की दुर्लभ जड़ी बूटियांं पर पिछले कई दशकों से शोध कर रहे डॉक्टर त्रिपाठी ने अपने बीज वक्तव्य में कहा कि, जैव विविधता की दृष्टि से भारत सबसे धनी देशों में से एक है, जहॉं की पेड़़-पौधों की लगभग छियालिस हजार से अधिक 46340ज्ञात  प्रजातियां तथा कीट पतंगों की लगभग 57525 से भी अधिक ज्ञात प्रजातियां विद्यमान है। पर बडे दुख का विषय है कि हमारे अंतहीन स्वार्थ अज्ञानता तथा लापरवाही के चलते पादपों और जीवों की कई प्रजातियां पूरी तरह से नष्ट हो गई ।कई बार पढे लिखे लोग भी यह सवाल करते है कि हमें इन अवांक्षित खर-पतवारों तथा क्षुद्र कीडे मकोडों की प्रजातियों को संरक्षित करने और बचाने की भला क्या आवश्यकता है ? आप माने या ना माने मगर यह भी एक वैज्ञानिक तथ्य है कि, यदि हमारे इस नीले ग्रह पर ये बेहद मेहनती शहद की मक्खियां ना होती तो इस ग्रह पर मानव की प्रजाति भी विद्यमान नही होती उल्लेखनीय है कि देश का अपनी तरह का पहला इथनो मेडिको गार्डन अर्थात परम्परागत वन औषधि उद्यान कोण्डागांव के चिखलपुटी में स्थापित किया गया है जहां पर मुख्य रूप से बस्तर तथा कुछ शेष भारत की सैकडो विलुप्त प्राय तथा दुर्लभ वन औषधियों की प्रजाति को उनके प्राकृतिक आवास में ही संरक्षित किया गया है।वरिष्ठ साहित्यकार सुरेन्द्र रावल एवं छ.ग. हिन्दी साहित्य परिषद कोण्डागांव के अध्यक्ष हरेन्द्र यादव ने बाहर प्रवास पर होने के कारण  दूरभाष पर अपने विचार व्यक्त किए।
  जैव विविधता पर  कार्यक्रम के द्वितीय चरण में जैव-विविधता तथा प्रर्यावरण पर केंऊ काव्य गोष्ठी आयोजित की गई जिसमें शायर हयात रजवी, यशवंत गौतम, यशवंत देवांगन, एस.पी. विश्वकर्मा, मधु तिवारी, उमेश मण्डावी ने कविता पाठ किया राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त लौह शिल्पकार सोनाधर पोयाम को श्रीफल व शॉल देकर सम्मानित किया गया। राष्ट्रीय पत्रिका ककसाड के मई अंक का  लोकार्पण भी आंमत्रित अतिथियों के द्वारा किया गया , उल्लेखनीय है कि इस अंक  मे राष्ट्रपति से पुरस्कृत  लौह शिल्पकार सोनाधर पोयाम का मधु तिवारी द्वारा लिया गया साक्षात्कार भी प्रकाशित हुआ है ।
  अंत में  कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शिक्षाविद टी.एस. ठाकुर ने जैव विविधता पर आयोजित इस कार्यक्रम की प्रसंशा की एवं पर्यावरण संतुलन बनाये रखने हेतु सार्थक प्रयास करने की सलाह दी उन्होंने लौह शिल्पकार सोनाधर पोयाम को बधाई दी इस अवसर पर शहर के साहित्य कार एवं बुद्वजीवी वर्ग बड़ी संख्या में उपथित थे।


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