कनक तिवारी का पत्र सतीश वर्मा के नाम

यह पत्र मैंने दिनांक 28.05.2019 को सतीश वर्मा को लिखा था जो उस समय एडिशनल एडवोकेट जनरल थे। मेरी जगह पर एडवोकेट जनरल हो गए हैं। मेरे मन में उनके लिए जितना प्यार इस पत्र में है उतना आज भी है। भूपेश बघेल के लिए भी उतना ही प्यार है जितना इस पत्र में मैंने लिखा है। और यह जानता था कि मेरे साथ साजिश हो रही है। इसमें कुछ और लोग भी हैं जो उनके साथ थे ।लेकिन मजा तो इसी बात में है कि आपके साथ साजिश हो ।आपको पता रहे। फिर भी आपके मन में उनके लिए प्यार लगातार कायम रहे ।सच में ईमान से यही है।

प्रिय सतीश,
तुम्हारे प्रति मेरी अशेष शुभकामनाएं !
 1.मैं इस पत्र के साथ लाॅ मैनुअल के संबंधित अंशो को उद्धृत कर रहा हूं। उससे स्पष्ट होगा कि एडीशनल एडवोकेट जनरल एडवोकेट जनरल के निर्देश और नियंत्रण के अधीन ही कार्य कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण निर्णयों को भी संलग्न कर रहा हूं। केवल एडवोकेट जनरल का एकल पद संवैधानिक है और एडीशनल एडवोकेट जनरल को तथा अन्य विधि अधिकारियों को संविधान के अनुच्छेद 162 के तहत ही राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किया जाता है। वे एडवोकेट जनरल के निर्देश के बिना कोई भी संवैधानिक या अधिनियमित कार्य नहीं कर सकते।
12. एडवोकेट जनरल के पद का महत्व और अधिकारिता कैबिनेट मंत्री के पद के बराबर है। उससे कमतर नहीं। उसे कैैबिनेट मंत्री के पद के बराबर अधिकार और सम्मान देना संविधान की मंशा है। अन्यथा वह संवैधनिक और विधिक कार्य करने में असमर्थ होगा। दुख है कि शायद ऐसी समझ राज्य के प्रमुख सचिव विधि को नहीं है। पिछले राजनीतिक काल में राज्य की ओर से स्पष्ट किया गया था कि एडवोकेट जनरल के पद को मंत्री के पद के बराबर देने का निर्णय नहीं हुआ है। यह सरासर सुप्रीम कोर्ट और भारतीय संविधान सभा के द्वारा किए गए उल्लेखों के विरुद्ध है।
13.  एक खास कारण से यह पत्र लिखने की जरूरत हुई। तुमने सदैव मुझे सबके सामने चरण छूकर सम्मान दिया है। मैंने भी तुमसे उतना ही प्रेम किया है।
पिछले दिनों एक रिट याचिका को लेकर तुमसे मेरी 13 मई 2019 को टेलीफोन पर बात हुई। वह रिट याचिका मुझ एडवोकेट जनरल के एक सामान्य प्रशासनिक अस्थायी आदेश को चुनौती देती हुई है, यद्यपि याचिकाकार को कोई अधिकार हो ही नहीं सकता। मैंने सुश्री फौज़िया मिर्ज़ा को राज्य और अन्य की ओर से पक्ष समर्थन हेतु मौखिक रूप से अधिकृत किया क्योंकि एडवोकेट जनरल और उनका आफिस संविधान और लाॅ मैनुअल के हिसाब से इस पक्ष समर्थन के लिए विधिक रूप से अधिकृत है। 13.05.2019 को प्रकरण केवल वह आदेश प्रस्तुत करने के लिए था जिसे मैंने स्वयमेव निरस्त कर दिया था। इस आधार पर अनुच्छेद 226 भारतीय संविधान के अंतर्गत सक्षम न्यायालय द्वारा कोई भी आदेश पारित करने की संवैधानिक या विधिक संभावना ही नहीं रही है। इसके बावजूद तुमने मौखिक रूप से 13.05.2019 की सुनवाई के दिन सुश्री फौज़िया मिर्ज़ा से अधिकारपूर्वक कहा कि तुम्हें इस प्रकरण में राज्य शासन की ओर से पक्ष समर्थन के लिए प्रमुख सचिव विधि की ओर से निर्देश प्राप्त है।
यह असामान्य तथा गैरसंवैधानिक स्थिति थी। इसलिए मैंने तुमसे टेलीफोन पर बात कर आग्रह और समझाइश के स्वर में तुम्हें पक्ष समर्थन से मना किया। लेकिन तुम इस बात पर कायम रहे तुम्हें प्रमुख सचिव विधि से निर्देश प्राप्त है। यदि ऐसा निर्देश था तो तुम्हें तथा प्रमुख सचिव विधि को कानून नहीं आता-यही कहना होगा। मेरी तुम्हारी बातचीत का पूरा ब्यौरा मेरे पास सुरक्षित है। सहयोग के कारण याचिकाकार ने ही समय बढ़ा लिया। दुर्भाग्यवश तुमने कुछ ऐसी बातें कहीं जो तुम्हें नहीं कहनी थीं। ऐसी भी बात थी जो राज्य के और एडवोकेट जनरल के हितों के विरुद्ध थी। इसमें एक ऐसे वकील का नाम लिया गया जो लगातार राज्य के आपराधिक प्रकरणों में सरकार के खिलाफ खड़ा हो रहा है। उन अधिकतर प्रकरणों में तुम ही राज्य का पक्ष समर्थन कर रहे हो।
14. तुमको याद होगा मेरे एडवोकेट जनरल बनाए जाने की घोषणा के बाद तुमने एडीशनल एडवोकेट जनरल पद लेने में काफी अनिच्छा व्यक्त की थी। मैंने तुम्हें बार बार अपने घर बुलाकर एक अभिभावक की तरह समझाया था कि मुख्यमंत्री के सद्भाव के बावजूद कई बार ऐसे निर्णय लेने पड़ते हैं जो सबको अनुकूल नहीं लगते। यह श्री भूपेश बघेल की उदारता और मेरे प्रति प्रेम और सम्मान था और पिछले लगभग पचास वर्षों से दिख रही भावना जिसके कारण मुझे उन्होंने लगभग दबाव जैसा आग्रह बनाकर यह पद स्वीकार करने की स्थिति बना दी। मैं राज्य का लगभग सबसे पुराना कांग्रेस सदस्य तथा दुर्ग जिले की राजनीति में भूपेश बघेल के राजनीति में प्रवेश करने से लेकर लगातार कंधे से कंधा मिलाकर एक वरिष्ठ के रूप में संलग्न रहा हूं। मुझे उनसे लगातार सम्मान मिला है। सचाई तो यह है कि हमारा आपस में कभी भी एक बार भी मतभेद नहीं हुआ जो अन्यथा राजनीति में होता ही रहता है।
15. अगर मेरे मन में दुराग्रह होता तो यह निजी पत्र नहीं लिखता। मुझे मालूम है कि मेरे विरुद्ध अफवाह, झूठ, फरेब और चुगलखोरी का माहौल बनाया जा रहा है। मेरे पास वे सब लिखित आदेश मौजूद हैं जिसमें मैंने विशेषकर राज्य के महत्व के अपराधिक प्रकरणों में तुम्हारे सहित सभी एडीशनल एडवोकेट जनरल को बार बार लिखित रूप में निर्देश दिया है कि वे आवश्यकतानुसार मुझसे प्रकरण में जैसी चाहे मदद लें। तुम जानते हो डेजिगनेटेड सीनियर एडवोकेट होने के नाते मैं कभी सहायक एडवोकेट की बिना सहमति से न्यायालय में खड़ा ही नहीं हो सकता। इसके बावजूद कई प्रकरणों में मैंने तुम्हें और अन्य सहायक अधिवक्ताओं के साथ उनके कहने पर पैरवी की है। यह पूरा साक्ष्य मेरे पास है। यदि मुझे बहस करने बुलाया ही नहीं गया तो मैं क्या कर सकता था। यह साफ है कि मैं मुकदमों का बटवारा करने में मास्टर आफ द रोस्टर भी हूं।
16. मुझे अंततः आशा है कि तुम्हें एडीशनल एडवोकेट जनरल के पद पर काम करने के लिए राजी करने से लेकर उनके बीच भी तुम्हारी वरिष्ठता को कायम करने के लिए मैंने लिखित रूप में भी शासन से पत्र व्यवहार किया है। इस स्थिति से माननीय मुख्यमंत्री जी और प्रमुख सचिव विधि अन्य अधिकारियों सहित परिचित रहे हैं। आशा है तुम्हारे स्तर पर हर तरह की गलतफहमी को दूर किया जाना चाहिए। पद तो आते जाते रहते हैं। रिश्ते स्थायी होते हैं। वैसे भी बहुत वरिष्ठ उम्र में यह पद मिलने से मेरी प्रैक्टिस पर कोई अनुकूल असर नहीं पड़ा है। चाहे जो हो। एक खराब या गुमनाम वकील मैं नहीं रहा हूं।
बाकी सब कुछ तुम्हारे ऊपर छोड़ता हूं। एक बार मैं जिससे रिश्ता कायम करता हूं उसे तोड़ता नहीं हूं। जिससे रिश्ता तोड़ता हूं उससे फिर जोड़ता भी नहीं हूं। दुर्ग जिले की राजनीति के संदर्भ में आज की तिथि में इने गिने लोग इस बात को जानते हैं जिनमें श्री भूपेश बघेल सबसे अधिक सूचित हैं। मेरी दिली इच्छा है कि श्री भूपेश बघेल और कांग्रेस पार्टी को विपरीत हालातों के बावजूद देश में सबसे ज्यादा यश और महत्वपूर्ण भूमिका मिले। मैंने इस संबंध में मुख्यमंत्री को आश्वस्त भी किया है। बेहतर होगा मुझ जैसे वरिष्ठ विधि अधिकारी का कोई सक्षम उत्तराधिकारी अवश्य हो लेकिन उसमें मुगल बादशाहों की परंपरा नहीं हो। यह कतई मैं तुम्हारे लिए इशारा नहीं कर रहा हूं। तुमसे सम्मान मिलना मुझे अच्छा लगता है।
तुम्हारा शुभचिंतक
कनक तिवारी
(कनक तिवारी जी के फेसबुक प्रोफाइल से साभार)

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