विशेष लेख : रायपुर : दुर्गम पहाड़ी और जंगलों के बीच कुल्हाड़ीघाट में करवट ले रहा है विकास


  • पूर्व प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी सन् 1984 में पहुंचे थे कुल्हाड़ीघाट
  • बल्दीबाई ने अपने हाथों से खिलाया था तेंदूफल
  • शासन के मंशानुरूप जिला प्रशासन जुटा है कायाकल्प करने में
  • स्कूल, आश्रम, उप स्वास्थ्य केन्द्र, आंगनबाड़ी सहित मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध


रायपुर, जिले के मैनपुर विकासखण्ड मुख्यालय से 17 किलोमीटर दूर पर दुर्गम पहाड़ी और बीहड़ जंगलों के बीच बसा ग्राम कुल्हाड़ीघाट किसी परिचय का मोहताज नहीं है। ग्राम पंचायत कुल्हाड़ीघाट एवं उसके आश्रित गांव लगभग 35 किलोमीटर की परिधि में बसा हुआ है। ताराझर, मटाल, भालुडिग्गी जैसे गांव दुर्गम एवं ऊंची पहाड़ों पर बसा हुआ है। यहां के लोग अभी भी पहाड़ी की तराई से होकर आना जाना करते हैं। यह क्षेत्र वनांचल, दुर्गम एवं संवेदनशील होने के साथ-साथ वामपंथ उग्रवाद से प्रभावित है। इस ग्राम पंचायत की 1473 की आबादी  में से लगभग 98 प्रतिशत आबादी विशेष पिछड़ी कमार जनजाति है।
जब बल्दीबाई ने अपने हाथों से खिलाया कंदमूल
    ग्राम पंचायत कुल्हाड़ीघाट का मुख्यालय कुल्हाड़ीघाट में स्थित है। यह वही गांव हैं जहां देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री राजीव गांधी सन् 1984 में अपनी पत्नि श्रीमती सोनिया गांधी के साथ हेलीकाॅप्टर से पहुंचे थे। तब से कुल्हाड़ीघाट को एक नई पहचान मिली है। गांव की महिला बल्दी बाई ने अपने हाथों से राजीव गांधी को कंदमूल व तेंदूफल खिलाकर जैसे शबरी की भूमिका निभाई थी। आज लगभग 90 वर्ष की हो चुकी बल्दी बाई उन दिनों को याद करके चहक उठती है। उनकी चेहरे की झुर्रियों में चमक आ जाती है। वे बताती हैं कि उन्हें और उनके परिवार को शासन की पेंशन, राशन कार्ड, वन अधिकार पत्र एवं आवास योजना के तहत लाभ मिला है।
विषम परिस्थितियों में विकास की ललक
    हरियाली और पहाड़ियों से घिरा कुल्हाड़ीघाट में प्रचुर प्राकृतिक संसाधन है। समीप में ही मनोहारी देवधारा जलप्रपात बहती है। घने जंगल और सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण यह वामपंथ उग्रवाद का दंश भी झेल रहा है। शासन और जिला प्रशासन द्वारा कुल्हाड़ीघाट के विकास के लिए अनेक विकासीय कार्य स्वीकृत किये गये हैं। फलस्वरूप आज कुल्हाड़ीघाट की तस्वीर बदलने लगा है। एक समय जहां कच्ची पगडंडी रास्तों से होकर जाना पड़ता था, वहीं आज कुल्हाड़ीघाट तक पक्की सड़कें बन गई है। आश्रित ग्राम कठवा, गंवरमुंड, बेसराझर, भालुडिग्गी एवं देवडोंगर में भी पहुंच मार्ग से आ-जा सकते है। पंचायत में अधोसंरचना विकास के साथ-साथ मानव संसाधन विकास के उल्लेखनीय कार्य किये गये हैं।

मानवीय विकास के बहुआयामी प्रयास
    कमार विकास परियोजना अंतर्गत वर्ष 2009-10 से 2015-16 तक आजीविका संवर्धन हेतु विभिन्न प्रशिक्षण सहित सीधा लाभ दिया गया। इनमें 17 कमार परिवारों को भूमि, 28 को आवास एवं 471 व्यक्तिगत वन अधिकार पत्र दिये गये। बकरी पालन, मत्स्य पालन के लिए भी सहायता दी गई। यहां के कमार परिवारों को भूख से निजात दिलाने 179 अंत्योदय गुलाबी राशन कार्ड सहित 515 परिवारों का राशन कार्ड जारी किया गया है। यहां राशन दुकान के माध्यम से उचित मूल्य पर राशन वितरित किया जा रहा है। जंगल एवं पहाड़ी के बीच रह रहे इन परिवारों के लिए अच्छा आवास भी चुनौती थी। शासन द्वारा इंदिरा आवास अंतर्गत वर्ष 2012-13 से 2015-16 तक कुल 239 आवास स्वीकृत किये गये जिनमें से 217 आवास पूर्ण हो गया है। इसी तरह प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत 86 कमार परिवारों को आवास स्वीकृत किया है, इनमे से 76 पूर्ण हो गया है।

पेंशन, पेयजल, स्वास्थ्य और सिंचाई की सुविधा
    गरीब परिवारों के लिए शासन की पेंशन योजना मद्दगार साबित हो रहा है। कुल्हाड़ीघाट में कुल 196 हितग्राहियों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन का लाभ दिया जा रहा है। बच्चों और महिलाओं के विकास के लिए 8 आगंनबाड़ी केन्द्र संचालित है। जिसमें 111 बच्चे दर्ज है। इसके अलावा गर्भवती माताओं को गरम भोजन भी दिया जा रहा है। क्षेत्र में  कृषि सिंचाई की जरूरत को देखते हुए निकट के सरार में क्रेडा द्वारा सौर सामुदायिक सिंचाई योजना से 49 किसानों के 60 हेक्टेयर रक्बा में सिंचाई सम्भव हो सका है। शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना शासन की प्राथमिकता रही है। कुल्हाड़ीघाट एवं उनके आश्रित ग्रामों में 16 हेण्डपंप में 2 सोलर पंप के माध्यम से नलजल संचालित है। ग्राम कठवा में वाटर ए.टी.एम भी स्थापित किया गया है। राजस्व
विभाग द्वारा सूखा राहत के अलावा 48 किसानों को आबादी पट्टा एवं कुल 471 हितग्राहियों को वनाधिकार पट्टा वितरित किया गया है। वहीं कृषि विभाग द्वारा उड़द फसल प्रदर्शन एवं 5 किसानों को सौर पंप, 15 किसानों को डीजल पंप प्रदान किया गया है। वहीं सुराजी गांव योजना के तहत 42 किसानों को चयन किया गया है। स्वास्थ्य सुविधा के लिए  उप-स्वास्थ्य केन्द्र भी संचालित है।
अधोसंरचना विकास की इच्छाशक्ति
पुल, पुलिया, स्टापडेम और सड़क गांव तक पहुंची
    लोगों की आजीविका सुनिश्चित करने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी योजना एक कारगार योजना साबित हुई है। यहां 442 जाॅब कार्डधारी है। इस वर्ष 36 हजार 999 मानव दिवस सृजित किया गया। योजना अंतर्गत स्टापडेम सह पुलिया निर्माण एवं बाजार शेड का निर्माण कार्य हुआ। मनरेगा अंतर्गत भूमि सुधार, डबरी, कुंआ के साथ सुराजी गांव योजना के तहत 4.5 एकड़ में 19.79 लाख रूपये की लागत से गौठान एवं 7.62 लाख रूपये लागत से चारागाह निर्माण का कार्य स्वीकृत किया गया है।

जिस भौगौलिक स्थिति में कुल्हाड़ीघाट बसा है वहा अधोसंरचना विकास एक चुनौतीपूर्ण कार्य रहा है। शासन के मंशा अनुरूप जिला प्रशासन द्वारा विभिन्न निर्माण कार्य स्वीकृत कर यहां की कठिन जीवन को आसान बनाने का प्रयास किया है। 13वें वित्त से सी.सी.रोड़, आंगनबाड़ी, बोर खनन, हेंडपंप, रंगमंच निर्माण तथा अन्य विकासीय योजाओं से निर्मलाघाट, मुक्तिधाम, सामुदायिक भवन, पुल-पुलिया, किचन शेड, और देवगुडी पुजा स्थल का निर्माण किया गया है। आवागमन की सुविधा को देखते हुए मैनपुर से कुल्हाड़ीघाट मार्ग पर 5  पुलिया स्वीकृत किया गया है। जिनमें से 2 पूर्ण हो चुका है। शेष प्रगति पर है और जल्दी ही पूर्ण होगा। कुल्हाड़ीघाट में बिजली भी पहुंच गई है।
    कुल्हाड़ीघाट एवं उसके आश्रित ग्रामों को विकास के नक्शे पर स्थापित करने बहुआयामी  प्रयास किय गए है। विषम भौगौलिक परिस्थिति एवं मौजूदा चुनौतियों के कारण पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्र में बसे आश्रित ग्राम विकास की नक्शे पर जल्दी ही प्रतिबिंबित होगा। जिला प्रशासन क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए रोडमैप बनाकर उसे क्रियान्वयन करने संकल्पित है।

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