बाड़ियों में सब्जियां उत्पादन कर किसान बनेंगे आत्मनिर्भर

रायपुर, छत्तीसगढ़ शासन की महत्वकांक्षी योजना नरवा, गरूवा, घुरवा, बाडी ऐला बचाना हे संगवारी की कहावत को चरितार्थ करते हुए उद्यान विभाग द्वारा जिले में बाडी उन्न्यन एवं नवीन बाडी का निर्माण तीव्रगति से करवाया जा रहा है। परंपरागत रूप से छत्तीसगढ़ के आमजन शाक-सब्जी के लिए बाडी पर ही निर्भर तथा घर के घुरूवा की खाद का उपयोग कर उत्पादन करते थे। समय के साथ-साथ बाडी में बोये जाने वाले सब्जियों में कमी होने लगी तथा सब्जियों के लिए बाजार पर निर्भरता बढ़ने लगी। मंडियों अथवा बाजारों में बारहो महिने सभी प्रकार के सब्जियां की उपलब्धता ने मुह का स्वाद छीन लिया। साक सब्जियों का स्वाद बिना किसी रसायनिक खाद के मौसम अनुरूप उत्पादन करने से स्वाद बना रहता है।

रायपुर जिले के सभी विकासखण्ड के ऐसे हितग्राही जिनके घरों से लगे बाडी का उन्नयन कार्य एवं नवीन बाड़ी निर्माण हेतु इच्छुक है ऐसे लोगों का चयन कर जिला कार्यालय से तकनीकी स्वीकृति उपरान्त महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी से योजना बाडी निर्माण करवाया जा रहा है। बाडी निर्माण से हितग्राहियों को स्वयं द्वारा उत्पादन किये गये साक-सब्जी का उपयोग करने के साथ-साथ बाजार में भी अपनी जीविकोत्पार्जन के लिए सब्जियां बेच सकेंगे। जिले में मनरेगा के तहत प्रथम चरण में 714 बाड़ी निर्माण कराया जाना प्रस्तावित है। जिसमें से 660 बाड़ी के प्रस्ताव प्रशासकीय स्वीकृति मिलने उपरान्त वर्तमान में कुल 295 बाड़ी का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। शेष बाड़ियों का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। इन बाडियों के लिए आवश्यक बीज में करेला, चिकनी तरोई, बैंगन, भिण्डी, लौकी, मिर्च, लाल बरबटी, लालभाजी और मूली बीज कृषकों को प्रदाय किया गया है।

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