मनोरंजन तो एक माध्यम था असल अभियान तो छत्तीसगढ़ की अस्मिता, संस्कृति और स्वाभिमान को जगाना था

सुशील भोले के साथ जयंत साहू की चर्चा

चंदैनी गोंदा केवल छत्तीसगढ़ी गीत-संगीत प्रस्तुत करने वाली मंडली नहीं वरन एक अभियान था।  दाऊ जी के प्रेरणा स्त्रोत डॉ. खूबचंद बघेल जी थे, जिनके निर्देशानुसार ही उन्होंने सांस्कृतिक आंदोलन शुरू किया। डॉ. खूबचंद बघेल जी का नाटक जरनैल सिंह, करम छड़हा आदि का मंचन चंदैनी गोंदा में होता था। मनोरंजन तो एक माध्यम था असल अभियान तो छत्तीसगढ़ की अस्मिता, संस्कृति और स्वाभिमान को जगाना था। ..
.दाऊ रामचंद्र देशमुख जी तो छत्तीसगढ़ राज्य आंदोलन में 1971 से ही कूद चुके थे मिशन ‘चंदैनी गोंदा’ लेकर। बहरहाल इस बात को तो सभी मानते है कि पृथक छत्तीसगढ़ राज्य सांस्कृतिक और साहित्यिक आंदोलन का परिणाम है तो इस हिसाब से उनकी भूमिका भी जग जाहिर है। ..

दाऊ जी के छत्तीसगढ़ी लोक कला के प्रति लगाव और समर्पण से मैं काफी प्रभावित था। दाऊ जी कला मर्मज्ञ तो थे, साथ ही उनके भीतर एक बहुत अच्छा लेखक और चिंतक भी छुपा हुआ था। उनका एक विशेष लेख मयारू माटी में प्रकाशित भी हुआ, जिसमें उन्होंने चंदैनी गोंदा के विषय में अपना अनुभव लिखा था कि किस प्रकार वे कला के क्षेत्र में आये और कैसे चंदैनी गोंदा का सृजन हुआ।
इस साक्षात्‍कार को जयंत साहू जी के ब्‍लॉग चहलकदमी में इस कड़ी से पूरा पढ़ें ..

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