बिलासपुर वैभव: सातवाँ विकास शासन

शासन
शासन के दो भाग हो सकते हैं - माल और प्रबंध। हैहयवंशियों के समय में गाँव का किसानों से लगान वसूल कर बरहों को पहुँचाता था और बरहों अपने गढ़ाधिपतियों को गढ़ के दीवान उसे राजा के निकट पहुँचाने के जिम्मेदार थे। राज कल्याण सायके समय में 7 लाख से ऊपर की वसूली थी। मराठों के समय में वसूली क्या होती थी, खासी लूट होती थी। जमा ज्यादा वसूल हो यही उनका सिद्धांत था, फिर चाहे जिस प्रकार हो। सन् 1818 में जब अंग्रेजी शासन आरंभ हुआ तब लगान के सिवा और दूसरे कर बंद कर दिए गए। वसूली का समय बाँध दिया गया और को आज्ञा दी गई कि वसूली जो वे करें, उसके बाद प्रजा को रसीद अवश्य दें। सन् 1854 में अंग्रेजों का जिले पर पूरा अधिकार हो गया। सन् 1868 में इसका पहली बार बंदोबस्त किया गया। चीजम साहब Cheesam Sahab बंदोबस्त ऑफिसर Settlement Officer मुकर्रर हुए। जमीन की नाप-जोख होने लगी। जमीन की किस्में मुकर्रर हुई। माल-गुजार तथा किसानों के हक अलग-अलग बताए गए। बहुत जाँच पड़ताल के बाद को गाँवों पर मालगुजारी हक दिए गए। लोरमी Lormi और तरेंगा Tarenga तालुके में जितने गाँव थे, वे मामूली गाँव की तरह समझे गए। इस बंदोबस्त में खालसा Khalasa की जमा वसूली 15,170 से 2,51,934 हो गई और जमीनदारियों से 13,495 के बदले 25,077 लिए जाने लगे। इस हिसाब से लगान का औसत प्रति एकड़ ( जोती हुई भूमि पर 1 पड़ा।
पहले बंदोबस्त की मियाद सन् 1888 में खत्म हो गई। दूसरा बंदोबस्त केरी साहब ने शुरू किया पर बीच में उनकी बदल हो जाने से रायबहादुर पुरुषोत्तमदास Raibahadur Purushottam Das को काम पूरा करना पड़ा। इस बंदोबस्त में यह बड़ा काम हुआ कि जिले का ठीक-ठीक नपा हुआ नक्शा तैयार हो गया। जमा वसूली 4,74,678 बढ़ा दी गई अर्थात् प्रति एकड 6 पाई जमींदारियों की पैमायश इस समय तो नहीं पर सन् 0000 और 1897 के बीच में हुई। फिर भी इस समय उनकी आमदनी देखकर उनकी सालाना टकौली 25077 से 42,000 बढ़ा दी गई। इसके सिवा, जंगल आदि की आमदनी पर सरकार का भी कुछ हिस्सा रखा गया। कई जमींदारियों में पुलिस का प्रबंध सरकारी था, सो इसके लिए कुल वसूली उनसे 66,642 की होने लगी। खासले में सड़क, स्कूल, डाक, अकाल, पटवारी खर्च के लिए भी कुछ रकम जिसे अबवाघ कहते हैं, लगाने के साथ वसूल करने का प्रबंध किया गया।
दूसरे बंदोबस्त की मियाद सन् 0000 में खतम हो अकाल पड़ जाने से तीसरा बंदोबस्त सन् 1905 से आरंभ किया गया। बेमेतरा तहसील के 315 गाँव दुरुग जिले में मिला दिए गए। इसी समय संबलपुर जिले के 254 गाँव इस जिले में आ गए पर इनका बंदोबस्त वहीँ हो चुका था। इस बंदोबस्त में जिले की जमा वसूली 2,95,215 बाँधी गई, अर्थात 4 एकड़। इस रकम में अबवाब शामिल नहीं है। तीसरे बंदोबस्त की मियाद मुंगेली तहसील में सन् 1929 में, विलासपुर तहसील में सन् 1930 में और जांजगीर तहसील में सन् 1931 में समाप्त होगी।
इस जिले का मुख्य अधिकारी डिप्टी कमिश्नर है। वह जिला मजिस्ट्रेट भी है । उसे रीवा, रायगढ़ और सकती के रेलवे सरहदों के भीतर भी शासन करने का अधिकार है । उसे सहायता के लिए 6 एक्सट्रा असिस्टेंट कमिश्नर मिले हैं । जिन्हें यहाँ के लोग 'छोटे साहब' कहते हैं । जिले में 4 तहसीले हैं। 1 बिलासपुर, 2 जांजगीर, 3 मुंगेली और 4 कटघोरा । प्रत्येक तहसील में एक तहसीलदार रहता है। सबडिविजनों की संख्या 4 है, जिनके चार्ज में एक-एक छोटे साहब हैं । एक हेडक्वार्टर मजिस्ट्रेट है और एकके जिम्मे आबकारी है। एक किसी के जिम्मे कोर्ट ऑफ वार्डस का काम सौंप दिया जाता है।
दीवानी मामलों के लिए एक एडिशनल डिस्टिक्ट जज, एक सब जज और एक मुनसिफ बिलासपुर में तैनात हैं। सब जज को खफीफा जज का भी काम करना पड़ता है। कटघोरा को छोड़ प्रत्येक तहसील में एक मुनसिफ और है। रतनपुर और शिवरीनारायण में पहले ही से बेंच मजिस्ट्रेटों की अदालतें थीं, पर पिछले दो वर्ष के भीतर और कई स्थानों ये अदालतें खोली गई हैं और यहाँ बैठनेवाले मजिस्टरेटों की संख्या भी खूब बढाई गई है।

लैण्ड रिकॉर्ड
भूमि संबंधी कागजों को तैयार करनेवाला महकमा लैण्ड रिकॉर्ड कहलाता है। इसके मुख्य ऑफिसर लैण्ड रिकॉर्ड सुपरिटेंडेंट हैं। इनके नीचे 3 सहायक सुपरिटेंडेंट हैं। रेवन्यू इन्सपेक्टरों की संख्या 24 है, जिनमें 20 खाल में और 4 जमींदारियों में है। रेवन्यू इन्सपेक्टरों के हलकों के नाम ये हैं -बिलासपुर तहसील में -कंडार, मस्तूरी, बीजा, गनियारी, बेलगहना और पेंडरा। जांजगीर तह. में अकलतरा, पामगढ़, बिर्रा, हसौद, बाराद्वार, चांपा, खोखरा और चंद्रपुर । मुंगेली तह. में लिमहा, लोरमी, पथरिया, कुंडा और पंडरिया । कटघोरा तह. में रामपुर,कोरबा, छुरी और पोंडी । पटवारी कुल 419 हैं। प्रत्येक पटवारी के हलके में 8 गाँव का औसत पड़ता है और प्रत्येक रेवेन्यू इन्सपेक्टर के जिम्मे 17 पटवारी आते हैं।

पुलिस
पुलिस-विभाग का अधिकारी डिस्टिक्ट सुपरिटेंडेंट पुलिस कहाता है। यहाँ वह 'कप्तान-साहब' के नाम से प्रसिद्ध है। इनके नीचे एक डिपुटी सुपरिटेंडेंट हैं। इनकी सहायता के लिए 1 रिजर्व इन्सपेक्टर, 4 सरकिल इन्सपेक्टर, 1 प्रासिक्यूटिंग इन्सपेक्टर (जो कोट साहब कहलाता है) 36 सब इन्सपेक्टर, 84 हेड कांस्टेबल, 320 कांस्टेबल और 3 सवार हैं। यहाँ की पुलिस में परदेशियों की संख्या बहुत है। जिले भर में कुल 25 पुलिस थाने है। वे ये हैं- -बिलासपुर तहसील - बिलासपुर, हिरी Hirri, मस्तूरी Masturi, रतनपुर, तखतपुर कोटा, पेंडरा और मरवाही Marvahi। जांजगीर तह.- जांजगीर, चांपा, पामगढ़ Pamgarh, शिवनारायण, डभरा Dabhara, जयजयपुर Jaijaypur और पदमपुर Padampur। मुंगेली सहसील - मुंगेली, लोरमी Lorami, पथरिया Pathariya, पंडरिया और कुंडा Kunda। कटघोरा तह. - कटघोरा, कोरबा, रामपुर, पसान और पाली।

अन्य महकमें
जेल की सुपरिंटेंडेंटी सिविल सर्जन के जिम्मे है। उसके नीचे दो जेलर और कई वार्डर है। आबकारी डिस्टिक्ट एक्साइज ऑफिसर के जिम्मे है। पिछले दो वर्ष के भीतर शराब की खपत मिटा देने के लिए जो देशव्यापी - आंदोलन हुआ था, उसका असर इस जिले में भी हुआ, पर कम। अब तो धड़धड़ाके से शराब की बिक्री हो रही है। नहर विभाग यहाँ सन् 1906 से जारी है। हरदी Haradi, धनरास Dhanras, बरपाली Barpali और आमाचुवा Amachuva में बाँध बाँधने के पश्चात् यह सब खारून नदी में बाँध Dam in Kharun river बाँधने का काम कर रहा है । पी. डब्लयू. डी. महकमा भी यहाँ है। इसकी कुल इमारतों की कीमत 11,34,77 रुपये है। जिले भर के डाक-बँगलों की संख्या 20 है। आरोग्यता विभाग का काम सिविल सर्जन देखते हैं। जिले भर में 12 अस्पताल हैं, जिनमें से 4 तो बिलासपुर शहर ही में हैं । ढोर अस्पताल भी कई स्थानों में हैं। कोढ रोगाश्रम 1 मुंगेली में हैं और 1 चांपा में पैंडरा रोड Pendra Road में मिस लांगडन का क्षयरोगाश्रम है।

डिस्टिक्ट कौंसिल (डि. कौ. District council)
बिलासपुर डि. कौंसिल 1 फरवरी 1885 से स्थापित है । सेक्रेटरी पहले सरकारी ऑफिसर हुआ करते थे, पर पिछले 6 साल से श्रीयुत ई. राघवेन्द्र राव E. Raghavendra Rao इस पद पर हैं और अपना कार्य बड़ी योग्यतापूर्वक कर रहे हैं। डि. कौ. के मातहत में 4 तहसील 4 लोकल बोर्ड हैं । जिले भर में कोई 20 से ऊपर स्कूल डि. कौ. के खर्च से चल रहे हैं। इसके सिवा डि. कौ. को सडक, अस्पताल आदि अनेक कार्यों में बहुत सा रुपया खर्चा करना पड़ता है। 'विकास' नामक एक उत्तम पत्र भी यह निकालती है । तखतपुर Takhatpur, रतनपुर Ratanpur, मुंगेली Mungeli, चांपा Chanpa, अकलतरा Akaltara, पेंडरा Pendra, गौरेला Gaurela, जांजगीर Janjgir, बलौदा Balauda, चंद्रपुर Chandrapur और कोटा Kota में सेनीटेशन ऐक्ट जारी है।

म्यूनिसिपालिटी
इस जिले में म्यूनिसिपालिटी केवल बिलासपुर शहर में (सन् 1867 से) जारी है। इस समय इसके खर्च से शहर में 7 प्राइमरी स्कूल और 1 अंग्रेजी मिडिल स्कूल चल रहे हैं। इसके सिवा इसे रोशनी, पानी, छिड़काव, सड़क, बागीचा, सफाई आदि कामों में बहुत सा रुपया खर्च करना पड्ता है। इसके प्रेसीडेंट श्री राघवेंद्र राव Raghavendra Rao बडे़ कार्य-कुशल हैं। सन् 1895 में शहर में 12,376 की लागत से टाउनहाल बनाया गया है। इसका आधा खर्च म्यूनिसिपालटी ने दिया और आधा डिस्टिक्ट कौंसिल ने, तथा दोनों के दफ्तर वहीँ लगते हैं।

सहकारी बैंक Co-operative Bank
सहकारी सेण्ट्रल बैंक यहाँ सन् 1915 से स्थापित हैं। इस समय इसके काम चलाने की पूँजी कुछ कम तीन लाख है। इसकी मातहत सभाओं की संख्या 200 से ऊपर है । किसानों को इस बैंक से बडे लाभ पहुँचे और पहुँचाए जा रहे है। बैंक की सफलता का सारा यश उसके आनरेरी सेक्रेटरी Honorary secretary रायसाहब बी. जगन्नाथ Raisahab B. Jagannath को है। इनके सिवा राज शासन और प्रजा के सुभीते के लिए रजिस्ट्री, स्टाम्प, डाक, तार आदि कई महकमें जारी हैं। इस कड़ी को क्लिक करके विलास वैभव Bilaspur District Gazeteer मुख्‍य पृष्‍ट पर वापस जायें ..

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