Raipur Rashmi History of District Hindi Gazetteer Sape पहली झलक रूप

आकार Shape
छत्तीसगढ़ कमिश्नरी अंतर्गत रायपुर जिला मध्य प्रदेश में सबसे बड़ा है। उसका क्षेत्रफल 9834 वर्ग मील है । पहले इसका रकबा डेढ़ा था। केवल बीस वर्षों के उसके कुछ अंग आस-पास के जिलों में बाँट दिए गए, इस प्रकार कलेवर घटाने पर भी अब भी वह विस्तार में दो जिलों की बराबरी अकेले कर सकता है। रायपुर प्राचीन महाकौशल का मध्यस्थल था। उस समय राजधानी 37 मील ईशान को महानदी के तट पर श्रीपुर वर्तमान सिरपुर में थी। इस जिले का आकार श्री (लक्ष्मी) के सिर के समान है। इसकी चार तहसीलों में बलौदाबाजार तहसील मस्तक के बालों के स्थान पर पड़ती है।
पूर्व की ओर जो वेणी निकली हुई है, वह फुलझर के फूलों से भूषित है, जिसका संबंध यथार्थ में महासमुंद्र तहसील से है। श्री के ललाट पर रायपुर तहसील और नाक और नियुक्त पर धमतरी तहसील शोभती है। मस्तक का शेष भाग महासमुद्र से बना हुआ है, सो उचित ही है, क्योंकि श्री समुद्र से ही उत्पत्ति है।

स्थिति Location
जिले की ठीक स्थिति 19757' एवं 26 53 उत्तरीय अक्षांश और 81/15' एवं 83/38' पूर्वीय देशांतरांश के बीचोबीच पड़ती है। उत्तर में बिलासपुर जिला, ईशान में सारंगढ़ रियायत Sarangarh Riyasat, पूर्व और आग्नेय में उडीसा का सम्बलपुर जिला Sumbalpur Disrict और पटना और कालाहंडी की रियासतें Kalahandi Riyasat, दक्षिण में मद्रास की जयपुर जमींदारी Jaipur Jamindari, पश्चिम में कांकेर रियासत Kanker Riyasat और दुर्ग जिला Durg District है। जिले की नितान्त लंबाई 150 मील और चौड़ाई 80 मील है। इस जिले में सबसे बड़ी सरिता महानदी Mahanadi है। उसने दक्षिण से उत्तर को बहकर ऐसे दो विभाग कर दिए हैं, जिनमें स्वाभाविक विभिन्नता दीख पडुती है। पश्चिमी विभाग में मैदान और पूर्वी में जंगल की अधिकता दिखती है। मैदान की अपेक्षा जंगल का विस्तार अधिक है । जंगली भाग में कोई 11 जमींनदारियाँ हैं, जिनका क्षेत्रफल प्राय: 5 हजार वर्गमील बैठता है। सरकारी जंगल भी उसी ओर को है। सब से ऊँचा भाग खरियार Khariyar और बिंद्रानवागढ़ Bindra Navagarh जमींदारियों में पड़ता है, उसे गौरागढ़ Gaura Garh कहते हैं। यहाँ गौर अर्थात् जंगली वृषभ बहुत पाए जाते हैं। कदाचित् इसी कारण से इस स्थान का नाम गौरागढ़ पड़ गया हो। वह समुद्र जल की सतह से दो से तीन हजार फुट ऊँचा है। सब से ऊँची चोटी कटपार है, जिसकी ऊँचाई 3235 फुट है। अन्य ऊँची चोटियाँ ये हैं- बनडारी, बिरवुसी, देवडोगरी और छारपानी। मैदान की ऊंचाई बहुधा 1000 फुट है। रायपुर शहर की भी ठीक इतनी ही ऊँचाई है।

नदियाँ
जिले भर में मुख्य नदी एक ही है अर्थात् महानदी । शेष उसकी सहायक नदिया हैं। महानदी सिहान के जंगल से निकलकर धमतरी राजिम और सिरपुर से होती हुई बलौदा बाजार तहसील में प्रवेश कर कुछ दूर बिलासपुर जिले की सीमा बनाती हुई सारंग गढ़ रजवाडे में घुस गई है। उसकी मुख्य सहायक नदी शिवनाथ है, जो इस जिले के भीतर अब किसी भाग में नहीं बहतीं, केवल सीमा बनाती हुई मानो श्री की माँग भरती हुई निकल गई है। शिवनाथ की सहायक नदी खारून जी दुर्ग जिले की संजारी तहसील से निकली है, रायपुर तहसील में होकर बही है । रायपुर तहसील के मध्य में कुल्हान है, जो मध्य भाग के पानी को समेट कर खारून Kharun में डालती है । राजिम के पास पैरी नदी Pairi River का महानदी से संगम हुआ है । पैरी बिन्द्रामवागढ़ से निकली है। इसकी सहायक नदी सोंढल Sondhul है। राजिम के पास पैरी का पाट महानदी से बड़ा नहीं तो कम नहीं है। पैरी और शिवनाथ ही के मिलने से महानदी का नाम सार्थक होता है। जोंक नदी Jonk River खरियार से निकली है और सोनाखान Sonakhan और कटगी Katagi जमींदारियों Jamindari से बहकर बिलासपुर के शिवरीनारायण के पास महानदी में मिल गई है, तेल नदी Tel River बिन्द्रानवागढ़ और जयपुर जमींदारियों के बीच की सीमा बनाती हुई अंत में वह भी महानदी में मिल गई है। तेल की सहायक नदी उदेत या उदन्ती Udanti है, जो बिन्द्रानवागढ़ से निकली है। केसुआ करार और नैनी अन्य छोटे-बड़े नदी-नाले हैं जो इस जिले के भीतर महानदी में मिल गए हैं।

बूड़ा
महानदी सूखे दिनों में प्राय: सूखी सी रहती है। उसकी धारा बहुत पतली पड़ जाती है, परंतु वर्षा में भयंकर रूप धारती करती है। उसका इतना बड़ा प्रवाह चलता है कि उसके विस्तीर्ण पाटों के भीतर नहीं समाता और कभी-कभी तो प्रलय उपस्थित कर देता है। इसी कारण बिलासपुर की शिवरी नारायण तहसील का सदर मुकाम उसके किनारे से उठा जांजगीर को ले जाना पड़ा। जिस पूर के कारण यह प्रसंग उपस्थित हुआ, उसका वर्णन शिवरी नारायण के तत्कालीन तहसीलदार श्रीयुत ठाकुर मोहनसिंह ने अपनी प्रलय नाम की कविता में किया है। यह बूड़ा ता. 21 जून, 1885 को आया था और तीन दिन तक रहा। कविवर लिखते हैं-
सारछन्द
प्रबल प्रलय के मेघ तीन दिन बरसे बूंद अटूटे।
छहर मुसल की धारि बारि की जलद न तनिकौ फूटै ॥
गरज-गरज बारिद नभ छाये छुए लेत छिति मानौ।
चपला चमक कृपान चारु लै लपकि डरावति जानौ ॥
रंचु-रंचु बढि सरिता पानी दिन द्वै खेल जनायो ।
पुनि तीजे दिन प्रात: जोर निज तुरतै सबन दिखायो ॥
फूटि कनासी जब धारा चलि पंथ सलिल मय कीन्हों
सम्बलपुर मग रोकि तुरत निज जोर सबल करिचीन्हों
भूपर कूप जगत के ऊपर हाथ द्वै जल आयो।
टोरि फोरि दीवार मध्य गृह फाटक को खटकायो ॥
पुनि तहसील बीच जहं बैठत न्यायाधीश अधीशा।
कोष कूप पर भूष रूप लौं तहं ॥

कुंडलियाँ
पुरबासी व्याकुल भये तजी प्रान की आस।
त्राहि-त्राहि चहु मचि रह्यो छिन-छिन जल की त्रास ॥
छिन-छिन जल की त्रास, आस नहिं प्रानन केरी ।
काल कवल जल हाल देखि बिसरी सुधि हेरी ॥
तजि-तजि निज-निज गेह देह लैं मठहिं निरासी।
धाए भोगहा और कोऊ आरत पुरवासी ॥

सोरठा
कियो जौन जल हाल, दिन द्वै में को लेखई।
मानहु प्रलय सुकाल, आयो निज मरजाद तजि ॥
चौ.
द्वै दिन रात बूंद नहिं टूटें। जलद पटल नभ ते नहिं फूटे।
बारिद बार-बार बरपावैं। वारि बीजुरी मोर नचावैं ॥

सारछंद
दिन तीजे दस बजे रात सौं घट्यो सजिल क्रम-क्रम सों।
भयो प्रात लो थिर संसारा छूटे सब जिय भ्रम सों ॥

दोहा
अस न भयो आगे कबहुँ, बूढे लोग।
जैसो वारिद वारि भर, ग्राम दियो कर सोग ॥
इसके पूर्व भी बडे़ 2 बूडे़ आए थे, एक 90 वर्ष पूर्व कुंवार में आया था, जिसे लोग बैहा पूरा Baiha Pura कहते हैं। उससे मीलों तक के गाँव बह गए थे। यह मंदिर महानदी और पैरी के बीच संगम में एक बड़े भारी चबूतरे पर बना है। चबूतरे पर एक बड़ा झाड़ है। मामूली पूरों में चबूतरा नहीं डूबता, परंतु जब बैहा पूरा आया, तब चबूतरा क्या मंदिर भी डूब गया। वहाँ पर एक साधु रहता था, वह पेड़ पर चढ़ गया और तीन रात-दिन उसी दशा में रहा आया। भाग्य रहा कि उसके प्राण बच गये।

जलवायु Climate
वर्षा 43 और 49 इंच के भीतर हुआ करती है, जो खेती के लिए पर्याप्त है। एक बार सन् 1884-85 ई. में 91 इंच पानी बरसा था। लोग बहुधा तालाबों का पानी पीते हैं, जो हानिकारक होता है, क्योंकि उसी में लोग नहाते धोते और ढोरों को हिलोर देते हैं। गरमी अधिक होती है, उष्ण मापक यंत्र का पारा कभी-कभी 115 अंश तक चढ जाता है। बुखार और हैजा बहुत हुआ करता है, परंतु पहले की अपेक्षा अब कम होता है।
रायपुर रश्मि मुख्‍य पृष्‍ट विवरणिका में वापस लौटें ..

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