ड्रैगन पर भी चल गया नमो का जादू, कश्मीर मुद्दे पर चीन का स्टैंड, तब और अब

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सबसे बड़ी कूटनीतिक जीतों में विरोधी चीन का अपने पक्ष में शामिल करना भी है। भारत का हर मंच पर विरोध करने वाले चीन की भाषा में बदलाव एक चकित करने वाली घटना है। इसका श्रेय सीधे-सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीतिक पहल को जाता है। नमो की प्रभावशाली और धारदार कूटनीति ने ड्रैगन को झुकने के लिए विवश कर दिया।

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11अक्टूबर को नई दिल्ली आएंगे। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि चीन और भारत के बढ़ते तनाव के बीच दोनों देश कैसे आगे बढ़ते हैं। कश्मीर मसले पर चीन अपने शुरुआती बयान से पटल गया है। अनुच्छेद 370 खत्म होने के बाद जो चीन की पहली प्रतिक्रिया सामने आई थी। उस वक्त चीन ने कहा था कि कश्मीर समस्या का समाधान संयुक्त राष्ट्र चार्टर और उसके प्रस्तावों के तहत होना चाहिए।

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चीन ने अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी करने को कहा था। चीन ने कहा था कि भारत जम्मू कश्मीर की यथास्थिति से कोई छेड़छाड़ नहीं करे। पाकिस्तान के लिए यह बयान राहत देने वाला था। चीन के सुर अब बदले-बदले हुए हुए हैं। दो महीने के भीतर उसने कश्मीर मसले पर अपने रुख को बदल दिया है। संयुक्त राष्ट्र चार्टर की बात करने वाला चीन पहली बार कश्मीर मसले को भारत-पाकिस्तान का द्विपक्षीय मसला मानते हुए इसे संवाद के जरिए समाधान तलाशने की बात करता है। यह भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत है। चीन का कहना है कि कश्मीर के साथ बाकी अन्य विवादों को द्विपक्षीय बातचीत के जरिए सुलझाए।



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