महाराष्ट्र में भाजपा को सरकार बनाने का न्योता, सियासी तापमान बढ़ने के आसार

महाराष्ट्र में सरकार को लेकर यूं तो शिवसेना और भाजपा में गतिरोध करीब दो हफ्ते से बना हुआ था और मामला अब तूल पकड़ गया था. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को अपना इस्तीफा सौंपने के बाद शिवसेना और उद्धव ठाकरे पर हमला किया था. उद्धव ठाकरे ने भी जवाब देने में देर नहीं लगाई. इस बीच राज्यपाल ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी भाजपा को सरकार बनाने का न्योता दिया है. भाजपा को न्योता दिए जाने के बाद जाहिर है कि राज्य की सियासत में उबाल आएगा और जोड़-तोड़ देखने को मिलेगा. बयानों के वार भी होंगे और पलटवार भी.

देवेंद्र फडणवीस को बहुमत साबित करने की कड़ी चुनौती होगी. राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने भारतीय जनता पार्टी को सरकार बनाने का न्योता दिया. विधानसभा चुनावों में भाजपा को 105 सीटों पर जीत मिली थी. शिवसेना 56 सीटें जीतकर दूसरे नंबर की पार्टी बनी थी. महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना गठबंधन को बहुमत मिला था लेकिन मुख्यमंत्री और ढाई-ढाई साल सरकार में साझीदारी की वजह से दोनों दलों के मनमुटाव सामने आए. इसकी वजह से राज्य में सरकार गठन का मामला अधर में लटक गया. लिहाजा राज्यपाल की तरफ से सबसे बड़े दल को सरकार बनाने का न्योता दिया गया. 

महाराष्ट्र में सरकार गठन की कवायद के बीच भाजपा और शिवसेना आमने-सामने आ गए हैं. शुक्रवार शाम देवेंद्र फडणवीस ने राज्यपाल को मुख्यमंत्री पद का इस्तीफा सौंपने के बाद शिवसेना पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने साफ किया कि शिवेसा के साथ 50-50 फार्मूले पर कभी चर्चा ही नहीं हुई. जवाब में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी प्रेस कांफ्रेंस कर भाजपा को जवाब दिया. उद्धव ठाकरे ने कहा कि झूठा ठहराए जाने से सकते में और व्यथित हूं. उन्होंने कहा कि अमित शाह की उपस्थिति में सत्ता में समान साझीदारी की सहमति बनी थी. ठाकरे ने कहा कि शिवसेना को मुख्यमंत्री पद के लिए भाजपा की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि कार्यवाहक मुख्यमंत्री को मीडिया से बातचीत करते हुए देख चिंतित महसूस कर रहा हूं. उन्होंने भाजपा को चुनौती देते हुए कहा कि वह महाराष्ट्र में सरकार बनाकर दिखाएं. 

देवेंद्र फडणवीस के आरोपों पर पलटवार करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि मुझे फडणवीस जी से ऐसी उम्मीद बिल्कुल नहीं थी वे झूठ बोलेंगे. उन्होंने कहा कि मैं उन्हें बता देना चाहता हूं कि शिवसैनिक अपने वचन के पक्के होते हैं. शिवसेना के लोग कभी किसी से झूठ नहीं बोलते हैं. उद्धव ठाकरे ने कहा कि मैंने बालासाहेब ठाकरे से वादा किया था कि एक दिन शिवसेना का मुख्यमंत्री होगा और इस वादे को मैं पूरा करूंगा. इस वादे को पूरा करने के लिए मुझे अमित शाह और देवेंद्र फडणवीस की जरूरत नहीं.

इससे पहले देवेंद्र फडणवीस ने राज्यपाल को इस्तीफा सौंपा और इसके बाद एक प्रेस कांफ्रेंस कर शिवसेना पर जमकर निशाना साधा. देवेंद्र फडणवीस ने शिवसेना के 50-50 फार्मूले पर अपना रुख साफ करते हुए लिखा कि चुनाव से पहले इस तरह की कोई भी बातचीत शिवेसना के साथ नहीं हुई थी. उन्होंने कहा कि भाजपा और शिवसेना ने विधानसभा चुनाव साथ-साथ लड़ा. लेकिन चुनाव के बाद परिस्थितियां बदल गईं. फडणवीस ने इसे जनता के फैसला का अपमान बताते हुए कहा कि चुनाव के बाद शिवसेना ने हमसे संपर्क नहीं किया, लेकिन वह कांग्रेस और एनसीपी के साथ चर्चा की. फडणवीस के अनुसार चुनाव संपन्न होने के बाद शिवसेना की तरफ से भाजपा और भाजपा के शीर्ष नेताओं के लिए कई बयान दिए गए. जोकि स्वागत योग्य नहीं हैं. उन्होंने कहा कि भाजपा ने शिवसेना के खिलाफ टिप्पणी नहीं की क्योंकि पार्टी और पार्टी के नेता बाला साहेब ठाकरे का सम्मान करते हैं. 

एक तरफ देवेंद्र फडणवीस की प्रेस कांफ्रेंस जारी थी तो दूसरी तरफ शिवसेना के प्रवक्ता मीडिया के बीच उनके इस बयान की सफाई देते हुए नजर आए. संजय राउत ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि 50-50 फार्मूले की बात शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे और अमित शाह के बीच हुई थी. इस दौरान पत्रकारों ने सवाल दागा कि नितिन गडकरी भी सीट बंटवारे को लेकर साफ कर चुके हैं कि शिवसेना के साथ कोई बातचीत नहीं हुई थी, तो राउत ने कहा कि यह बात जिस बैठक में हुई थी, उसमें नितिन गडकरी शामिल नहीं थे.

इस दौरान उन्होंने शिवसेना के भाजपा के शीर्ष नेताओं पर आपत्तिजनक बयान देने पर भी सफाई पेश की और कहा कि हम भाजपा के शीर्ष नेताओं का सम्मान करते हैं शिवसेना ने किसी तरह का बयान नहीं दिया. पहले गडकरी और बाद में देवेंद्र फडणवीस के बयानों से संकेत मिलता है कि सहयोगी शिवसेना के साथ मुख्यमंत्री पद को साझा नहीं करने के भाजपा के कड़े रुख में कोई नरमी नहीं आई. शिवसेना महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री पद साझा करने की अपनी मांग पर शुक्रवार को भी अड़ी रही और उसने भाजपा से राज्य की सत्ता में बने रहने के लिए कार्यवाहक सरकार के प्रावधान का दुरुपयोग नहीं करने को कहा.

शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने कहा कि भाजपा को शिवसेना के पास तभी आना चाहिए जब वे महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री का पद अपनी सहयोगी पार्टी के साथ साझा करने के लिए तैयार हो. शिवसेना प्रवक्ता ने बातचीत में कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को इस्तीफा दे देना चाहिए क्योंकि मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल (नौ नवंबर को) समाप्त हो रहा है. राज्यसभा सदस्य ने कहा कि भाजपा को कार्यवाहक प्रावधान को नहीं खींचना और परदे के पीछे से काम नहीं करना चाहिए. हमें बुरा नहीं लगेगा अगर भाजपा सबसे बड़े दल के रूप में सरकार बनाने का दावा पेश करती है और सरकार बनाती है. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



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