भारतीय रेलवे बोर्ड द्वारा पेश किया गया वर्ष 2019 में किये गए कार्यों का लेखा जोखा

भारतीय रेलवे द्वारा वर्ष 2019 में किये गए कार्यों का लेखा जोखा पेश करते हुए रेलवे बोर्ड अध्यक्ष ने कहा कि इस साल सबसे ज्यादा ध्यान सेफ्टी पर दिया गया है जिसके अंतर्गत पटरियों की मरम्मत, इलेक्ट्रिफिकेशन, एलएचबी कोच से लेकर रख-रखाव पर काफी काम किये गए। ये उसी का नतीजा है कि इससे न सिर्फ डीजल पर निर्भरता कम हुई बल्कि रेल दुर्घटनाओं पर भी लगाम लगाया जा सका और रेलगाड़ियों के टाइम टेबल में सुधार हुआ है।  

इंफ्रास्ट्रक्टर डेवलपमेंट में भी पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष 20 फीसदी ज्यादा काम हुआ। नैरो गेज और स्टैण्डर्ड गेज लाइन को भी ब्रॉड गेज में बदलने की स्पीड 15 प्रतिशत से ज्यादा रही। फुट ओवर ब्रिज और रेल ओवर ब्रिज के निर्माण में 44 फीसदी का ग्रोथ रहा। उन्होंने कहा कि स्वछता के मद्देनज़र 98 प्रतिशत रेलगाड़ियों में बायो टॉयलेट्स लगाए जा चुके है और बाकि का काम मार्च 2020 तक पूरा कर लिया जायेगा।

यात्री सुरक्षा के लिए रेलवे ने नए कॉनकोर्स कमांडो को तैनात किया है साथ ही 500 रेलवे स्टेशनों सीसीटीवी कैमरा लगाए गए है। वहीँ खान-पान की सुविधाओं में इज़ाफ़ा करते हुए नए रेल नीर प्लांट लगाए गए है जिनसे अब रोजाना 9 लाख बोतल पानी की सप्लाई होती है। साथ ही यात्रियों के लिए गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने के लिए आईआरसीटीसी ने मेगा किचन की शुरुआत की है जिसकी 24 घंटे सीसीटीवी के जरिये लाइव मॉनिटरिंग की जा सकती है।  

पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए रेल के लगभग सभी टेंडर को ऑनलाइन कर दिया गया है। इसरो की मदद से फ़िलहाल 60 फीसदी रेलगाड़ियों की रियल टाइम ट्रेन इनफार्मेशन मिल रही है। सोलर प्लांट लगाने से लेकर देश भर के सभी स्टेशनों पर LED लाइट्स लगा दिए गए है। 5500 स्टेशनों पर wifi की सुविधा उपलब्ध कराई गयी है। डीएफसी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसके पूरा हो जाने के बाद दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-कोलकाता के बीच यात्रिओं की मांग के अनुसार नई रेलगाड़ियां चलाने का प्लान है ताकि वेटिंग लिस्ट को शून्य पर लाया जा सके।

वहीँ यात्री किराये और रेलवे के निजीकरण के सवाल पर उन्होंने कहा भारतीय रेलवे यात्री किराये में कोई बदलाव नहीं करने जा रही है न ही रेलवे को निजी हाथों में सौपने का कोई प्लान है। कैडर रिस्ट्रक्चरिंग को जरुरी बताते हुए उन्होंने कहा कि इससे किसी भी रेल अधिकारी या कर्मचारी को कोई नुकसान नहीं है बल्कि इससे रेलवे की कार्य कुशलता में और इज़ाफ़ा होगा।  

 



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