मुठभेड़ में मारे गए हैदराबाद बलात्कार कांड के आरोपी

भाजपा सांसद ने हैदराबाद बलात्कार कांड के आरोपियों के मुठभेड़ में मारे जाने पर वाजिब सवाल उठाया है. उनकी बात से बहुत सारे लोग असहमत हो सकते हैं. लोकतंत्र में उनका अधिकार भी है. मेनका गांधी को ट्रोल भी किया जा रहा है. लेकिन उन्होंने कहा तो ठीक ही है कि आप लोगों को ऐसे नहीं मार सकते हैं. आप कानून को अपने हाथ में नहीं ले सकते हैं. कहां गलत हैं वे. इस तरह के मुठभेड़ों पर जश्न मनाने का मतलब है कि देश के संविधान और कानून पर सवाल खड़े करना. जो लोग इस मुठभेड़ को सही मान रहे हैं तो फिर तो सोहराबुद्दीन में मुठभेड़ में मार गिराया जाना ठीक था और इशरत जहां को भी मारना गलत नहीं था. इससे किसे इनकार है कि बलात्कारियों को सजा नहीं मिलनी चाहिए, जरूर मिलनी चाहिए. लेकिन कानून बना है इसके लिए. पुलिस के हाथ में बंदूक है तो इसका मतलब यह नहीं है कि वे अपने हाथ में कानून ले ले. हालात जो हैं उसे देखते हुए तो मुठभेड़ फर्जी ही लग रहा है.

तेलंगाना में बलात्कार कांड के चारों आरोपियों को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिरानया. तड़के या कहें कि रात के अंतिम पहर में मुठभेड़ हुआ. पुलिस के पास अपनी कहानी है. उसने कहानी बनाई है या सचमुच चारों आरोपी पुलिस के हथियार ले कर भाग रहे थे लेकिन सच यह है कि महिला वेटरनरी डॉक्टर के साथ बलात्कार और हत्या के आरोपियों को पुलिस ने मुठभेड़ में मार डाला. पुलिस का दावा है कि सभी आरोपी भागने की कोशिश कर रहे थे और इस दौरान पुलिस की ओर से हुई फायरिंग में सभी आरोपी मारे गए. पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मुठभेड़ तड़के तीन से छह बजे के बीच हुआ. मिली जानकारी के मुताबिक अदालत में चार्जशीट दाखिल करने के बाद पुलिस इन चारों आरोपियों को घटनास्थल पर ले गई थी ताकि 'सीन ऑफ क्राइम' (रिक्रिएशन) की पड़ताल की जा सके. लेकिन उनमें से एक आरोपी ने पुलिस वालों का हथियार छीन कर भागने की कोशिश की.

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि अगर यह आरोपी भाग जाते तो बड़ा हंगामा खड़ा हो जाता इसलिए पुलिस के पास दूसरा कोई रास्ता नहीं था और जवाबी फायरिंग में चारों आरोपी मारे गए. इन चार आरोपियों की जिनकी उम्र 20 से 26 साल के बीच थी. चारों ने महिला डॉक्टर को 28 अक्तूबर को टोल बूथ पर स्कूटी पार्क करते देखा था. आरोप है कि इन लोगों ने जानबूझकर उसकी स्कूटी पंक्चर की थी. इसके बाद मदद करने के बहाने उसका एक सुनसान जगह पर गैंगरेप किया और बाद में पेट्रोल डालकर जला डाला. पुलिस के मुताबिक घटना से पहले इन लोगों ने शराब भी पी रखी थी. बलात्कार और हत्या की इस घटना के बाद पूरे देश में गुस्सा था और इस मामले की सुनवाई के लिए फॉस्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया गया था. 

इस मुठभेड़ के बाद लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रिया देखने की मिल रही है. मानवाधिकार कार्यकर्ता और वकील वृंदा ग्रोवर ने सवाल उठाया है. उन्होंने कहा कि वह सभी के लिए न्याय चाहती हैं लेकिन इस तरह नहीं होना चाहिए था. वहीं इसी मुद्दे पर अनशन पर बैठीं दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने कहा कि जो हुआ अच्छा है कम से कम वह सरकारी मेहमान बनकर नहीं रहेंगे जैसा कि दिल्ली के निर्भया केस में हुआ. 

भाजपा की सांसद मेनका गांधी ने कहा कि वहां जो हुआ वह बहुत भयानक हुआ इस देश के लिए. आप लोगों को ऐसे नहीं मार सकते हैं. आप कानून को अपने हाथ में नहीं ले सकते हैं. मेनका गांधी ने कहा कि वे आरोपी थे और वैसे भी कोर्ट से उसे फांसी की सजा मिलती. उन्‍होंने कहा कि ऐसा होने लगे तो फिर फायदा क्‍या है कानून का, फायदा क्‍या है सिस्‍टम का. मेनका ने कहा कि इस तरह तो अदालत और कानून का कोई फायदा ही नहीं, जिसको मन हो बंदूक उठाओ जिसको मारना हो मारो. कानूनी प्रक्रिया में गए बिना आप उसे मार रहे हो तो फिर कोर्ट, कानून और पुलिस का क्‍या औचित्‍य रह जाएगा. लेकिन भाजपा की ही दूसरी सांसद मीनाक्षी लेखी ने कहा कि जो भी हुआ वह बिल्‍कुल ठीक हुआ.

लोकसभा में मुठभेड़ पर बहस के दौरान मीनाक्षी लेखी ने कहा कि पुलिस के पास हथियार सजाकर रखने के लिए नहीं है. उन्‍होंने कहा कि आप अपराध भी करेंगे और हथकड़ी खोलकर भागने का प्रयास भी करेंगे. पुलिस के पास हथियार सजाकर रखने के लिए नहीं है, वह क्‍या करती. मीनाक्षी लेखी ने कहा कि निर्भया वाले मामले में दिल्‍ली की सरकार ने फैसला लेने के लिए फाइल महीनों दबाकर रखी. हालांकि उनके तर्क से सहमत नहीं हुआ जा सकता. वे संसद में बोल रहीं थीं तो इसका मतलब मुठभेड़ों को तो सही ठहरा ही रहीं थीं, पुलिस को ऐसा करने से उकसा भी रहीं थीं. उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पुलिस को ठोक देने के आदेश के बाद किस-किस तरह मुठभेड़ के नाम पर लोगों को मारा गया है उसकी लंबी सूची है. मीनाक्षी लेखी ने इस बहाने दिल्ली सरकार पर हमला किया लेकिन यह नहीं बताया कि भाजपा अपने विधायक सेंगर को बचाने में लगी रही या फिर चिन्मयानंद को बचाने के लिए क्या-क्या तरीके ढूंढे गए.

वैसे दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सधा हुआ बयान दिया. उन्होंने कहा कि उन्‍नाव हो या हैदराबाद, बलात्कार के मामले पर फैसले में हो रही देरी के कारण लोगों में गुस्सा है, इसलिए लोग मुठभेड़ पर खुशी व्यक्त कर रहे हैं. जिस तरह से लोगों का विश्‍वास आपराधिक न्याय प्रणाली पर से उठता जा रहा है, वह चिंता का विषय है. आपराधिक न्याय प्रणाली को मजबूत करने के लिए सभी सरकारों को एक साथ मिलकर कार्रवाई करनी होगी. इसी एनकाउंटर को लेकर समाजवादी पार्टी के सांसद जया बच्‍चन ने कहा कि देर आए दुरूस्‍त आए. तेलंगाना बलात्कार कांड पर संसद में बहस के दौरान जया बच्‍चन ने कहा था कि ऐसे लोगों को भीड़ के हवाले कर देना चाहिए ताकि उनकी लिंचिंग हो जाए. बहस के दौरान कई और सांसदों ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्‍यक्‍त की थी और कहा था ऐसे मामले का निपटारा तुरंत होना चाहिए ताकि समाज में नजीर पेश हो सके, ऐसे घृणित काम करने की सोच रखने वाले लोगों के मन में डर बैठ सके. मुठभेड़ के बाद अभी इस पर बहसें होंगी. लेकिन पुलिस ने जिस तरह का तर्क दिया है वह बहुतों के गले नहीं उतरेगा. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



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