दूध पीती बच्ची के मां-बाप जेल में, सीएए के खिलाफ कर रहे थे प्रदर्शन

यूपी में पुलिस की निरंकुशता और बर्बरता के किस्सों से सोशल मीडिया भरा पड़ा है. सामाजिक संगठन और सियासी दल पुलिस पर लगातार आरोप लगा रहे हैं कि उसने सीएए और नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों पर न सिर्फ डंडे बरसाए, बल्कि गोलियों से भी कइयों की जान ले ली. घरों में लूटपाट करने, सामजिक कार्यकर्ताओं को कानूनी सहायता लेने से रोकने के लिए भी पुलिस पर इल्जाम लगा. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के साथ पुलिस की बदसलूकी की शिकायत की. यूपी में नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के मामले में अब तक एक हज़ार से ज़्यादा लोग गिरफ़्तार किए जा चुके हैं. गिरफ़्तार लोगों में वाराणसी के रवि शेखर और उनकी पत्नी एकता भी हैं. दोनों को जेल भेज दिया गया है नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ 19 दिसंबर को हुए प्रदर्शन में वाराणसी में भी प्रदर्शन हुआ था. शहर के एक अलग हिस्से में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की लाठी चार्ज से कथित तौर पर भगदड़ मचने से एक आठ वर्षीय लड़के की मौत हो गई थी.

प्रदर्शन के बाद से ही पुलिस की ज़्यादती की तस्वीरें सामने आ रही हैं. लोगों का कहना है कि पुलिस ने ऐसे लोगों को भी गिरफ्तार किया है जो शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल थे और उसके हिंसक होने की उम्मीद उन्हें भी नहीं थी. रवि शेखर और उनकी पत्नी एकता पर्यावरण के मुद्दों पर काम करते हैं और वाराणसी की सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहते हैं. रवि के घर वालों का कहना है कि वाराणसी में महमूरगंज के रहने वाले रवि और एकता अपनी मासूम बच्ची को उसकी दादी और बड़ी मम्मी के हवाले करके प्रदर्शन में शामिल होने गए थे. रवि की बुज़ुर्ग मां शीला तिवारी के मुताबिक मेरे बेटे ने कोई गुनाह नहीं किया है. समझ में नहीं आ रहा है कि पुलिस ने उन्हें क्यों गिरफ्तार किया. दोनों शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे थे और इस तरह के कार्यक्रमों में अक़्सर दोनों जाते रहते हैं. अब यह छोटी सी दुधमुंही बच्ची बिना मां के रह रही है. हम लोग उसकी देखभाल कर रहे हैं लेकिन इतनी छोटी बच्ची बिना मां के कैसे रह पाएगी, आप ख़ुद ही सोच सकते हैं.

रविशेखर और एकता को बेनियाबाग इलाक़े में प्रदर्शन के दौरान ये कहते हुए हिरासत में लिया गया था कि वे धारा 144 का उल्लंघन कर रहे हैं. रवि के बड़े भाई शशिकांत ने कहा कि ये साठ सत्तर लोगों के समूह के साथ उधर मार्च कर रहे थे. पुलिस ने जब रोका तो सबने गिरफ़्तारी दे दी. उस वक़्त कहा गया कि शांतिभंग में चालान करके वापस भेज दिया जाएगा. लेकिन दो दिन तक बैठाए रखा गया और फिर 21 दिसंबर को कई धाराओं में एफ़आईआर करके जेल भेज दिया गया. धाराएं भी कोई गंभीर नहीं हैं, फिर भी ज़मानत नहीं मिल पाई. रविशेखर और एकता के साछ 54 नामज़द और कुछ अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ 332, 353, 341 जैसी धाराओं में मुक़दमे दर्ज किए गए हैं. शशिकांत कहते हैं कि उन लोगों के सामने एक ओर इन दोनों की ज़मानत कराने की समस्या है तो दूसरी ओर छोटी बच्ची को संभालने की.

शीला तिवारी कहती है कि उनकी पोती कुछ खा-पी भी नहीं रही है ठीक से. मां-बाप की तस्वीर की ओर देखकर उन्हें पुकारती है. झूठा दिलासा देते हैं हम लोग कि तुम्हारे मम्मी-पापा ऑफ़िस गए हैं, अभी आ जाएंगे. हालांकि वाराणसी पुलिस का कहना है कि जो भी लोग गिरफ़्तार किए गए हैं, उनके ख़िलाफ़ हिंसा भड़काने के पर्याप्त साक्ष्य हैं. वाराणसी के ज़िलाधिकारी कौशलराज शर्मा के मुताबिक जिन्हें भी गिरफ़्तार किया गया है, उसके पर्याप्त आधार हैं. ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से लोगों के इकट्ठा होने की वजह से शहर में तनाव बढ़ गया था. तमाम तरह के भड़काऊ नारे लिखे हुए पोस्टर मिले हैं.

नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भी लोगों ने बढ़ चढ़कर प्रदर्शन किया था. बेनियाबाग इलाक़े में हज़ारों की संख्या में लोग जब सड़क पर उतरे तो अचानक हालात बेक़ाबू होने लगे और पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने दौड़ा-दौड़ा कर पीटा जिससे काफ़ी देर तक अफ़रा-तफ़री मची रही. हालांकि रवि शेखर के परिजनों के मुताबिक, उन लोगों को हंगामे से पहले ही हिरासत में ले लिया गया था.

प्रदर्शन के दौरान पुलिस की बर्बरता के साथ हिंसक प्रदर्शन की कई तस्वीरें सामने आईं लेकिन इसमें से यह कहानी परेशान करने वाली है. रवि और उनकी पत्नी एकता ने चौदह महीने की बच्ची आर्या है जो पिछले दो हफ़्ते से अपने मां-बाप का इंतज़ार कर रही है. ऐसे में दोनों के घरवालों पर दोहरी ज़िम्मेदारी आ गई है. एक तो रवि और एकता की ज़मानत लेने की कोशिश दूसरी इस छोटी बच्ची को संभालने की. रवि शेखर की मां शीला तिवारी ने कहा, मेरे बेटे ने कोई गुनाह नहीं किया है. पुलिस ने उन्हें क्यों गिरफ्तार किया. वह शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे थे. क्या आप सोच सकते है कि बच्ची बिना अपनी मां के रह रही है. क्या क्राइम को कंट्रोल करने का यह तरीका है. गिरफ्तार हुए रवि की मां ने यह भी कहा की वे कुछ खा नहीं रही. बमुश्किल से कुछ चम्मच हमने उसे खिलाया. वह पूरे समय कह रही है कि अम्मा आओ, पापा आओ'. हम लगातार उससे कह रहे हैं कि वह जल्दी आ जाएंगे, लेकिन मुझे नहीं मालूम क्या करना चाहिए. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



Post a comment