यशवंत सिन्हा ने नरेंद्र मोदी और अमित शाह को टुकड़े-टुकड़े गैंग का बताया दुर्योधन और दुशासन

नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा ने अलग राह पकड़ ली थी. भाजपा में रहते हुए उन्होंने नरेंद्र मोदी और उनके कामकाज के तरीके पर लगातार सवाल उठाया. भाजपा ने हालांकि उनके बयानों पर बहुत तवज्जो तो नहीं दी लेकिन यशवंत सिन्हा ने पार्टी को कई बार मुश्किल मे डाला और नेताओं को असहज किया. यशवंत सिन्हा ने इस बार नरेंद्र मोदी पर बहुत सख्त बयान दिया है. दरअसल यशवंत सिन्हा ने गृहमंत्री अमित शाह पर उनके टुकड़े-टुकड़े वाले बयान को लेकर बहुत सख्त लहजे में बात कही है.

उन्होंने कहा कि भारत की सबसे खतरनाक टुकड़े-टुकड़े गैंग में सिर्फ दो लोग हैं, दुर्योधन और दुशासन. वे दोनों भाजपा में हैं उनसे सतर्क रहें. नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शनों में हुई हिंसा को लेकर अमित शाह ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्हें टुकड़े-टुकड़े गैंग का सदस्य बताया था. शाह ने एक समारोह में कहा था कि दिल्ली की टुकड़े-टुकड़े गैंग को सबक सिखाया जाना चाहिए. गृहमंत्री ने कहा कि कांग्रेस पार्टी की नेतृत्व में टुकड़े-टुकड़े गैंग जो दिल्ली की अशांति के लिए जिम्मेदार है, इसको दंड देने का समय आ गया है. दिल्ली की जनता को इन्हें दंड देना चाहिए.

अमित शाह ने दिल्ली के कड़कड़डूमा में आयोडित एक कार्यक्रम में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर खूब तंज कसे थे. शाह ने कहा था कि करीब 60 महीने होने को आए हैं केजरीवाल जी को मुख्यमंत्री बने, आज से पहले सारे वादे पूरे क्यों नहीं किए. अभी भी ये वादे पूरे नहीं होने वाले हैं, सिर्फ विज्ञापन देकर ये लोगों को झांसा दे रहे हैं. इन्होंने जीवन में सिर्फ विरोध करने और धरना देने का काम किया है. केजरीवाल जी ने प्रधानमंत्री आवास योजना का फायदा गरीब लोगों को इसलिए नहीं पहुंचाया, क्योंकि उस योजना के आगे प्रधानमंत्री नाम जुड़ा है. केजरीवाल जी ने भले ही काम नहीं होने दिया.

यशवंत सिन्हा जो कि वाजपेयी सरकार में वित्त और विदेश मंत्री रह चुके हैं भाजपा से इस्तीफा देने का बाद अब मोदी के कट्टर आलोचक बन गए हैं. वे लोकसभा चुनाव से पहले ही सरकार की नीतियों की आलोचना करते रहे हैं और कोलकाता में ममता बनर्जी की ओर से आयोजित विपक्ष की रैली में उन्होंने मोदी पर जमकर निशाना साधा था. यशवंत सिन्हा ने आर्थिक सुस्ती पर भी केंद्र सरकार को निशाने पर लिया था और कहा था कि देश की अर्थव्यवस्था बेहद गंभीर संकट में घिर चुकी है और मांग निचले स्तर पर है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अपनी बड़ी-बड़ी बातों से लोगों को यह कहकर बेवकूफ बना रही है कि अगली तिमाही में नतीजे बेहतर होंगे या उसकी अगली तिमाही में नतीजे बेहतर आएंगे. हाल ही में जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, दूसरी तिमाही में जीडीपी विकास दर साढ़े चार फीसद पर पहुंच गई, जो साढ़े छह साल के निचलाे स्तर पर है.

उन्होंने कहा कि यह बात कोई मायने नहीं रखती कि सत्ता में बैठे लोग क्या कहते हैं, सच्चाई तो यही है कि हम बेहद गंभीर संकट में फंस चुके हैं. सिन्हा ने कहा कि जो लोग यह बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं कि अगली तिमाही में नहीं तो उसकी अगली तिमाही में नतीजे बेहतर होंगे, ऐसा वास्तव में होने नहीं जा रहा है. वे अगली तिमाही में नतीजे बेहतर होंगे जैसी बातें कहकर लोगों को बेवकूफ बनाने की कोशिश कर रहे हैं. पूर्व वित्त मंत्री ने कहा था कि इस तरह का संकट हल होने में तीन से चार साल और यहां तक कि पांच साल का वक्त भी लग जाता है. इसे जादू की छड़ी घुमाकर ठीक नहीं किया जा सकता है.

उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की फिलहाल जो स्थिति है, उसे 'डेथ ऑफ डिमांड' कहते हैं और यह कृषि और ग्रामीण क्षेत्र से शुरू होती है. सिन्हा से कहा कि अर्थव्यवस्था में कोई मांग नहीं है और यह संकट की शुरुआत है. सरकार को कम से कम किसानों, ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के साथ जो हो रहा है, उसके बारे में तो चिंता करनी चाहिए, जहां से मांग खत्म होने की शुरुआत होती है.'(राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



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