झारखंड में नहीं चले ओवैसी और वोट कटवा बन कर रह गई उनकी पार्टी

बिहार के उपचुनाव में किशनगंज विधानसभा सीट निकालने के बाद ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिममीन (एआइएमआइएम) पार्टी हवा में उड़ रही थी. उसे लगने लगा कि अब तो वह उत्तर भारत में अपने झंडे गाड़ ही डालेगी. हालांकि किशनगंज सीट भी उसे कांग्रेस की वजह से ही मिली है. कांग्रेस ने अगर बेहतर उम्मीदवार दिया होता तो असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी सीट नहीं निकाल पाती. लेकिन कांग्रेस ने उसे तोहफे में सीट दी और असदुद्दीन ओवैसे हवा में उड़ने लगे. झारखंड भी पूरे लाव-लश्कर और गाजे-बाजे के साथ पहुंचे. उम्मीदवार भी उतारा. लेकिन झारखंड की अवाम ने उन्हें सिरे से नकार दिया. दरअसल ओवैसी पर भाजपा के साथ सांठगांठ के आरोप लगते रहे हैं. उन्हें लेकर यह कहा जाता रहा है कि वे भाजपा को मदद करने के लिए उम्मीदवार खड़ा करते हैं. इन आरोपों के बावजूद उत्तर भारत के कई राज्यों में वे चुनाव लड़ रहे हैं. लेकिन नतीजा अभी तक तो सिफर ही रहा है.

असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआइएमआइएमझारखंड में वोटकटवा साबित हुई. ओवैसी ने जिन ग्यारह विधानसभा क्षेत्रों पर उम्मीदवार उतारा, वहां उसे नोटा के बराबर मत (1.36) भी हासिल नहीं हो सका. संबंधित सीटों पर झारखंड की जनता ने उसे महज 1.16 फीसद मत ही दिया. ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि एआइएमआइएम की चुनावी रैली में उमड़ी भीड़ को वोट में तब्दील करने में ओवैसी सफल नहीं हुए. एआइएमआइएम ने गढ़वा, विश्रामपुर, हजारीबाग, बरकट्ठा, बोकारो, मधुपुर, डुमरी, धनवार, सारठ, जमशेदपुर पश्चिमी और राजमहल से उम्मीदवार उतारा था. उसने लातेहार, लोहरदगा, रांची, और जमशेदपुर पूर्वी से भी उम्मीदवार खड़ा किया था, लेकिन तकनीकी गड़बडिय़ों के कारण संबंधित सीटों के नामांकन रद्द हो गया था. 

ओवैसी की पार्टी एआइएमआइएम को डुमरी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में सर्वाधिक 24,132 मत मिले थे, जबकि राजमहल में सबसे कम 862 मत मिला. उसे गढ़वा में 6,221, हजारीबाग में 8,919, बोकारो में 5,401, मधुपुर में 9,866, सारठ में 12,830, बरकट्ठा में 18,416 व जमशेदपुर पश्चिमी में 8,005 वोट मिले. वोटों के मामले में संबंधित सीटों पर जीत के अंतर पर गौर करें, तो ओवैसी की पार्टी प्रतिद्वंद्विता में दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे उम्मीदवारों को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचाने में सफल नहीं रही. एकाध सीट पर उसने जरूर प्रभाव डाला लेकिन ज्यादातर सीटों पर उसने उम्मीदवार खड़ा तो किया लेकिन जमानत बचाने के भी लाले पड़ गए.

निर्वाचन आयोग की ओर से विधानसभावार जारी आंकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि विश्रामपुर में ओवैसी की पार्टी को 6.14 फीसद मत हासिल हुआ था. जबकि, यहां उपविजेता रहे बीएसपी के राजेश मेहता को विजयी उम्मीदवार रामचंद्र चंद्रवंशी से 4.52 फीसद कम मत मिले थे. अगर एआइएमआइएम को मिले मत उप विजेता के पक्ष में स्थानांतरित होती, तो स्थिति बदल सकती थी. इसी तरह, धनवार में 14.5 फीसद मत ओवैसी की पार्टी को मिले थे. यहां विजेता और उप विजेता के बीच जीत का अंतर 9.25 फीसद मतों से रहा. यहां ओवैसी की पार्टी को मिले मत उपविजेता के पक्ष में स्थानांतरित हो जाने से विजेता की परेशानी बढ़ सकती थी.(राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



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