एनआरसी और एनपीआर पर जारी है रार, सरकार को घेरने में लगा है विपक्ष

रामलीला मैदान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण के बाद से ही सरकार बैकफुट पर है. बचाव में भाजपा भी आगे आई और सरकार भी. गृह मंत्री अमित शाह से लेकर आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद तक ने सरकार का पक्ष रखा. लेकिन विपक्ष सरकार के झूठ को लेकर हमलावर है. अमित शाह ने एनआरसी और एनपीआर पर सफाई दी तो विपक्ष ने उन्हें भी घेरा. विपक्ष के तेवर से लग रहा है कि वह सरकार को बख्शने के मूड में नहीं है. राष्ट्रीय लोक समता पार्टी एनआरसी, एनपीआर और सीएए के खिलाफ पूरे बिहार में समझो-समझाओ, देश बचाओ यात्रा कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ हल्ला बोल रही है. पार्टी प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा इसके खतरे से लोगों को आगाह करने के लिए यात्रा पर निकल कर लोगों को समझा रहे हैं कि इसके पीछे केंद्र की साजिश क्या है. वे केंद्र सरकार पर भी हमलावर हैं और संसद में सीएए का साथ देने वाले नीतीश कुमार पर भी. वे अपनी सभाओं में लोगों से सवाल भी करते हैं और सवालों का जवाब भी देते हैं.

दूसरी तरफ, देश में डिटेंशन सेंटर नहीं होने से जुड़े नरेंद्र मोदी के कथित बयान को लेकर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने उन पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि आरएसएस के प्रधानमंत्री भारत माता से झूठ बोलते हैं. असम में डिटेंशन सेंटर से जुड़ी एक खबर शेयर करते हुए गांधी ने ट्वीट किया कि आरएसएस के प्रधानमंत्री भारत माता से झूठ बोलते हैं. मोदी ने दिल्ली के रामलीला मैदान में एक रैली में कहा था कि देश में डिटेंशन सेंटर को लेकर फैलाई जा रही अफवाहें सरासर झूठ हैं. कांग्रेस नेता ने जो खबर शेयर की है उसके मुताबिक असम में हिरासत केंद्र मौजूद है.

उस रैली को संबोधित करते हुए मोदी ने विपक्ष पर ‘बांटो और राज करो' के आधार पर लोगों के बीच डर फैलाने और संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) को लेकर हिंसा को बढ़ावा देने का आरोप लगाया. उन्होंने व्यापक प्रदर्शन के बीच इस विषय से जुड़ी चिंताओं को दूर करने की कोशिश करते हुए कहा कि इस कानून का और एनआरसी का भारतीय मुसलमानों से कोई लेना देना नहीं है. इस संशोधित नागरिकता कानून का पुरजोर बचाव करते हुए प्रधानमंत्री ने एक विशाल रैली को संबोधित करते हुए कहा कि यह कानून पड़ोसी देशों (पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश) में धार्मिक आधार पर प्रताड़ित हुए अल्पसंख्यकों को सुरक्षा देने के लिए है और यह किसी व्यक्ति के अधिकारों को नहीं छीनेगा. लेकिन सरकार के बयानों को वायरल कर मोदी को गलत साबित करने में विपक्ष जुटा है.

नागरिकता संशोधन कानून हो या एनआरसी या फिर एनपीआर इसे लेकर सरकार बैकफुट पर है. सरकार कुछ बोलती है, भाजपा कुछ बोलती है. यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुले आम एनआरसी और डिटेंशन सेंटर को लेकर दिल्ली की सभा में कुछ और बोलते हैं, तो गृहमंत्री अमित शाह संसद में इन मुद्दों पर ही साफ कहते हैं कि एनआरसी लागू होगा. डिटेंशन सेंटर पर संसद में सरकार का बयान भी सार्वजनिक किया जा रहा है. भाषणों के वीडियो भी चलाए जा रहे हैं. किसने कब क्या कहा और जाहिर है इन सबके बीच विपक्ष प्रधानमंत्री पर झूठ बोलने और गुमराह करने का आरोप लगा रहा है. इसमें गलत भी नहीं है कुछ.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रामलीला मैदान में दिए भाषण के बाद सरकार ने सफाई दी फर अमित शाह ने अपना इंटरव्यू प्रायोजित करवाया. लेकिन इस इंटरव्यू ने सरकार को और फंसा डाला. एनपीआई और एनआरसी को लेकर उनके बयान पर विपक्ष हमलावर है. गृह मंत्री अमित शाह भले ही कह रहे हैं कि एनपीआर का एनआरसी से कोई लेना-देना नहीं हैं, लेकिन उनकी ही सरकार ने संसद में एक-दो बार नहीं, बल्कि नौ बार एनपीआर और एनआरसी के लिंक जोड़े हैं. आठ जुलाई, 2014 को तत्कालीन केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरेन रिजीजू ने राज्यसभा में कांग्रेस सांसद के सवाल के जवाब में कहा था कि एनपीआर की समीक्षा की जा रही है और इसके ज़रिए नागरिकता की स्थिति का सत्यापन किया जाएगा. फिर 15 जुलाई को दोबारा लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान रिजीजू ने अपने इस बयान को दोहराया था. खुद गृहमंत्री अमित शाह राज्यसभा में कह चुके हैं कि एनपीआर एनआरसी की दिशा में पहला क़दम है. 

ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि कौन सा दावा कितना सच्चा है. सरकार का दावा है कि एनपीआर और एनआरसी में संबंध नहीं. केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने अमित शाह के इंटरव्यू के बाद सफाई दी लेकिन सच यह है कि सरकार एनपीआर डेटा की मदद से एनआरसी बनाएगी, संसद में इसका उल्लेख नरेंद्र मोदी सरकार ने ही जुलाई, 2014 में किया था. एक साल बाद यानी जुलाई, 2015 में संसद में ही सरकार की तरफ से कहा गया कि यह तय किया गया है कि एनपीआईआर को उसके अंतिम अंजाम एनआरसी तक पहुंचाया जाएगा. सरकारी नियम की बात करें तो एनसीआईआर तैयार करने की पहली कड़ी है एनपीआर. सरकार ने यह दावा भी किया कि एनपीआर के लिए किसी तरह के दस्तावेज की जरूरत नहीं है.

प्रकाश जावेड़कर ने ही सरकार की तरफ से यह दावा किया था. बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस कर उन्होंने यह पक्ष रखा. लेकिन सच इसके उलट है. एनआरसी के लिए नागरिकता के दस्तावेज़ देने होंगे जो एनपीआर का दूसरा चरण है. सरकार ने यह भी कहा कि एनपीआर यूपीए के दौरान 2010 में किया गया था, 2015 में इसे अपडेट किया गया. लेकिन सरकार का यह कहना गलत है. यूपीए ने एनआरसी के लिए एनपीआर के इस्तेमाल से इनकार कर दिया था.

अमित शाह ने अपने इंटरव्यू में कहा कि मैं स्पष्ट रूप से बता रहा हूं कि राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) के बीच कोई संबंध नहीं है. गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि पूरे देश में एनआरसी को लेकर अभी चर्चा करने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि इस पर अभी तक कोई विचार-विमर्श नहीं हुआ है. प्रधानमंत्री मोदी ने सही कहा था कि इसे लेकर अब तक न तो मंत्रिमंडल में कोई चर्चा हुई है और न हीं संसद में. अमित शाह ने कहा कि राजनीति के तहत एनपीआर का विरोध हो रहा है. उन्होंने कहा कि मैंने संसद में जो भी कहा था उसमें किसी भी नागरिक की नागरिकता लेने का प्रावधान नहीं है. अब लोग नागरिकता कानून को समझना शुरू कर चुके हैं. गृह मंत्री ने कहा कि एनपीआर को लेकर भी ऐसे हालत न बनाए जाएं, इसके लिए मैं पहले ही इंटरव्यू दे रहा हूं.

उन्होंने कहा कि कांग्रेस 2010 में एनपीआर शुरू कर चुकी है. कार्ड भी बांटे थे. हम उसे ही आगे बढ़ा रहे हैं. मैं देशवासियों से साफ करना चाहता हूं कि एनपीआर का डेटा का एनआरसी के लिए उपयोग नहीं होगा. हमनें एनपीआर के लिए ऐप बनाया है. जो जानकारी आप देंगे उसका सरकार रजिस्टर बनाएगी औऱ उसी के अनुसार सरकार विकास का कार्य करेगी. लोग चाहें तो आधार का नंबर दे सकते हैं. उन्होंने कहा कि हर दस साल में अंतरराज्य में जनता की उथल-पुथल काफी ज्यादा हो जाती है. इस उथल-पुथल को जाने बगैर राज्यों के विकास की योजना नहीं बनाई जा सकती है. इसके लिए इसकी जरूरत है. लेकिन सरकार के इन दावों में सच्चाई नहीं है. अमित शाह ने यूं तो कह डाला कि इसमें कोई सच्चाई नहीं है लेकिन खुद उनके बयान इसे गलत साबित करते हैं. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



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