महाराष्ट्र में सनातन संस्था पर पाबंदी लगा पाएंगे उद्धव ठाकरे

महाराष्ट्र में नई सरकार का गठन हो गया है. नई सरकार ने विश्वास मत भी हासिल कर लिया है. भाजपा सत्ता से बाहर हो गई है और अब नई सरकार के कई फैसले उसे या तो असहज कर सकते हैं या परेशानी में डाल सकते हैं. मंत्रिमंडल के विस्तार के बाद कई बड़े फैसले उद्धव ठाकरे की अगुआई वाली सरकार ले सकती है. वैसे आरे में मेट्रो कार शेड के निर्माण और इससे जुड़े मामले वापस लेकर उद्धव ठाकरे ने इस तरह के संकेत भी दिए हैं. कहा तो यह जा रहा है कि नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट बुलेट ट्रेन पर भी उद्धव ठाकरे अड़ंगा लगा सकते हैं. यानी महाराष्ट्र में सत्ता परिवर्तन होते ही बोतल में बंद पड़े मुद्दों को फिर से बाहर निकालने की मांग उठने लगी है.

कांग्रेस सांसद हुसैन दलवई ने सनातन संस्था पर पाबंदी के साथ जज लोया की संदिग्ध मौत की जांच फिर से कराने की मांग की है. सवाल यह है कि क्या उद्धव ठाकरे सनातन संस्था पर पाबंदी की मांग मंजूर करेंगे, या जस्टिस लोया की संदिग्ध मौत की फिर से जांच वे कराएंगे. सनानतन संस्थान पर आतंकवादी धमाकों के अलावा डॉ नरेंद्र दाभोलकर, कॉमरेड गोविंद पानसरे, लेखक एम कलबुर्गी और पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के आरोप हैं.

सीबीआई की विशेष अदालत के जज बीएच लोया सोहराबुद्दीन फर्जी एनकाउंटर मामले की सुनवाई कर रहे थे. नागपुर में एक शादी समारोह में शामिल होने गए थे लेकिन वहां उनकी संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी. यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया लेकिन पर्याप्त सबूत न होने की बात कहकर अदालत ने अर्जी खारिज कर दी थी. मालेगांव के 2008 के बम धमाके की जांच केंद्रीय एजेंसी के पास है लेकिन मामले में आरोपी नंबर एक सांसद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को एनआईए की क्लीन चिट पर भी सवाल उठना शुरू हो गए हैं. बोतल में बंद जिन्नों को बाहर निकालने की मांग कर एनसीपी और कांग्रेस भाजपा को घेरने की कोशिश में हैं लेकिन वे भूल जाते हैं कि शिवसेना भी कट्टर हिंदुत्ववादी पार्टी रही है.

राकांपा नेता और विधायक धनंजय मुंडे ने पुणे में भीमा-कोरेगांव हिंसा से संबंधित मामलों को वापस लिए जाने की मांग की है. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने नाणार रिफाइनरी परियोजना और आरे मेट्रो कारशेड प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामले वापस लिए जाने की घोषणा की थी. इस घोषणा के कुछ दिन बाद धनंजय मुंडे ने यह मांग की. भीमा-कोरेगांव युद्ध की वर्षगांठ के मौके पर आयोजित एलगार परिषद के सम्मेलन में दिए गए कथित भड़काऊ भाषण के एक दिन बाद पहली जनवरी, 2018 को पुणे जिले के भीमा-कोरेगांव गांव में हिंसा हो गई थी.

उद्धव ठाकरे को लिखे पत्र में धनंजय मुंडे ने दावा किया कि राज्य की पिछली देवेंद्र फडणवीस सरकार ने सामाजिक कार्यकर्ताओं समेत भीमा-कोरेगांव घटनाक्रम में शामिल लोगों के खिलाफ झूठे मामले दर्ज किए गए थे. मुंडे ने आरोप लगाया कि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने अन्याय के खिलाफ अपनी आवाज उठाने वाले बुद्धिजीवियों, कार्यकर्ताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों को 'प्रताड़ित' किया था और उनमें से कई को शहरी नक्सली बताया था.

उन्होंने उद्धव ठाकरे को लिखे एक पत्र में कहा कि मैं मामलों को वापस लेने का अनुरोध करता हूं. एलगार परिषद भीमा-कोरेगांव मामले के सिलसिले में पुणे पुलिस के कुछ कार्यकर्ताओं पर प्रतिबंधित कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) समेत नक्सली संगठनों से संबंध होने के आरोप लगाये थे. इन वामपंथी कार्यकर्ताओं के खिलाफ गैर कानूनी गतविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामले दर्ज किए गए थे. उद्धव ठाकरे इसे लेकर क्या फैसला लेंगे, देखना बाकी है.(राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



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