घर-घर रघुवर का नारा देने वाले रघुवर दास अपना घर भी नहीं बचा सके

Third party image reference

भाजपा का एक और किला ढह गया. चुनाव से पहले भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने 65 पार का नारा दिया था तो मुख्यमंत्री रघुवर दास ने घर-घर रघुवर का नारा उछाला था. लेकिन वही रघुवर दास घर-घर तो नहीं पहुंचे, अपना घर भी गंवा बैठे. अमित शाह का 65 पार का नारा, 25 सीटों तक आकर सिमट गया और झारखंड की अवाम ने एक स्पष्ट बहुमत देकर भाजपा को सत्ता से बाहर कर डाला. हालांकि भाजपा ने हर तरह के हथकंडे अपनाए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर अमित शाह ने चुनाव को हिंदू बनाम मुसलिम करने की हर मुमिकन कोशिश की लेकिन जनता ने उनकी सांप्रदायिक सोच को नकार कर महागठबंधन को सत्ता सौंप दी.

Third party image reference

झारखंड विधानसभा की 81 सीटों के लिए पांच चरणों में मतदान की गिनती में भाजपा को झामुमो-कांग्रेस गठबंधन ने फिर काफी पीछे छोड़ दिया है. गठबंधन को 47 सीटों पर जीत मिली है जबकि भाजपा के खाते में सिर्फ 25 सीटें मिलीं हैं. बड़ी बात है कि जनता ने पिछली बार की तरह त्रिशंकु जनादेश नहीं दिया है. हालांकि उम्मीद की जा रही थी कि झामुमो गठबंधन पचास के आंकड़े को पार कर लेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ. लेकिन 30 सीटों के साथ झामुमो सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी है. कांग्रेस को सोलह और राजद को एक ही सीट मिली है.झामुमो ने भाजपा को भी पछाड़ कर पांच साल बाद दोबारा सत्ता में वापसी की है. भाजपा के लिए सबसे शर्मनाक हार मुख्यमंत्री रघुवर दास की रही. वे अपनी ही पार्टी के पूर्व विधायक और बतौर निर्दलीय मैदान में उतरे सरयू राय से 17 हजार से ज्यादा वोटों से हार गए.

Third party image reference

चुनावी नतीजों से साफ है कि झारखंड की अवाम भाजपा सरकार से बेतरह खफा थी और उसने मुख्यमंत्री सहित पांच मंत्रियों को विधायकी से बेदखल कर डाला. कुछ नतीजे बेहद नजदीकी रहे और इसे लेकर देर तक कशमकश जारी रहा. जीत हार का समीकरण कई जगह तो सौ वोटों का है. झारखंड विधानसभा में बहुमत के लिए 41 सीटें चाहिए और गठबंधन ने 47 सीटों पर जीत दर्ज की है.नतीजों से अब साफ हो गया है कि मुख्यंत्री के नाम को लेकर कोई पसोपेश नहीं है. हेमंत सोरेन झारखंड के अगले मुख्यमंत्री होंगे. कांग्रेस ने नतीजों के बाद इसे साफ भी कर दिया कि राज्य में हमारे गठबंधन को पूर्ण बहुमत मिला है और हेमंत सोरेन के नेतृत्व में अगली सरकार बनेगी.

Third party image reference

कांग्रेस के झारखंड प्रभारी आरपीएन सिंह ने कहा कि हमने लोगों के जीवन को छूने वाले मुद्दे उठाते हुए चुनाव लड़ा. हमें विश्वास था कि हम सरकार बनाएंगे. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने असल मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिा की, लेकिन लोग उनके साथ नहीं गए. सिंह ने कहा कि हमने पहले ही घोषणा की है कि सोरेन मुख्यमंत्री बनेंगे. झारखंड के लिए कांग्रेस के समन्वयक अजय शर्मा ने कहा कि यह भाजपा के भ्रष्टाचार और अहंकार की हार है. उन्होंने कहा कि भाजपा ने उन भ्रष्ट उम्मीदवारों को टिकट दिया जिन्हें लोगों ने नकार दिया. कांग्रेस ने लोगों के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित रखा और आम आदमी की वह समस्याएं उठाई जिन्हें भाजपा हल करने में नाकाम रही.

Third party image reference

झारखंड विधानसभा चुनाव में विकास बनाम बदलाव के मुद्दे पर सभी पार्टियों ने जोर लगाया, लेकिन महागठबंधन सत्तापक्ष पर भारी पड़ा. सत्ता पक्ष ने केंद्रीय मुद्दों और विकास के आधार पर चुनाव लड़ा लेकिन जनता को यह रास नहीं आया. दूसरी तरफ विपक्षी महागठबंधन बदलाव के नाम पर मैदान में उतरा और सबको आकर्षित करने में सफल रहा, स्थानीय मुद्दों पर महागठबंधन ने जनता का विश्वास हासिल किया. पार्टियों के बीच आपसी एकता, समन्वय और सूझबूझ के आधार पर झामुमो, कांग्रेस और राजद ने बढ़त बनाने में सफलता हासिल की. झामुमो अपनी बदौलत सबसे बड़ी पार्टी बनी है. उसने तीस सीटों पर जीत हासिल की है.(खेलों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



Post a comment