उन्नाव की बलात्कार पीड़िता ने भी दम तोड़ा, सवालों में योगी आदित्यनाथ और उनकी पुलिस

उन्नाव की बलात्कार पीड़िता ने भी दम तोड़ दिया. शुक्रवार की देर रात दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में उसने अखिरी सांसें लीं. हालांकि मौत से उसने लड़ाई लड़ी. मरने से पहले उसने दो ही वाक्य कहा, जीना चाहती हूं और मेरे साथ जिसने यह सब किया उन्हें छोड़ना नहीं है. इसके बाद जिंदगी की जंग वह हार गई. हैदराबाद की दरिंदगी की बीच ही उन्नाव में यह घटना घटी. गुरुवार को बलात्कार पीड़िता को जमानत पर छूट कर आए दो आरोपियों ने अपने तीन साथियों के साथ मिलकर जिंदा जला दिया.

पुलिस ने युवती को गंभीर हालत में जिला अस्पताल पहुंचाया. हालत नाजुक होने पर डॉक्टरों ने 90 फीसद जल चुकी पीड़िता को लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया. बाद में उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर कर दिया गया. पीड़िता को एयरलिफ्ट से सफदरजंग अस्पताल लाया गया जहां उसका इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. पुलिस ने पीड़िता को जलाने वाले पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है.

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी बलात्कार पीड़िता की मौत के बाद उसके परिजन से मुलाकात की. परिवार से मुलाकात के बाद प्रियंका गांधी ने कहा कि पीड़िता के पूरे परिवार को पिछले एक साल से लगातार परेशान किया जा रहा था. मुझे सुनने को मिला है कि दोषियों के भाजपा से संबेध हैं. इसलिए वे अभी तक बचे हुए थे. राज्य में अपराधियों के बीच कोई डर नहीं है. मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि राज्य में अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं है, लेकिन उन्होंने राज्य को क्या बना दिया. मुझे लगता है कि यहां महिलाओं के लिए कोई जगह नहीं है. प्रियंका ने कहा कि सिर्फ उन्नाव में पिछले ग्यारह महीने में बलात्कार के 90 मामले सामने आए हैं.

प्रियंका उत्तर प्रदेश की अपनी दो दिवसीय यात्रा पर लखनऊ पहुंची थीं. इससे पहले, प्रियंका ने ट्वीट किया कि मैं ईश्वर से प्रार्थना करती हूं कि वह उन्नाव पीड़िता के परिवार को दुख की इस घड़ी में हिम्मत दे. उन्होंने कहा कि यह हम सबकी नाकामयाबी है कि हम उसे न्याय नहीं दे पाए. सामाजिक तौर पर हम सब दोषी हैं लेकिन यह उत्तर प्रदेश में खोखली हो चुकी कानून व्यवस्था को भी दिखाता है. प्रियंका ने ट्वीट किया कि उन्नाव की पिछली घटना को ध्यान में रखते हुए सरकार ने पीड़िता को तत्काल सुरक्षा क्यों नहीं दी. जिस अधिकारी ने प्राथमिकी दर्ज करने से मना किया, उस पर क्या कार्रवाई हुई. उत्तर प्रदेश में रोज-रोज महिलाओं पर जो अत्याचार हो रहा है, उसे रोकने के लिए सरकार क्या कर रही है. कांग्रेस ने लखनऊ सहित यूपी के कई शहरों में प्रदर्शन किया तो सपा प्रमुख अखिलेश यादव विधानसभा के बाहर धरने पर बैठ गए.

पीड़िता को बेहतर इलाज के लिए लखनऊ से एयरलिफ़्ट कर दिल्ली के सफ़दरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था. सफ़दरजंग अस्पताल में पीड़िता के लिए अलग आईसीयू बनाया गया था. जहां डॉक्टरों की एक टीम लगातार निगरानी कर रही थी. लेकिन आख़िरकार उसे बचाया नहीं जा सका. उधर पीड़िता के रिश्तेदारों ने आरोप लगाया कि लड़की के जलाए जाने के बाद से उन्हें लगातार धमकी दी जा रही है. और धमकी वे दे रहे हैं जिन आरोपियों ने उसे जलाया था. पीड़िता ने पुलिस को बताया कि उसे आग लगाने से पहले उसके साथ मारपीट की गई और चाकू से गोदा गया. हमला करने वाले वही लोग थे, जिन पर उससे बलात्कार का आरोप था. वह अपने मामले में कोर्ट की सुनवाई के लिए रायबरेली जा रही थी, तभी पांच लोगों ने उसे घेरकर जिंदा जला दिया. जब पीड़िता को दिल्ली शिफ्ट किया जा रहा था, तो वह पूरे रास्ते होश में थी और उसने पांचों आरोपियों की पहचान करते हुए पुलिस को बयान दिया. 

पीड़िता ने पुलिस को बताया था कि तड़के चार बजे मैं रायबरेली के लिए ट्रेन पकड़ने के लिए रेलवे स्टेशन जा रही थी. पांच लोग (उसने नाम भी बताए) मेरा इंतजार कर रहे थे. उन्होंने मुझे घेर लिया और पहले डंडे से मेरे पांव पर मारा और फिर मेरी गर्दन पर चाकू से वार किया. उसके बाद उन्होंने मुझ पर पेट्रोल छिड़कर आग लगा दी. जब मैंने चिल्लाना शुरू किया तो भीड़ इकट्ठा हो गई और पुलिस को बुलाया गया. सफदरजंग अस्पताल में भर्ती किए जाने के बाद रात करीब 11.40 उन्हें दिल का दौरा पड़ा. डॉक्टरों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन उसे बचाने में डॉक्टर नाकाम रहे. उन्नाव हो या हैदराबाद या बिहार के दरभंगा और बक्सर, ये घटनाएं हमारी व्यवस्था की नाकामी का ही नतीजा है. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



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