बलात्कार के आरोपी नित्यानंद ने इक्वाडोर के पास द्वीप पर बनाया अपना देश

दुष्कर्म और बच्चों को गैरकानूनी रूप से बंधक बनाकर रखने के आरोपी स्वयंभू धर्मगुरु नित्यानंद का बिदादी आश्रम अब खाली पड़ा है. आश्रम का रोज का कामकाज देखने वाले प्रमुख लोग भी लापता हैं. अब पता चला है कि नित्यानंद ने इक्वाडोर के नजदीक एक द्वीप पर हिंदू राष्ट्र 'कैलाशा' का निर्माण किया है जिसका अपना ध्वज और राजनीतिक व्यवस्था है. बिदादी आश्रम में ही 2010 में नित्यानंद का पहला स्कैंडल सामने आया था. आपत्तिजनक हालत में एक अभिनेत्री के साथ उनका एक वीडियो वायरल हुआ था और उसके बाद वह करीब आठ साल तक अज्ञातवास में रहा. एक साल पहले वह नए अवतार में सामने आया था. मैरून रंग और बाघ की खाल की मिलीजुली वेषभूषा में वह चेहरे पर दाढ़ी और मूछों के साथ सामने आया थे. उसके हाथ में त्रिशूल और गले में मनके की माला थी.

अहमदाबाद के 'योगिनी सर्वज्ञपीठम' आश्रम से दो लड़कियों के लापता होने के बाद पिछले महीने नित्यानंद के खिलाफ एफआइआर भी दर्ज की गई थी. उस पर अपहरण और चंदा वसूलने के लिए बच्चों को गलत तरीके से बंधक बनाकर रखने के आरोप लगाए गए थे. पुलिस उसकी तलाश में आश्रम गई तो वहां कोई नहीं था. तब पता चला कि नित्यानंद देश छोड़कर भाग गया है. नित्यानंद के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई थी, जिसमें उस पर आश्रम में बच्चों को कथित तौर पर अगवा करने और उन्हें बंधक बनाकर अनुयायियों से चंदा जुटाने के काम में लगाने का आरोप लगाया गया था.

स्वयंभू बाबा नित्यानंद को अहमदाबाद स्थित उसके आश्रम के लिए अनुयायियों से चंदा एकत्र करने की खातिर बच्चों को कथित रूप से अगवा कर कैद में रखने के लिए गुजरात पुलिस तलाश कर रही है, और इसी समय कैलासा नाम की वेबसाइट सामने आई है. इस वेबसाइट से पता चलता है कि नित्यानंद ने एक नए देश की स्थापना की है, जिसके लिए उसने नया ध्वज, नया संविधान और नया प्रतीक चिह्न भी तय कर लिया है.वेबसाइट के मुताबिक भगोड़े स्वयंभू बाबा नित्यानंद ने 'हिंदू संप्रभु राष्ट्र' की घोषणा की है, और उनके पास अपने कथित 'कैलाश' देश के लिए प्रधानमंत्री व मंत्रिमंडल भी है. वेबसाइट में देश के लिए चंदा देने की अपील भी की गई है. चंदा देने वालों को 'महानतम हिंदू राष्ट्र' की नागरिकता मिल सकती है.

साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक इस वेबसाइट को 21 अक्टूबर, 2018 को बनाया गया था और इसे आखिरी बार 10 अक्टूबर, 2019 को अपडेट किया गया था. वेबसाइट का रजिस्ट्रेशन पनामा में किया गया था और इसका आईपी अमेरिका के डलास में स्थित है. हालांकि यह साफ नहीं हो पाया है कि यह कथित देश 'कैलाश' किस स्थान पर है, लेकिन वेबसाइट के मुताबिक 'कैलाश सीमारहित राष्ट्र है, जिसका निर्माण दुनिया भर में बेदखल कर दिए गए उन हिंदुओं ने किया है, जो अपने-अपने देश में प्रामाणिक रूप से हिन्दुत्व का पालन करने का अधिकार गंवा चुके हैं.

वेबसाइट में कहा गया है कि कैलाश अभियान की शुरुआत संयुक्त राज्य अमेरिका में हुई और इसकी अगुआई वही हिंदू आदि शैव अल्पसंख्यक समुदाय कर रहा है, जिसके लिए इसकी स्थापना हुई है, और यह समूची दुनिया के सताए हुए हिंदुओं और हिंदू बनने के इच्छुक लोगों के लिए सुरक्षित स्थान है, चाहे उनकी नस्ल, लिंग, समुदाय, जाति और पंथ कुछ भी हो, जहां वे शांति से रह सकते हैं और निंदा, हस्तक्षेप व हिंसा से मुक्त रहते हुए अपनी आध्यात्मिकता, कला और संस्कृति को अभिव्यक्त कर सकते हैं.

वेबसाइट के मुताबिक, इस हिंदू राष्ट्र का अपना ध्वज भी है, जिसे 'ऋषभ ध्वज' के रूप में जाना जाता है, जिसमें भगवान शिव के वाहन नंदी के साथ स्वयं नित्यानंद भी मौजूद है. 'कैलाश' में कई सरकारी विभाग भी होंगे, जिनमें शिक्षा, वित्त, वाणिज्य शामिल हैं. इनके अलावा 'कैलाश' में एक 'प्रबुद्ध नागरिकता विभाग' भी होगा, जो सनातन हिंदू धर्म को पुनरुज्जीवित करने की दिशा में काम करेगा. यह कथित 'देश' अंततः 'धार्मिक अर्थव्यवस्था' लागू करने का दावा करता है, तथा इसमें हिंदू निवेश व रिज़र्व बैंक भी होगा, जहां क्रिप्टोकरेंसी भी स्वीकार की जाएगी.

वेबसाइट में यह दावा भी किया गया है कि 'कैलाश' का अपना पासपोर्ट भी होगा और कोई भी देश की नागरिकता के लिए आवेदन कर सकता है. वेबसाइट के मुताबिक नागरिकों को कैलाश का पासपोर्ट दिया जाएगा और परमशिव की कृपा से पासपोर्टधारक कैलाश सहित सभी 11 दिशाओं व 14 लोकों में बिना रोकटोक प्रवेश पा सकेगा. नित्यानंद पर अपनी पूर्व अनुयायी के साथ कथित रूप से बलात्कार करने का आरोप है. पिछले महीने गुजरात पुलिस ने उसकी दो सहयोगियों को गिरफ्तार किया था.

स्वयंभू बाबा स्वामी नित्यानंद के आश्रम में बंधक बनाई गई पंद्रह साल की पीड़िता ने बताया था कि आश्रम में उन्हें मानसिक प्रताड़ना से गुजरना पड़ा था. बताया जाता है कि तमिलनाडु के एक पीड़ित परिवार ने उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी. रिपोर्ट लिखाने के तीन दिनों के बाद नित्यानंद के इन दो सहयोगियों को गिरफ्तार कर लिया गया. पीड़िता ने बताया कि मैं 2013 मई में गुरुकुल में आई थी. पहले हमसे मनोरंजक गतिविधियां कराई जाती थीं लेकिन 2017 से यहां पर भ्रष्टाचार शुरु हो गया. पीड़िता ने बताया कि हमें प्रचार की गतिविधियां करने के लिए कहा गया ताकि स्वामी जी को ज्यादा से ज्यादा दान मिल सके. दान की राशि तीन लाख से आठ करोड़ रुपए तक होती है. पीड़िता ने बताया कि या तो हमें रुपए दान में लेने होते थे या फिर जमीन दान में हासिल करनी होती थी. 

पीड़िता ने बताया कि आश्रम में आधी रात में हमें उठाया जाता था और स्वामी जी के लिए वीडियो बनाने के लिए कहा जाता था. वीडियो के लिए हमें भारी गहने पहनने के लिए दिए जाते थे और चेहरे पर खूब मेकअप भी किया जाता था. उन्होंने बताया कि मेरी बड़ी बहनें वहां से निकल नहीं पा रही थी, मैं इस बात की गवाह हूं कि स्वामी जी के सीधे निर्देश के बाद मेरी बहनों ने वीडियो बनाए थे. पीड़िता ने बताया कि आश्रम के लोग हमारे माता-पिता के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया जाता था और हमसे भी ऐसा ही करने के लिए कहा जाता था लेकिन हमने उसे करने से इनकार कर दिया. पीड़िता ने आगे बताया कि आश्रम के प्रशासन ने आध्यात्मिक प्रक्रिया के नाम पर दो महीने तक एक कमरे में भी बंद कर दिया था. नित्यानंद त्रिनिदाद एंड टोबैगो में हैं. हालांकि विदेश मंत्रालय ने उसके प्रत्यर्पण के अनुरोध या किसी भी जानकारी से इनकार किया है.

मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि हमारे पास कोई औपचारिक जानकारी नहीं है. न ही गुजरात पुलिस और न ही गृह मंत्रालय से. इसके अलावा, किसी भी प्रत्यर्पण अनुरोध के लिए, हमें उस व्यक्ति के स्थान और राष्ट्रीयता के विवरण की जरूरत होगी. हमारे पास अभी तक उसके बारे में ऐसी कोई जानकारी नहीं है. अहमदाबाद में एक पुलिस अधिकारी आरवी असारी ने कहा कि नित्यानंद विदेश भाग गया है और अगर जरूरत पड़ी तो गुजरात पुलिस उचित माध्यम के जरिए उसको हिरासत में लेगी. पुलिस ने कहा कि नित्यानंद कर्नाटक में अपने खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज होने के बाद ही देश छोड़कर भाग गया है और उसे यहां ढूंढना समय की बर्बादी होगी. उसके भारत आने के बाद हम निश्चित तौर पर उसको गिरफ्तार करेंगे. स्वामी नित्यानंद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से रिश्ते थे. इस विवादास्पद स्वामी ने गुजरात में लड़कियों के लिए तबके मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के शुरू किए गए 'कन्या केलावनी' कार्यक्रम के लिए आर्थिक मदद भी दी थी. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



Post a Comment