हर 2 घंटे पर 3 लोग देते हैं जान, किसानों से ज्यादा खुदकुशी करते हैं बेरोजगार

 
मुंबई

कांदिवली के चारकोप स्थित रॉक रेवेन्यू अपार्टमेंट में रहने वाली 40 वर्षीय डिंपल वाडिलाल ने बेरोजगारी से तंग आकर 3 जनवरी को इमारत से कूदकर जान दे दी थी। बेरोजगारी से हताश होकर मौत को गले लगाने वाली वह अकेली नहीं थीं। साल 2018 में देशभर में उनकी तरह 12,936 बेरोजगारों ने आत्महत्या कर ली थी। 2018 में रोज औसतन 35 यानी हर दो घंटों में तीन लोगों ने जॉब न होने के गम में जान दी। यह आंकड़ा 2017 में 34 और 2016 में 30 लोगों की खुदकुशी का था। राष्ट्रीय अपराध अन्वेषण ब्यूरो (NSRB) के आपराधिक रिकॉर्ड्स से यह खुलासा हुआ है।

बढ़ता ही गया दर्द
ये आंकड़े बता रहे हैं कि किसानों से ज्यादा बेरोजगार लोग खुदकुशी करते हैं। 2018 में देश में खुदकुशी के मामलों में 3.6 फीसद की बढ़ोतरी हुई है। 2018 में आत्महत्या के 1,34,516 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि 2017 में 1,29,887 लोगों ने खुदकुशी की थी। 2018 में 12,936 लोगों ने बेरोजगारी से तंग आकर खुदकुशी की थी, जबकि इसी अवधि में 10,349 किसानों ने आत्महत्या की।
 
2017 में 12,241 लोगों ने बेरोजगारी की वजह से खुदकुशी की थी, जबकि इसी दौरान खेती-किसानी से जुड़े 10,655 लोगों ने आत्महत्या की। वहीं, 2016 में 11,379 किसानों और खेतिहर मजदूरों ने जान दी थी, जबकि इसी अवधि में 11,173 बेरोजगारों ने आत्महत्या की थी। बेरोजगारी की वजह से 2015 में 10,912 लोगों ने खुदकुशी की थी, जबकि उस साल किसानों की आत्महत्या के 12,602 मामले दर्ज किए गए थे।
 



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