बुका जल विहार से 30 परिवारों को वर्ष भर मिल रहा नियमित रोजगार

रायपुर
बुका जल विहार कोरबा जिले के अंतर्गत कटघोरा क्षेत्र का एक प्रतिष्ठित पर्यटन स्थल बन चुका है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री राकेश चतुवेर्दी ने बताया कि इसका संचालन वन प्रबंधन समिति और कठमोंगरा द्वारा संयुक्त रूप से किया जाता है। बुका जल विहार से दोनों समितियां औसतन 15 लाख रूपए के वार्षिक टर्नओव्हर का व्यापार करती हैं। इसके साथ ही बुका और कठमोंगरा समितियों के 30 परिवारों को बुका जल विहार से वर्ष भर का नियमित रोजगार भी मिलता है।

उल्लेखनीय है कि वन मंडल कटघोरा द्वारा बुका में जल विहार की स्थापना की गई है। यह जल विहार हसदेव बांध के उलट क्षेत्र में हुए जल भराव में किया गया है। वर्ष 1980-81 में यहां से बुका गांव के 20 परिवारों को पहाड के ऊपर विस्थापित किया गया है। वही 20 परिवारों के सदस्य और कठमोंगरा समिति मिलकर इसका संचालन करते हैं। ज्ञातव्य है कि बुका जल विहार में नवम्बर, दिसम्बर, जनवरी और फरवरी में बाहर से भी पर्यटक आने लगे हैं। यहां नौका विहार के लिए आए पर्यटकों के लिए रूकने और भोजन की भी व्यवस्था होती है। रूकने के लिए यहां दो बिस्तरीय ग्लास हाऊस, मड हाऊस तथा हसदेव हाऊस बनाए गए हैं। ग्लास हाऊस और मड हाऊस का किराया 4 हजार रूपए प्रति कमरा प्रतिदिन के दर से लिए जाते हैं। मड हाऊस के दो कमरों के लिए भी यही दर है। जबकि हसदेव हाऊस के दो कमरों के लिए प्रति कमरा 3 हजार 300 रूपए का चार्ज लिया जाता है।

यहां समिति द्वारा रूकने वाले और आने वाले पर्यटकों के लिए स्वादिष्ट भोजन की भी व्यवस्था की जाती है। यहां नौका विहार के लिए 15 सीटर और 10 सीटर की दो मोटरबोट है। इनमें 15 सीटर नौका का चार्ज एक हजार 500 रूपए और 10 सीटर नौका का चार्ज 1000 रूपए निर्धारित है। समिति के अध्यक्ष बताते हैं कि वर्ष 2018-19 में यहां से समिति ने 15 लाख 92 हजार रूपए का व्यापार किया गया था। इसमें ग्लास हाऊस, मड हाऊस, हसदेव हाऊस और टेंट निंच के किराए से 9 लाख 44 हजार 600 रूपए की आय सर्वाधिक रही। शेष 5 लाख 97 हजार 400 रूपयों की आय नौका विहार और कैंटीन से हुई है। बैरियर से भी 92 हजार रूपए इसी में शामिल हैं। इस तरह यहां समिति 15 लाख 92 हजार रूपए का व्यापार करती हैं। इसी आय से समिति, 30 सदस्यों को 4000 रूपए मासिक वेतन देती है। साथ ही नौका विहार के मेंटनेंस का खर्च भी इसी आय से होता है। गत वर्ष 2018-19 में समिति ने वर्ष भर में कुल 10 लाख 93 हजार 600 रूपए खर्च भी किए हैं।



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