नकाबपोश छोड़िए, अभी घायलों से ही दूर है दिल्ली पुलिस

 
नई दिल्ली

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में पुलिस की जांच के बाद बवाल थमने के बजाए बढ़ता दिख रहा है। पुलिस की जांच में जिन 9 आरोपियों की पहचान का दावा किया गया है, उसमें से 7 लेफ्ट संगठनों के हैं, जबकि अन्य दो लेफ्ट के खिलाफ हैं। हालांकि वह एबीवीपी के हैं या नहीं, इस पर पुलिस कुछ कहने से बच रही है। हैरानी की बात यह है कि पुलिस 5 दिनों से कैंपस में बैठकर नकाबपोशों की तलाश कर रही है, लेकिन उन तक तो छोड़िए, वह अभी घायलों तक भी नहीं पहुंच पाई है।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि पुलिस के पास घायलों के बारे में जानकारी है, लेकिन जेएनयू में हिंसा को करीब एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी पुलिस घायलों का बयान नहीं दर्ज कर सकी है। पुलिस के पास घायलों का फोन नंबर भी था, जिसके बाद पुलिस ने उनको फोन करके जांच में शामिल होने के लिए कहा। छात्रों की सुविधा के लिए पुलिस ने कैंपस के कमरे में अस्थायी ऑफिस तैयार किया, जिससे छात्रों को बयान देने या जांच में मदद करने के लिए दूरदराज न जाना पड़े। हालांकि 6 दिन बाद भी जांच में शामिल होने के लिए न कोई छात्र आया और न किसी घायल ने आकर पुलिस को बयान दर्ज कराया। पुलिस ने घायलों को फोन के अलावा उनके हॉस्टल में जाकर वॉर्डन से कहा है कि घायलों को एडमिन ब्लॉक के उस कमरे में भेजें, जिसमें पुलिस का कमरा बनाया गया है।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि घायलों को बुलाने की जो भी कोशिश की जा रही है, वह अब तक सफल नहीं हुई है। कोई भी छात्र पुलिस के पास नहीं आया है। जो लोग पुलिस के गवाह बने हैं, वह सीधे तौर पर हिंसा के चश्मदीद नहीं हैं। पुलिस के पास जो विडियो हैं, वह या तो सोशल मीडिया से हैं या किसी ने दिया भी है, तो उसके पास कहीं से आया था। पुलिस के पास विडियो का ऑरिजिनल सोर्स नहीं है कि आखिर विडियो किस मोबाइल फोन से बना।

संदिग्धों की गिरफ्तारी नहीं, होगी पूछताछ
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जिन संदिग्धों की पुलिस ने पहचान की है, उनको गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। नोटिस दिया जाएगा और जांच में शामिल होने के लिए कहा जाएगा। हालांकि नोटिस के बाद भी वह जांच में शामिल नहीं होते तो पुलिस उनको गिरफ्तार कर सकती है। अभी पुलिस किसी तरह उनको जांच में लाने की कोशिश कर रही है।

जो पहचाने गए, वह नकाबपोश नहीं थे!
पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े हुए हैं। कुछ लोगों का कहना है कि पुलिस ने संदिग्धों की जो तस्वीरें जारी की हैं, उनमें 5 दिन की मेहनत के बाद सिर्फ उन्हीं की तस्वीर है, जिनका चेहरा नकाब में नहीं था। एक लड़की की बात छोड़ दें तो बाकी सबके चेहरे कैमरे में दिख रहे थे। वहीं उस लड़की सहित वह आरोपी अभी तक नकाब के पीछे ही हैं, जिनका विडियो वायरल हुआ था और वह लड़की हाथ में डंडा लिए दिख रही थी। वह लड़की कौन थी, पुलिस ने अब तक नहीं बताया है।



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