निर्भया मामलाः दोषी मुकेश का एक और दांव हुआ फेल,सुप्रीम कोर्ट ने ठुकराई राष्ट्रपति के फैसले के खिलाफ दायर अपील

निर्भया रेप और हत्या मामले में दोषियों की ओर से बार बार कानूनी  प्रक्रियाओं का इस्तेमाल किए जाने के बीच सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इस मामले में एक दोषी मुकेश कुमार सिंह का आखिरी कानूनी दांव भी ठुकरा दिया। मुकेश ने दया याचिका खारिज करने के राष्ट्रपति के आदेश को चुनौती दी थी जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति आर. भानुमति, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति ए. एस. बोपन्ना की एक पीठ ने कहा कि राष्ट्रपति द्वारा दया याचिका का शीघ्र निपटारा किए जाने का मतलब यह नहीं है कि उन्होंने सोच-समझकर फैसला नहीं किया। पीठ ने कहा कि निर्भया मामले में सुनवाई अदालत, उच्च न्यायालय और शीर्ष अदालत के फैसले सहित प्रासंगिक रिकॉर्ड राष्ट्रपति के समक्ष गृह मंत्रालय की ओर से पेश किए गए। अदालत ने यह भी कहा कि जेल में कथित पीड़ा का सामना करने को राष्ट्रपति के दया याचिका खारिज करने के खिलाफ आधार नहीं बनाया जा सकता।

इससे पहले, दोषी मुकेश कुमार सिंह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अंजना प्रकाश ने दावा किया था कि उसकी दया याचिका पर विचार के समय राष्ट्रपति के समक्ष सारे तथ्य नहीं रखे गये। निर्भया के परिवार ने फैसले पर खुशी जतायी है।

दिल्ली में दिसम्बर 2012 में हुये इस जघन्य अपराध के लिये चार मुजरिमों को अदालत ने मौत की सजा सुनायी थी। इन दोषियों में से एक मुकेश की दया याचिका राष्ट्रपति ने 17 जनवरी को खारिज कर दी थी। मुकेश कुमार सिंह दया याचिका खारिज होने के बाद ही अदालत ने चारों मुजरिमों -मुकेश, पवन गुप्ता, विनय कुमार शर्मा और अक्षय कुमार, को एक फरवरी को सुबह छह बजे मृत्यु होने तक फांसी पर लटकाने के आदेश पर अमल के लिये आवश्यक वारंट जारी किये थे।
 
इससे पहले अदालत ने चारों दोषियों को 22 जनवरी को फांसी देने के लिये वारंट जारी किये थे। हालांकि इस मामले में अभी भी दो दोषियों की सुधारात्मक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आना बाकी है जबकि मुकेश के अलावा बाकी तीन दोषियों के पास दया याचिका का भी विकल्प बचा है । ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि क्या एक तारीख को चारों को फांसी हो सकेगी।



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