शाहीन बाग में एलजी बैजल से बोलीं दादियां- ‘पीएम मोदी हमारा बेटा, फिर मां की सुनते क्यों नहीं?’

 नई दिल्ली
'हम यहीं बैठे थे, हम यहीं बैठेंगे। एलजी के पास गए थे, उन्होंने हमारी बात अच्छे से सुनी और हमें इज्जत दी। हमने उनसे कहा कि पीएम मोदी हमारे बेटे जैसा, क्या कमी आ गई कि एक मां सड़क पर है और बेटे को अपनी मां से मिलने तक का समय नहीं है। जब तक सीएए, एनआरसी और एनपीआर वापस नहीं होगा, तब तक हम नहीं उठेंगे।' यह कहना एलजी अनिल बैजल से मिलकर आईं नई दिल्ली के शाहीन बाग की दादी बिलकीस का। मंगलवार को शाहीन बाग से कुछ लोग एलजी से मिलने गए थे। इनमें शाहीन बाग की चार दादियां सरवरी, नूर बेगम, बिलकीस और एक अन्य शामिल थीं। सैयद तासिर अहमद भी उनके साथ थे। दादियों का कहना है कि एलजी ने मिलने बुलाया था, तभी हम गए थे। उन्होंने एलजी से साफ बोल दिया है कि जब तक एनआरसी और सीएए को वापस नहीं लिया जाता। तब तक सड़क पर ही रहेंगी।

'हम मरने से नहीं डरते…'
दादी सरवरी ने बताया कि हमने कसम खाई है कि जब तक कानून वापस नहीं लिया जाता, तब तक हम यहीं रहेंगे। हम मरने से नहीं डरते हैं, चाहे कुछ भी हो जाए, सड़क को खाली नहीं करेंगे। जब हम सड़क पर आकर अपनी बात मीडिया के सामने रख सकते हैं तो क्या एलजी के सामने नहीं रख सकते। हम बस अपनी बात रखने गए थे, और एलजी की तरफ से हमे पॉजिटिव प्रतिक्रिया मिली है।

'हम इसी तरह सड़कों पर रहेंगे'
तासिर अहमद ने कहा कि हमने एलजी से साफ कह दिया है कि जब तक संविधान विरोधी कानून को वापस नहीं ले लेते। तब हम इसी तरह सड़कों पर रहेंगे। 29 जनवरी को चक्का जाम करने का ऐलान भी किया। एलजी ने आश्वासन दिया है कि वो हमारी बात को गृह मंत्री अमित शाह तक पहुचाएंगे। जब एलजीने कहा कि रोड बंद होने की वजह से स्कूल के बच्चों को परेशानी हो रही है, तब हमने उन्हें बताया कि 6 नंबर रोड है जो पुश्ता रोड और यमुना की ओर से जाती है, वहां से भी ट्रैफिक को डाइवर्ट किया जा सकता है।

'हमें उम्मीद, कोर्ट पक्ष में फैसला सुनाएगा'
हाई कोर्ट के निर्णय पर बोलते हुए अहमद ने कहा कि हम 37 दिन से सड़कों पर बैठे हैं और हमें उठाया नहीं गया। इसका मतलब यही है कि हम कोई गलत काम नहीं कर रहे हैं। अब शाहीन बाग की तरह अलग-अलग जगह पर प्रोटेस्ट किया जा रहा है और हमें उम्मीद है कि कोर्ट हमारे पक्ष में फैसला सुनाएगा। अगर हमारे पक्ष में फैसला नहीं आता तो भी हम सड़क से नहीं उठेंगे।

वहीं वकील महमूद पारचा को लीगल टीम मानने की बात से इनकार करते हुए कहा कि यहां पर कोई भी निर्णय लिया जाएगा, वो सब की सहमति से लिया जाएगा। एलजी से मिलने का निर्णय भी सबकी सहमति से लिया गया था और हमारी कोई लीगल टीम नहीं है।
 



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