स्टील के कंटेनर में दहशत की छाप छोड़ गया था ‘डॉक्टर बम’ जलीस अंसारी

 
मुंबई

'डॉक्टर बम' के नाम से कुख्यात जलीस अंसारी मुंबई से फरारी के 24 घंटे बाद यूपी के कानपुर शहर में शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया गया। अंसारी परोल पर रिहा था और आत्मसमर्पण की तारीख से ठीक एक दिन पहले घर से लापता हो गया था। उसके बेटे ने थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। अंसारी मुंबई ब्लास्ट मामले में दोषी है और आजीवन कारावास की सजा भुगत रहा है।
 अंसारी तकरीबन ढाई दशक पहले मुंबई में एक स्टील के कंटेनर में अपने 'डॉक्टर बम' होने का महत्वपूर्ण सबूत छोड़ गया था। बाद में यही उसके खिलाफ सबसे बड़ा सबूत बन गया और उसे सजा दिलाने में इस सबूत ने बड़ी भूमिका निभाई थी। दरअसल, डॉन एजाज लकड़ावाला को पिछले सप्ताह पकड़ने वाली टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य एसीपी नेताजी भोपले उन दिनों मुंबई में बम ऐंड डॉग स्क्वॉड में थे।

कंटेनर पर छोड़ गया था फिंगरप्रिंट
भोपले ने शुक्रवार को एनबीटी को बताया कि साल 1992 में एक दिन भोइवाडा में शिवसेना की एक शाखा के आसपास एक बम धमाका हुआ था। जब वे वहां पहुंचे, तो उन्होंने वहां स्टील का एक कंटेनर बरामद किया। उस पर ऑयल से कुछ लिखा हुआ था। उसी कंटेनर में उन्हें कुछ फिंगरप्रिंट्स मिले थे, जिसे उन्होंने संभाल कर रख लिया था। वारदात के दो-तीन साल बाद जब जलीस अंसारी पकड़ा गया, तो वही फिंगर प्रिंट्स उसके खिलाफ सबसे बड़ा सबूत बन गए।

भोपाले ने बताया कि डॉक्टर जलीस अंसारी ने महाराष्ट्र में करीब दो दर्जन बम धमाके किए थे, लेकिन वह कन्विक्ट सिर्फ भोइवाडा वाले केस में हुआ था। उसने अपने साथियों के साथ मिलकर देश भर में 60 से ज्यादा बम धमाके किए थे। 90 के दशक में एक साल 5-6 दिसंबर को उसने देश भर में चलने वाली छह राजधानी एक्सप्रेस में एक साथ बम धमाके कराए थे। उसे साल 1994 में हैदराबाद में हुए एक ब्लास्ट के बाद सीबीआई ने गिरफ्तार किया था और बाद में मुंबई क्राइम ब्रांच को सौंप दिया था।

क्राइम ब्रांच ने किया इन्वेस्टिगेशन
राकेश मारिया के नेतृत्व में उन दिनों क्राइम ब्रांच ने जलीस अंसारी से जुड़े मुंबई के सभी केसों का इनवेस्टिगेशन किया था। जिन लोगों ने नीरज पांडे निर्देशित फिल्म 'अ वेडनसडे' देखी है, उसमें उन्होंने नोट किया होगा कि निर्देशक ने राकेश मारिया को कहानी के लिए क्रेडिट भी दिया है। दरअसल, मुंबई में उन दिनों जलीस अंसारी ने जितने भी ब्लास्ट करवाए थे, उनमें एक गांवदेवी में और दूसरा एसबी-वन के ऑफिस के बाहर भी हुआ था।

पुलिस सूत्रों का कहना है कि डॉक्टर जलीस अंसारी ने एक बार गांव देवी पुलिस स्टेशन के सीनियर इंस्पेक्टर को फोन किया और फिर उन्हें गरियाते हुए बोला था कि 'फोन पर बात अब बंद करो। पहले अपने पुलिस स्टेशन में बम देखो।' जब सीनियर ने अपने अधिकारियों से गांव देवी पुलिस स्टेशन में पूरा सर्च ऑपरेशन करवाया, तो वहां वाकई बम रखा हुआ था। जैसे ही इसे उठाया गया था, वह फट गया था।

इसी तरह जलीस ने एक बार एसबी-वन के सीनियर इंस्पेक्टर को भी फोन किया था और उन्हें भी गांवदेवी के सीनियर इंस्पेक्टर वाला डॉयलॉग दोहराया था। वहां भी बाद में बम मिला था। 'अ वेडनसडे' फिल्म में नसीरूद्दीन शाह भी अनुपम खेर को ऐसे ही फोन करके बम होने की सूचना देते थे। मुंबई पुलिस की एसबी वन को स्पेशल ब्रांच कहा जाता है। खास बात यह है कि इस ब्रांच का काम शहर में इंटेलिजेंस निकालने का होता है, लेकिन ढाई दशक पहले अपने ऑफिस में बम होने का उनके पास कोई इंटेलिजेंस नहीं था।

बांग्लादेश से भारत आया था 'डॉक्टर बम'
डॉक्टर जलीस अंसारी साल 1992 में बांग्लादेश के रास्ते भारत आया था। महाराष्ट्र एटीएस चीफ देवेन भारती ने एनबीटी को बताया कि गुरुवार को मुंबई से फरारी के बाद वह यूपी के रास्ते नेपाल भागने वाला था। इसके इनपुट्स मिलने के बाद उन्होंने यूपी एसटीएफ को अलर्ट किया था। ऐसा पता चला है कि अंसारी सुबह चार बजे ही आग्रीपाडा के अपने घर से निकल गया था। इसके बाद वह कल्याण पहुंचा। वहां से वह करीब साढ़े नौ बजे पुष्पक एक्सप्रेस में बैठा।

जब उसकी फरारी की खबर आई, तो मुंबई के सभी टर्मिनेस में उसके सीसीटीवी फुटेज देखे गए। उसी में जब कल्याण में वह पुष्पक एक्सप्रेस में चढ़ते दिखा, तो उसके खिलाफ ऑपरेशन शुरू हो गया।

टुण्डा का चेला था अंसारी
यूपी पुलिस का कहना है कि बांग्लादेश के रास्ते भारत आने से पहले डॉक्टर जलीस अंसा ने पाकिस्तान में आतंकी ट्रेनिंग ली थी। पाकिस्तान जाने से पहले उसे बम बनाने का तरीका एक और आतंकी आतंकवादी अब्दुल करीम टुण्डा ने सिखाया था। साल 1988 में हैदराबाद के आजम गौरी ने उसकी टुण्डा से मुलाकात करायी थी। अंसारी ने साल 1982 में सायन अस्पताल से एमबीबीएस किया था। लेकिन प्रैक्टिस करने के बजाए उसने आतंकवादियों को एक पूरा गिरोह बना लिया।
 



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