तीरंदाज की गर्दन में तीर, एम्स में हुई सर्जरी सफल

नई दिल्ली
तीरंदाजी की प्रैक्टिस के दौरान एक तीर 12 साल की उभरती तीरंदाज शिवंगिनी गोहेन की गर्दन में धंस गया। तीर की स्पीड इतनी तेज थी कि 65 सेमी के तीर का 15 सेमी हिस्सा गर्दन के अंदर तक पहुंच गया। तीर का प्रहार इतना घातक था कि वह गर्दन से ब्रेन में जाने वाली वटेब्रा आर्टरी के पास से होते हुए गर्दन में स्पाइन बोन C7 और D1 से होते हुए दाहिने तरफ के लंग्स के ऊपरी हिस्से तक पहुंच गया।
एक जरा सी लापरवाही इस खिलाड़ी के करियर को खत्म कर सकती थी, लेकिन एम्स ट्रॉमा सेंटर के न्यूरो सर्जन डॉक्टर दीपक गुप्ता की अगुवाई में डॉक्टरों ने चार घंटे की सर्जरी कर उसकी न केवल जान बचाई बल्कि इस सावधानी के साथ इस ऑपरेशन को अंजाम दिया गया कि अब अगले कुछ महीनों में वह फिर से मैदान में उतरने के लिए तैयार हो जाएंगी।

असम में हो रहे खेलो इंडिया यूथ गेम्स 2020 में भाग लेने पहुंची 12 साल की शिवंगिनी गोहेन प्रैक्टिस के दौरान बुरी तरह से घायल हो गई थीं। आनन फानन में अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां के अस्पताल के डॉक्टर तीर नहीं निकाल पाए और बच्ची को एयर लिफ्ट कर दिल्ली एम्स ट्रॉमा सेंटर भेजा गया। रात 8 बजे इलाज शुरू किया गया।

न्यूरो सर्जन डॉक्टर दीपक गुप्ता ने बताया कि हमारे सामने बहुत बड़ा चैलेंज था, क्योंकि अब तक कभी भी ऐसा मामला सामने नहीं आया था। एक तीर जो लगभग 150 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से और टॉप एंगल से गर्दन में इतनी तेजी से प्रवेश किया कि दो-दो हड्डी को चीरते हुए लंग्स तक पहुंच गया।

सिर से जुड़े जगिया बलिया की सफल सर्जरी करने वाले न्यूरो सर्जन डॉक्टर गुप्ता ने कहा कि इस मामले में हमारे सामने 12 साल की एक उभरती खिलाड़ी का करियर था। वह बार-बार फिर से खेलने की बात कर रही थी और जिस प्रकार तीर गर्दन में धंसा था, एक जरा सी गलती उसके नर्व को डैमेज कर सकता थी, वह अपाहिज हो सकती थी।

हमने उसकी कई प्रकार की जांच की और रात में सर्जरी का प्लान तैयार किया। डॉक्टर दीपक ने बताया, 'हमने सुबह 6 बजे हमने उसे ऑपरेशन थियेटर में लिया और अगले 4 घंटे की सर्जरी में उसके गर्दन से तीर निकालने में हमें सफलता मिली।'

डॉक्टर ने कहा कि देश में तीर की वजह से इस तरह घायल होने का मामला पहली बार सामने आया है। असम में डॉक्टर ने तीर निकालने की कोशिश की थी, लेकिन वो सफल नहीं हो पाए। हमने इस चैलेंज को स्वीकार किया और अपनी टीम के साथ इसे सफल बनाकर बच्ची को नई जिंदगी देने में सफल हुए। उन्होंने कहा कि बच्ची अब खतरे से बाहर है, उसे वॉर्ड में शिफ्ट कर दिया गया है। अगले दो से तीन महीने में वह फिर से अपने खेल के लिए तैयार हो जाएगी।



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