पहाड़ा ना सुना पाने पर डीएम ने शिक्षामित्र को किया बर्खास्त, बेसिक शिक्षा मंत्री बोले- टीचर का अपमान सही नहीं

 लखनऊ
उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में जिलाधिकारी दिनेश कुमार सिंह ने 17 का पहाड़ा ना सुना पाने पर एक शिक्षामित्र को बर्खास्त कर दिया। जिलाधिकारी के इस दौरे और शिक्षामित्र से हुई बातचीत का विडियो सोशल साइट्स पर वायरल हुआ, तो उत्तर प्रदेश सरकार के बेसिक शिक्षा मंत्री ने इसपर आपत्ति जताई। जिलाधिकारी की कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी ने कहा कि भले ही डीएम विद्यालय का निरीक्षण करें यह बात पूरी तरह से ठीक है, लेकिन किसी भी शिक्षक का उसके विद्यार्थियों के सामने अपमान करना और इस कार्रवाई का विडियो वायरल होना बिल्कुल ठीक नहीं है। मंत्री ने यह भी कहा कि शिक्षक का पद किसी आम कर्मचारी का पद नहीं है और हर अध्यापक की छात्रों और समाज के बीच एक गरिमा है, जिसका ध्यान रखना जरूरी है।
 दरअसल, जौनपुर जिले के जिलाधिकारी दिनेश कुमार सिंह मंगलवार को जौनपुर के मड़ियाहूं विकास खंड के एक प्राथमिक स्कूल का निरीक्षण करने पहुंचे थे। निरीक्षण के दौरान ही डीएम ने कैमरे के सामने स्कूल की शिक्षामित्र मीरा सिंह से 17 का पहाड़ा पूछा। इस सवाल पर जब मीरा जवाब ना दे सकीं, तो डीएम ने कहा कि अगर वह पहाड़ा नहीं सुना सकीं तो उन्हें बर्खास्त कर दिया जाएगा। मीरा जवाब ना दे सकीं, जो जिलाधिकारी के निर्देश पर बेसिक शिक्षा अधिकारी ने मीरा को सेवाओं से बर्खास्त कर दिया। शिक्षामित्र की इस बर्खास्तगी और पूछताछ का विडियो जब सोशल मीडिया के जरिए मंत्री सतीश चंद्र द्विवेदी के पास पहुंचा तो उन्होंने इस कार्रवाई पर आपत्ति जताई।

शिक्षा सुधार के लिए कर रहे हैं कई काम: द्विवेदी
गुरुवार को नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से बात करते हुए बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश चंद्र द्विवेदी ने कहा कि मैं इस बात का पक्षधर हूं कि शिक्षा में सुधार होना चाहिए और हम हर दिन इसके लिए मेहनत से काम कर रहे हैं। लेकिन यह बात बिल्कुल सही नहीं कि कोई भी अधिकारी किसी स्कूल में पहुंचकर तत्काल किसी शिक्षक से कुछ भी कैमरे के सामने पूछ ले और ना बता पाने पर उसे बर्खास्त किया जाए। मंत्री ने कहा कि बीते कई दिनों में ऐसी घटनाएं बढ़ी हैं, जिनमें स्कूल में होने वाली जांच के दौरान किसी शिक्षक से पूछताछ होती है और इसके विडियो सोशल साइट्स पर वायरल हो जाते हैं। ऐसा होना बिल्कुल भी ठीक नहीं है। अधिकारियों को कोई भी सवाल करना हो तो वह अकेले शिक्षक से पूछ सकते हैं, लेकिन किसी भी शिक्षक का उसके स्टूडेंट्स के सामने अपमान कतई जायज नहीं है।

'किसी शिक्षक का अपमान सही नहीं'
शिक्षामित्र का पक्ष लेते हुए मंत्री ने यह भी कहा कि ऐसा हो सकता है कि कई बार किसी अधिकारी के सामने कोई शख्स नर्वस होकर या किसी अन्य कारण से जवाब ना दे सके, लेकिन ऐसे में यह सही नहीं है कि तत्काल उसकी बर्खास्तगी जैसी कार्रवाई करा दी जाए। मंत्री सतीश चंद्र द्विवेदी ने यह भी कहा कि विभाग को इसकी जानकारी दी जा सकती है कि फलां शिक्षक अयोग्य है या विद्यालय में ये दिक्कतें हैं। लेकिन सब के बावजूद यह ठीक नहीं कि शिक्षकों का उनके विद्यार्थियों के सामने अपमान किया जाए। ऐसा बिल्कुल भी नहीं होना चाहिए क्योंकि अगर किसी शिक्षक के साथ ऐसा व्यवहार होता है तो वह दोबारा अपनी क्लास में कैसे बच्चों को पढ़ा सकेगा। बता दें कि मंत्री का यह बयान उस वक्त आया है, जबकि बीते कुछ दिनों में यूपी के कई स्कूलों से ऐसे विडियो सामने आ चुके हैं जब किसी उच्च अधिकारी के निरीक्षण के दौरान कोई शिक्षक सवाल का जवाब ना दे सका हो।
 



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