शिरडी में आज बंद का ऐलान, साईं जन्मभूमि पर उद्धव के बयान से बवाल बढ़ा

 
मुंबई 

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की अपील के बावजूद शिरडी ग्राम सभा ने रविवार को बंद करने का फैसला किया है. सीएम की ओर से साईं जन्मभूमि पाथरी शहर के लिए विकास निधि के ऐलान के बाद उठा विवाद शांत होने का नाम नहीं ले रहा है. मुख्यमंत्री के बयान से शिरडी के लोग नाराज हैं. मुख्यमंत्री के इस निर्णय के खिलाफ रविवार को शिरडी बंद का ऐलान किया है. विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि साईं बाबा ने अपने जन्म और धर्म जिक्र कभी नहीं किया और न ही साईं चरित्र में इसके बारे में कुछ लिखा हुआ है.

सीएम अपना बयान वापस लें
शिरडी ग्राम सभा ने फैसला किया है कि जब तक मुख्यमंत्री ठाकरे अपना बयान वापस नहीं लेते हैं, तब तक उनका बंद जारी रहेगा. मुख्यमंत्री ने शिरडी के लोगों से रविवार के बंद को वापस लेने की बात कही है. शिवसेना एमएलसी नीलम गोरे ने एक बयान जारी करके कहा है कि आने वाले सप्ताह में मुख्यमंत्री शिरडी के लोगों से मिलेंगे और इस मसले का समाधान करेंगे. उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पाथरी भी जाएंगे और लोगों से बात करेंगे. वहीं बीजेपी नेता और विधायक राधाकृष्ण विखे पाटिल ने शिरडी ग्राम सभा के बंद के आह्वान को समर्थन दिया है.

क्या है असली मामला

बता दें कि उद्धव ठाकरे ने 9 जनवरी को औरंगाबाद में साईंबाबा के कथित जन्म स्थान पाथरी शहर के लिए 100 करोड़ की विकास निधि देने का ऐलान किया था. मुख्यमंत्री के इस फैसले का शिरडी के लोग विरोध कर रहे हैं. इन लोगों का कहना है कि पाथरी को लेकर अगर सरकार अपना फैसला वापस नहीं लेगी तो वो कोर्ट जाएंगे.

साईं मंदिर के पूर्व ट्रस्टी अशोक खांबेकर का कहना है कि साईंबाबा ने कभी भी अपने जन्म, धर्म पंथ के बारे में किसी को नहीं बताया. बाबा सर्वधर्मसमभाव के प्रतीक थे. उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे को गलत जानकरी दी गई है. खांबेकर का कहना है कि मुख्यमंत्री पहले साई सत चरित्र का अध्ययन करें और उसके बाद कोई फैसला लें.

अशोक खांबेकर ने बताया इससे पहले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी साईंबाबा के जन्मस्थान को लेकर ऐसा बयान दे चुके हैं. राष्ट्रपति 1 अक्टूबर 2018 को साई बाबा समाधि शताब्दी समारोह का उद्धघाटन करने आए थे. उन्होंने भी कहा था कि पाथरी गांव साईंबाबा का जन्मस्थान है और इसके विकास के लिए मैं काम करूंगा. उस समय भी राष्ट्रपति के इस वक्तव्य का विरोध किया गया था.



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