बहुआयामी व्यक्तित्व : निशीकांत त्रिपाठी


छुईखदान नगर प्रतिभाओं की जननी है । साहित्य , संगीत और कला के क्षेत्र में अनेक प्रतिभाओं ने अपनी प्रखर मेधा की बदौलत अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए छुईखदान की श्वेत माटी का मान बढ़ाया है । ऐसी एक बहुमुखी प्रतिभा का नाम था पंडित निशीकांत त्रिपाठी । 

पंडित निशिकान्त त्रिपाठी का जन्म 17 सितंबर 1962 को छुईखदान में हुआ था । वे चार भाइयों  और दो बहनों में तीसरे क्रम में थे । उनकी प्रारंभिक शिक्षा छुईखदान में हुई थी तथा उन्होंने उच्च शिक्षा पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर से प्राप्त की । उन्होंने समाज शास्त्र, राजनीति शास्त्र और इतिहास में स्नातकोत्तर और बी.एड की उपाधि प्राप्त की थी । उनके पिता स्व. डॉ. दामोदर प्रसाद त्रिपाठी प्रख्यात स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और आयुर्वेदिक चिकित्सक थे । उन्होंने निशीकांत त्रिपाठी को बचपन से ही स्वालंबन की शिक्षा प्रदान कर उनके व्यक्तित्व को दृढ़ इच्छाशक्ति वाले स्वाभिमानी व्यक्ति के रूप में गढ़ा था  । संभवतः यही कारण है कि रायपुर में अपनी महाविद्यालयीन  पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने एक निजी कंपनी में काम शुरू कर दिया था।  सन 1984 में सहायक शिक्षक पद पर चयनित होने के बाद वे छुईखदान वापस लौटे और अपने आप को शिक्षा के कार्य में समर्पित कर दिया । त्रिपाठी जी मूलतः रचनात्मक रूचि सम्पन्न व्यक्ति थे  । सन 1987 में गठित फ्रेंडस क्लब छुईखदान के वे प्रमुख आधार स्तम्भ थे । इस क्लब के माध्यम से बाजार लाइन छुईखदान में सार्वजनिक गणेश प्रतिमा की स्थापना कर उन्होंने अपनी सांस्कृतिक यात्रा शुरू की थी । फ्रेंडस क्लब ने सन 1989 से लेकर 1996 तक लगातार 7 वर्षों होली के अवसर पर  हास्य व्यंग से  भरपूर 4 पृष्ठों वार्षिक समाचार पत्र फ्रेंडस बकबक का प्रकाशन कर अपनी पृथक पहचान बनाई थी  । इस समाचार पत्र के कलेवर को संवारने में निशिकान्त त्रिपाठी  ने अपने मित्रों के साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी । पत्रकारिता में उनकी रुचि थी । क्षेत्र की समस्याओं को लेकर उन्होंने रायपुर से प्रकाशित दैनिक देशबंधु में अनेक लेख और डिस्पैच लिखे थे । शिक्षक साथियों की समस्याओं को लेकर भी वे काफी सक्रिय थे । वे अनेक संथाओं से सक्रिय और सकारात्मक रूप से जुड़े हुए थे ।उन्होंने 17 वर्षों तक शिक्षक कांग्रेस के छुईखदान ब्लॉक अध्यक्ष का दायित्व कुशलतापूर्वक संभाला था । श्री त्रिपाठी विप्र समाज छुईखदान के भी अध्यक्ष थे । वे नगर की सबसे ज्यादा रचनात्मक रूप से सक्रिय सेवाभावी जय जगन्नाथ सेवा समिति छुईखदान के प्रमुख सहयोगी थे ।

वे जिले की सबसे पुरानी हिंदी साहित्य समिति छुईखदान के पिछले 23 वर्षों से महासचिव थे । समिति के स्वर्ण जयंती समारोह से लेकर सभी प्रमुख आयोजनों में उन्होंने पूरी सक्रियता के साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी ।

श्री त्रिपाठी सन 2009 से 2019 तक जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) खैरागढ़ में प्रतिनियुक्ति पर व्याख्याता के रूप में कार्यरत थे।  इस अवधि में उन्होंने शिक्षक प्रशिक्षण और पुस्तक लेखक मंडल के सदस्य  के रूप में उल्लेखनीय सेवाएं दी थी । डाइट के विभिन्न सेमिनारों और कार्यशालाओं में प्रदेश के दिग्गज विद्वानों और विषय विशेषज्ञों को आमंत्रित कर उन्होने एक अच्छी परम्परा की शुरूआत की थी।  छत्तीसगढ़ में मिडिल स्कूल के हिंदी भाषा के पाठ्यक्रम में छत्तीसगढ़ी बोली को शामिल करने संबंधी कार्यों का उन्होंने डाइट खैरागढ़ में समन्वय किया था । वे इसके लेखक मंडल के भी सदस्य थे । उन्हें पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय द्वारा संचालित डी. एल. एड. के प्रथम वर्ष के पाठ्यक्रम  में भाषा एवं भाषा शिक्षा विषय के संपादक मंडल में शामिल किया गया था । संभवतः यह उपलब्धि प्राप्त करने वाले वे जिले के प्रथम शिक्षक थे ।

वे  अत्यंत पितृ भक्त थे । अपने पिता डॉ. दामोदर प्रसाद त्रिपाठी की वृद्धावस्था में उन्होंने खूब सेवा की। अपने पिता के प्रातःकाल उठने से लेकर उनके स्नान, नाश्ता, भोजन, शयन और समय पर दवाई देने को लेकर बेहद सतर्क रहते थे । यही कारण है कि उन्हें अपने पिता का लम्बे समय तक सानिध्य मिला ।  स्वतंत्रता आंदोलन में अतुलनीय योगदान के लिए उनके पिता डॉ.दामोदर प्रसाद त्रिपाठी को 2008 और 2012 में दो बार राष्ट्रपति के हाथों सम्मानित होने का गौरव प्राप्त हुआ था । दोनों बार अपने पिता को लेकर दिल्ली गए और उस गौरवपूर्ण क्षण के साक्षी बने । वे बीते दिनों कोरोना वायरस की चपेट में आ गए थे और रायपुर के एक निजी अस्पताल में उपचार के दौरान 12 मई 2021 को उन्होंने अंतिम सांस ली । उनका असामयिक निधन स्तब्ध करने वाला था, क्योंकि उनका सर्वश्रेष्ठ आना अभी बाकी था ।

वीरेन्द्र बहादुर सिंह 

मोबाइल - 9407760700

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